Donation Scam Update : राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय- अनिल मिश्रा को क्लीन चिट, 8 को माना आरोपी

SIT जांच की फाइनल रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और सदस्य डॉ. अनिल मिश्रा को क्लीन चिट मिल गई है। जबकि जेल में बंद 8 आरोपियों को दोषी माना है।

Donation Scam Update : राममंदिर चढ़ावा चोरी मामले में चंपत राय- अनिल मिश्रा को क्लीन चिट, 8 को माना आरोपी

Ram Mandir Donation Scam Update : उत्तर प्रदेश। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में जांच कर रही उत्तर प्रदेश सरकार की SIT ने अपनी फाइनल रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के खिलाफ चोरी में सीधे शामिल होने का निष्कर्ष नहीं निकाला गया है। यह जानकारी सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। रिपोर्ट को उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने राम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास को सौंपा है। इसे ट्रस्ट की आगामी बैठक में रखा जाना है। रिपोर्ट में शामिल निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई पर फैसला होगा।

आठ आरोपी पहले से जेल में

इस मामले में आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है और सभी गिरफ्तार किए जा चुके हैं। आरोप चढ़ावे की गिनती के दौरान नकदी और अन्य कीमती सामान में हेराफेरी से जुड़े हैं। पुलिस जांच में कुछ आरोपियों के पास से नकदी और अन्य सामान बरामद होने की बात भी सामने आई थी।

जून में सामने आए मामले के बाद पुलिस ने तेजी से कार्रवाई की थी। हालांकि, SIT की शुरुआती जांच में मंदिर की दान राशि की गिनती और सुरक्षा व्यवस्था में कई गंभीर कमियां सामने आई थीं। प्रारंभिक रिपोर्ट में 45 दिनों की CCTV फुटेज की जांच के दौरान करीब 70 संदिग्ध घटनाओं का उल्लेख किया गया था।

पहली SIT ने जून में दी थी रिपोर्ट

चढ़ावे की कथित चोरी का मामला 7 जून को सामने आया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय SIT बनाई थी। इस टीम ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंपी। इसके दो दिन बाद 25 जून को ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर FIR दर्ज की गई।

FIR में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू समेत आठ लोगों को नामजद किया गया। चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के नाम FIR में शामिल नहीं थे। प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद दोनों ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था। ट्रस्ट ने उनके इस्तीफे स्वीकार कर लिए थे।


सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद जांच का ढांचा बदला

मामले में सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल होने के बाद जांच को लेकर अदालत ने भी निर्देश दिए। शीर्ष अदालत ने SIT की जांच की प्रगति पर स्टेटस रिपोर्ट मांगी और बाद में जांच को और मजबूत बनाने के लिए फॉरेंसिक ऑडिटर को शामिल करने का निर्देश दिया।

अदालत ने जांच को निष्पक्ष और प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया। जुलाई में SIT ने सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे में स्टेटस रिपोर्ट भी दाखिल की थी। अदालत ने साफ किया कि जांच की रिपोर्ट पहले उसके सामने रखी जाए और उसके बाद यह तय किया जाएगा कि उसे सभी पक्षों को उपलब्ध कराया जाए या नहीं।

जांच में सुरक्षा व्यवस्था पर भी उठे सवाल

SIT की प्रारंभिक जांच में केवल चोरी के आरोपों पर ही ध्यान नहीं दिया गया, बल्कि मंदिर की दान राशि गिनने की पूरी व्यवस्था की कमियों को भी देखा गया। रिपोर्ट के मुताबिक, उपलब्ध CCTV फुटेज में कर्मचारियों द्वारा नकदी को कपड़ों, जेब और जूतों में छिपाने जैसी घटनाएं सामने आई थीं।

जांच में यह भी पाया गया कि गिनती वाले कमरे में प्रवेश और बाहर निकलते समय नियमित तलाशी की व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू नहीं थी। कर्मचारियों के लिए बिना जेब वाली यूनिफॉर्म तय होने के बावजूद नियम का पालन नहीं हुआ। इससे चढ़ावे की सुरक्षा और हिसाब-किताब की व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए।

अनिल मिश्रा की भूमिका पर प्रारंभिक रिपोर्ट में सवाल

पहली SIT की रिपोर्ट में तत्कालीन ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा की भूमिका को लेकर सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2025 में ट्रस्ट और SBI के बीच सुरक्षा प्रोटोकॉल में बदलाव हुआ था। पहले हर व्यक्ति की तलाशी की व्यवस्था थी, लेकिन बाद के प्रोटोकॉल में इसे नियमित या रैंडम जांच तक सीमित किया गया।

प्रारंभिक रिपोर्ट में कहा गया कि यह व्यवस्था प्रभावी तरीके से लागू नहीं हुई। हालांकि, उस रिपोर्ट ने अनिल मिश्रा के खिलाफ FIR की सिफारिश नहीं की थी। अब फाइनल रिपोर्ट में भी उनके खिलाफ सीधे चोरी में शामिल होने का निष्कर्ष नहीं बताया गया है।

चंपत राय का नाम भी चोरी के आरोप में नहीं

प्रारंभिक SIT रिपोर्ट में चंपत राय का नाम चोरी की सिफारिश वाले आरोपियों की सूची में नहीं था। अब सामने आई फाइनल रिपोर्ट को लेकर भी यही जानकारी दी गई है कि उनके खिलाफ चढ़ावा चोरी में संलिप्तता नहीं पाई गई। हालांकि, मामले की जांच और मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े सवाल अलग विषय हैं।

चंपत राय ने विवाद बढ़ने के बाद ट्रस्ट के महासचिव पद से इस्तीफा दिया था। इस मामले में आरोप और जांच के निष्कर्षों को अलग-अलग देखना जरूरी है, क्योंकि किसी व्यक्ति का प्रशासनिक स्तर पर नाम सामने आना अपने आप में आपराधिक दोष साबित नहीं करता।

आठ आरोपियों पर क्या आरोप हैं?

मामले में रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, करुणेश पांडेय, मनीष यादव, अविनाश शुक्ला और रमाशंकर मिश्रा आरोपी बनाए गए हैं। इनकी भूमिकाएं दानपात्रों की निगरानी, नकदी को गिनती कक्ष तक पहुंचाने और चढ़ावे की गिनती से जुड़ी थीं।

जांच एजेंसियों ने आरोप लगाया है कि कुछ कर्मचारियों ने गिनती के दौरान नकदी छिपाकर बाहर ले जाने की कोशिश की। अलग-अलग आरोपियों से नकदी बरामद होने की जानकारी भी जांच के दौरान सामने आई थी। हालांकि आरोप साबित होना अभी न्यायिक प्रक्रिया का विषय है।

सुप्रीम कोर्ट में चार याचिकाओं से बढ़ा मामला

चढ़ावा चोरी मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कई याचिकाएं दाखिल हुई हैं। याचिकाकर्ताओं ने मामले की CBI जांच और अदालत की निगरानी में जांच की मांग की है। कुछ याचिकाओं में ट्रस्ट के वित्तीय लेन-देन के CAG ऑडिट और फॉरेंसिक ऑडिट की मांग भी की गई है।

इसके अलावा बैंक, UPI, डिजिटल भुगतान और अन्य वित्तीय रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग उठाई गई है। याचिकाओं में मंदिर में आने वाले दान की पारदर्शी व्यवस्था और वित्तीय जानकारी सार्वजनिक करने से जुड़े सुझाव भी दिए गए हैं।

आगे ट्रस्ट की बैठक में होगी चर्चा

SIT की फाइनल रिपोर्ट अब राम मंदिर ट्रस्ट के सामने रखी जाएगी। इसके बाद रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्षों और जांच की स्थिति पर चर्चा हो सकती है। दूसरी ओर, सुप्रीम कोर्ट भी इस मामले की जांच की प्रगति पर नजर रख रहा है।

अदालत ने पहले ही SIT को स्टेटस रिपोर्ट देने और जांच को तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचाने पर जोर दिया है। इसलिए फाइनल रिपोर्ट सामने आने के बावजूद मामले से जुड़े न्यायिक और प्रशासनिक सवाल पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं। आगे की कार्रवाई अदालत के निर्देश और जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।