भौंरी पुलिस अकादमी में 46वें DSP बैच की ट्रेनिंग शुरू, 65% महिला अधिकारी

MP POLICE DSP TRAINING: मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भौंरी में 46वें डीएसपी बैच की बेसिक ट्रेनिंग शुरू हो गई है। इस बैच में कुल 17 प्रशिक्षु अधिकारी शामिल हैं, जिनमें 11 महिलाएं और 6 पुरुष अधिकारी हैं।

भौंरी पुलिस अकादमी में 46वें DSP बैच की ट्रेनिंग शुरू, 65% महिला अधिकारी

MP POLICE DSP TRAINING : भोपाल। मध्यप्रदेश पुलिस अकादमी, भौंरी में 46वें डीएसपी बैच की बेसिक ट्रेनिंग शुरू हो गई है। इस बैच में कुल 17 प्रशिक्षु अधिकारी शामिल हैं, जिनमें 11 महिलाएं और 6 पुरुष अधिकारी हैं। यानी इस बैच में महिला अधिकारियों की हिस्सेदारी करीब 65 फीसदी है। इसे महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर देखा जा रहा है। अकादमी के लिए भी यह बैच कई मायनों में खास है।

फील्ड ट्रेनिंग पर रहेगा ज्यादा जोर

अकादमी के डिप्टी डायरेक्टर रामजी श्रीवास्तव ने बताया कि यह पहला डीएसपी बैच है, जिसके पाठ्यक्रम में फील्ड ट्रेनिंग पर विशेष जोर दिया जाएगा। प्रशिक्षु अधिकारियों को नए आपराधिक कानूनों की विस्तार से जानकारी देने के साथ ही आधुनिक तकनीक को प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया है। इस बदलाव का उद्देश्य पुलिसिंग को समय के साथ आधुनिक बनाना और प्रशिक्षु अधिकारियों को भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार करना है।

प्रशिक्षण में तीनों नए कानून शामिल

पूरे प्रशिक्षण के दौरान तीनों नए आपराधिक कानूनों की पढ़ाई कराई जाएगी। प्रशिक्षुओं को भारतीय न्याय संहिता (BNS), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (BSA) के तहत अपराध अनुसंधान, जांच प्रक्रिया और डिजिटल साक्ष्य जुटाने की तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाएगा।

फॉरेंसिक और तकनीक पर विशेष ध्यान

पारंपरिक परेड और ड्रिल के साथ-साथ प्रशिक्षु अधिकारियों को फॉरेंसिक टूल्स, साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन और ओपन सोर्स इंटेलिजेंस (OSINT) का व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। साइबर अपराध के बढ़ते मामलों को देखते हुए इस प्रशिक्षण को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशिक्षुओं को वास्तविक मामलों के आधार पर विभिन्न परिस्थितियों से निपटने का अभ्यास कराया जाएगा, ताकि वे अपराध की जांच और पुलिसिंग को बेहतर तरीके से समझ सकें।

संविधान और मानवाधिकार का भी पाठ

प्रशिक्षु अधिकारियों को केवल कानून और पुलिसिंग की जानकारी ही नहीं दी जाएगी, बल्कि उन्हें भारतीय संविधान, मानवाधिकार, नीतिशास्त्र, व्यक्तित्व विकास और जनसंवाद जैसे विषयों की भी शिक्षा दी जाएगी। अकादमी का उद्देश्य ऐसे पुलिस अधिकारियों को तैयार करना है, जो कानून के साथ-साथ मानवीय मूल्यों को भी समझें और एक जिम्मेदार, संवेदनशील तथा प्रभावी अधिकारी के रूप में अपनी भूमिका निभाएं।

आरक्षण से आगे बढ़कर महिलाओं की मौजूदगी

मध्यप्रदेश में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण लागू है। हालांकि 46वें डीएसपी बैच में महिलाओं ने आरक्षण की सीमा से आगे बढ़कर अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। कुल 17 प्रशिक्षु अधिकारियों में 11 महिलाएं हैं, यानी 64.7 फीसदी पद महिलाओं ने हासिल किए हैं। यह उपलब्धि मेरिट और ओपन कैटेगरी में महिलाओं के बेहतर प्रदर्शन को भी दर्शाती है।

दो साल की होगी डीएसपी ट्रेनिंग

डीएसपी अधिकारियों की ट्रेनिंग कुल दो साल की होगी। पहले साल में अकादमी में कानून, पुलिस मैनुअल, हथियार संचालन, परेड-ड्रिल और निहत्थे मुकाबले सहित विभिन्न विषयों का प्रशिक्षण दिया जाएगा। वहीं, दूसरे साल में प्रशिक्षु अधिकारियों को थानों, सीएसपी कार्यालयों और पुलिस लाइन में फील्ड ट्रेनिंग दी जाएगी। इस दौरान उन्हें वास्तविक पुलिसिंग व्यवस्था, अपराध जांच और कानून-व्यवस्था से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों का अनुभव कराया जाएगा।

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