कल विराजेंगे विघ्नहर्ता गणेश : इन नियमों के साथ करें गणपति पूजन, बरसेगी बप्पा की कृपा
Ganesh Chaturthi festival : 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन हरतालिका तीज का व्रत भी रखा जाएगा। तृतीया युक्त चतुर्थी का यह धार्मिक संयोग विशेष माना जा रहा है।
Ganesh Chaturthi festival : 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी का पर्व मनाया जाएगा। इसी दिन हरतालिका तीज का व्रत भी रखा जाएगा। इस दिन महिलाएं पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन की कामना के लिए निर्जला व्रत करती हैं। तृतीया युक्त चतुर्थी का यह धार्मिक संयोग विशेष माना जा रहा है।
गणेश चतुर्थी से भगवान गणेश के 10 दिवसीय महापर्व की शुरुआत होती है। ऐसे में गणपति की स्थापना, पूजन विधि, पूजा सामग्री और इससे जुड़े नियमों की जानकारी होना जरूरी है, ताकि विधि-विधान से बप्पा की पूजा-अर्चना की जा सके।

गणेश प्रतिमा स्थापना का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य के अनुसार, इस बार गणेश चतुर्थी पर पार्थिव गणेश की स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 11:30 बजे रहेगा। इस दौरान ब्रह्म योग का संयोग बन रहा है। मान्यता है कि शुभ मुहूर्त में मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा की स्थापना कर विधि-विधान से पूजा करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
घर में गणेश प्रतिमा की स्थापना के लिए अभिजीत मुहूर्त को शुभ माना गया है। सुबह 11:30 बजे गणेश प्रतिमा स्थापित करने के बाद भगवान गणेश की विधि-विधान से पूजा-अर्चना करें। वहीं, कारोबारियों के लिए घर में प्रतिमा स्थापना के बाद दुकान या प्रतिष्ठान में भी अभिजीत मुहूर्त के अंतिम चरण में गणेश प्रतिमा की स्थापना की जा सकती है। प्रतिष्ठान में भगवान गणेश को प्रधान देव मानकर पूजा-अर्चना करने की परंपरा है।

कैसे करें गणेश प्रतिमा की स्थापना?
गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करने से पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह साफ-सफाई करें। इसके बाद पूजा की चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं और उस पर स्वस्तिक बनाएं। भगवान गणेश का आह्वान करते हुए मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमा को विधि-विधान के साथ चौकी पर विराजमान करें। प्रतिमा स्थापित करने के बाद भगवान गणेश का ध्यान करें और पूजा-अर्चना शुरू करें।

गणेश पूजन की सरल विधि
गणेश जी की पूजा के लिए सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और शांत मन से भगवान का ध्यान करें। इसके बाद धूप-दीप जलाकर गणेश जी को पुष्प, दूर्वा और नैवेद्य अर्पित करें। भगवान गणेश को मोदक का भोग लगाएं। इसके बाद पंचोपचार पूजन करें और अंत में गणेश जी की आरती करें। पूजा के दौरान परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करें।
अभीष्ट सिद्धि के लिए विशेष पूजा
मान्यता के अनुसार, गणेश उत्सव के इन 10 दिनों में भगवान गणेश के विभिन्न स्वरूपों की साधना की जा सकती है। प्रतिदिन 21 दूर्वा अर्पित करते हुए मोदक का भोग लगाने और गणेश जी के नामों का जाप करने की परंपरा है। गणेश जी के प्रमुख नामों में गणाधिप, उमापुत्र, अघनाशन, विनायक, ईशपुत्र, सर्वसिद्धिप्रदायक, एकदंत, इभवक्र, मूषकवाहन और कुमारगुरु शामिल हैं।
मान्यता है कि जिन लोगों के विवाह या अन्य मांगलिक कार्यों में बाधाएं आ रही हों, वे गणेश सहस्रनाम स्तोत्र का पाठ और हवन-अनुष्ठान कर सकते हैं। इसे कार्यसिद्धि के लिए भगवान गणेश की विशेष साधना माना जाता है।

गणेश जी को दूर्वा क्यों चढ़ाई जाती है?
पौराणिक कथा के अनुसार, जब भगवान गणेश ने अनलासुर नामक राक्षस को निगल लिया था, तब उनके पेट में अत्यधिक जलन होने लगी। इस जलन को शांत करने के लिए कश्यप ऋषि ने भगवान गणेश को दूर्वा की 21 गांठें अर्पित करने की सलाह दी।
दूर्वा अर्पित करने से गणेश जी के पेट की जलन शांत हुई। तभी से दूर्वा भगवान गणेश को प्रिय मानी जाती है और उनकी पूजा में विशेष रूप से अर्पित की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, दूर्वा अर्पित करने से भक्त चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति की कामना करते हैं।

गणपति प्रतिमा से जुड़ी मान्यताएं
भगवान गणेश की प्रतिमा के स्वरूप को लेकर भी अलग-अलग धार्मिक मान्यताएं हैं। मान्यता के अनुसार, घर और व्यापारिक प्रतिष्ठान में गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करते समय कुछ बातों का ध्यान रखा जाता है।
घर में स्थापित की जाने वाली गणेश प्रतिमा में गणेश जी की सूंड दाईं ओर होने को शुभ माना जाता है। वहीं, व्यापारिक प्रतिष्ठानों में बाईं ओर सूंड वाली गणेश प्रतिमा को अनुकूल माना जाता है। हालांकि, प्रतिमा की स्थापना करते समय पूजा स्थल की परंपरा और मान्यताओं का भी ध्यान रखना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भगवान गणेश की पूजा श्रद्धा और विधि-विधान के साथ की जाए।
Anjali 
