नशा मुक्ति अभियान के बाद स्कूल परिसर में मिला संदिग्ध नशे का कचरा, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
रसलपुर के सरकारी स्कूल में संदिग्ध नशे की सामग्री मिलने से हड़कंप, प्रशासन और पुलिस की निगरानी कटघरे में
शाजापुर से संवाददाता मनीष कुमार।
जिले में एक ओर पुलिस और प्रशासन "नशे से दूरी है जरूरी 2.0" अभियान चलाकर युवाओं और विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने का संदेश दे रहे थे। अभियान का समापन भी हो गया, लेकिन समापन के कुछ ही समय बाद उकावता चौकी क्षेत्र के ग्राम रसलपुर स्थित शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय से सामने आई तस्वीरों ने पूरे अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
विद्यालय की पुरानी और जर्जर इमारत की सफाई के दौरान कथित रूप से नशे के सेवन से जुड़ी संदिग्ध सामग्री और कचरा मिला। जिस परिसर में कभी छोटे-छोटे बच्चे शिक्षा ग्रहण करते थे, वहां इस तरह की सामग्री मिलना न केवल चिंताजनक है, बल्कि सरकारी संस्थानों की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि विद्यालय की इमारत पिछले कई सप्ताह से खाली थी, तो उसकी नियमित निगरानी क्यों नहीं की गई? क्या असामाजिक तत्वों ने खाली पड़े सरकारी भवन को अपना ठिकाना बना लिया था, या फिर किसी ने जानबूझकर यहां यह सामग्री फेंकी? इन सवालों का जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं है।
इस मामले में विद्यालय के शिक्षक रहीस बैग ने बताया कि विद्यालय की पुरानी इमारत पिछले एक-दो महीने से जर्जर होने के कारण बंद है और विद्यार्थियों की कक्षाएं दूसरी इमारत में संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें इस प्रकार की सामग्री की जानकारी नहीं थी। जानकारी मिलने के बाद तत्काल परिसर की सफाई करवा दी गई।
वहीं, उकावता चौकी प्रभारी रमेश यादव ने बताया कि विद्यालय की एक ओर की खिड़की टूटी हुई है। संभव है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने बाहर से कचरा अंदर फेंका हो। हालांकि, सवाल यह भी है कि यदि ऐसा है, तो कोई व्यक्ति सामान्य कचरे के बजाय इस प्रकार की संदिग्ध सामग्री स्कूल परिसर में ही क्यों फेंकेगा? यह बिंदु जांच का विषय है।
यह मामला केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं है। यह सरकारी भवनों की सुरक्षा, निगरानी और जवाबदेही से जुड़ा गंभीर विषय है। यदि स्कूलों जैसी संवेदनशील जगहों की नियमित निगरानी नहीं होगी, तो उनका दुरुपयोग होने की आशंका बनी रहेगी।
अब सभी की निगाहें पुलिस अधीक्षक और जिला प्रशासन पर टिकी हैं। सवाल यह है कि क्या इस मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाएगी और यदि किसी ने विद्यालय परिसर का दुरुपयोग किया है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी केवल सफाई तक सीमित रह जाएगा।
Varsha Shrivastava 
