150वें वर्ष में ‘वंदे मातरम्’ को बड़ा सम्मान, अब ‘जन गण मन’ जैसा कानूनी संरक्षण
वंदे मातरम् के 150वें वर्ष में इसे कानूनी संरक्षण मिलने की खबर सामने आई है। Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रीय गीत के गायन में जानबूझकर बाधा डालने या सभा में व्यवधान पैदा करने पर आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है। जानिए नए संशोधन में क्या बदला, कितनी सजा का प्रावधान है और क्या अब हर नागरिक के लिए वंदे मातरम् गाना अनिवार्य होगा।
महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद नया कानून प्रभावी —
राष्ट्रगीत के गायन में जानबूझकर बाधा डालना या सभा में व्यवधान पैदा करना अपराध ! भारत के राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को अब राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के समान वैधानिक कानूनी संरक्षण मिल गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को Prevention of Insults to National Honour (Amendment) Bill, 2026 को मंजूरी दे दी। संसद के दोनों सदनों से पारित होने के बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह विधायी बदलाव कानून का हिस्सा बन गया है।
यह फैसला ऐसे समय आया है, जब देश ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है। केंद्र सरकार ने इसके 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में वर्षभर चलने वाले कार्यक्रमों को मंजूरी दी थी।
आखिर किस कानून में हुआ संशोधन?
सरकार ने Prevention of Insults to National Honour Act, 1971 में संशोधन किया है। पहले इस कानून में राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान से जुड़े अपमान तथा राष्ट्रगान के गायन में जानबूझकर बाधा डालने जैसे कृत्यों के खिलाफ दंड का प्रावधान था।
2026 के संशोधन के जरिए इसी कानूनी सुरक्षा के दायरे में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ को भी शामिल कर दिया गया है। यानी अब राष्ट्रगीत के संबंध में भी वही वैधानिक सुरक्षा लागू होगी जो राष्ट्रगान के लिए कानून में मौजूद है।
वंदे मातरम् का अपमान किया तो क्या सजा होगी?
नए कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ‘वंदे मातरम्’ के गायन को रोकता है या ऐसे किसी कार्यक्रम/सभा में जानबूझकर व्यवधान पैदा करता है जहां राष्ट्रगीत गाया जा रहा है, तो उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हो सकती है।
सजा का प्रावधान :
- अधिकतम 3 वर्ष तक की जेल
- जुर्माना
- या जेल और जुर्माना दोनों
वहीं, इस कानून में पहले से राष्ट्रगान से जुड़े अपराध के लिए दूसरी और उसके बाद की दोषसिद्धि पर कम-से-कम एक वर्ष की सजा का प्रावधान है। संशोधन के जरिए राष्ट्रगीत को भी इसी व्यवस्था के दायरे में लाया गया है।
क्या अब हर व्यक्ति के लिए वंदे मातरम् गाना अनिवार्य है?
यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। कानून का मुख्य प्रावधान जानबूझकर गायन रोकने या सभा में व्यवधान पैदा करने को अपराध बनाता है। इसका अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक नागरिक को हर परिस्थिति में ‘वंदे मातरम्’ गाने के लिए बाध्य किया गया है। यानी गाना और किसी दूसरे व्यक्ति के गायन में जानबूझकर बाधा डालना—दो अलग कानूनी स्थितियां हैं। नए कानून का फोकस राष्ट्रीय गीत के सम्मान और उसके गायन में जानबूझकर हस्तक्षेप को दंडनीय बनाने पर है।
‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम्’ अब कानूनी तौर पर कितने करीब?
भारत में ‘जन गण मन’ राष्ट्रगान है, जबकि ‘वंदे मातरम्’ राष्ट्रीय गीत है। दोनों की संवैधानिक स्थिति और ऐतिहासिक भूमिका अलग-अलग है।
लेकिन 2026 के संशोधन के बाद Prevention of Insults to National Honour Act के तहत दोनों को इस खास मामले में समान वैधानिक संरक्षण प्राप्त हो गया है।
यानी अब राष्ट्रगान की सभा में जानबूझकर व्यवधान डालना और राष्ट्रगीत के गायन में जानबूझकर व्यवधान डालना—दोनों कानून के दायरे में आएंगे।
150 साल पुराने गीत को मिला नया कानूनी कवच
‘वंदे मातरम्’ की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने 19वीं सदी में की थी और यह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय चेतना का महत्वपूर्ण प्रतीक बना। वर्ष 2025-26 में इसके 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर केंद्र सरकार ने देशव्यापी कार्यक्रमों की घोषणा की। अब इसी 150वें वर्ष में इसे वैधानिक संरक्षण देने वाला कानून भी लागू हो गया है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?
सरकार के लिए यह केवल एक कानूनी संशोधन नहीं, बल्कि स्वतंत्रता आंदोलन और राष्ट्रीय चेतना से जुड़े प्रतीक को वैधानिक सुरक्षा देने का कदम है। वहीं, कानून के लागू होने के बाद इसके इस्तेमाल और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बीच संतुलन को लेकर भी सार्वजनिक और कानूनी बहस महत्वपूर्ण रहेगी। 150वें वर्ष में ‘वंदे मातरम्’ अब सिर्फ राष्ट्रीय भावना का प्रतीक नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सम्मान से जुड़े कानून के तहत संरक्षित राष्ट्रीय गीत भी है।
Varsha Shrivastava 
