एक एंबुलेंस में दो नंबर, मरीज लेकर दौड़ रही संदिग्ध गाड़ी; नियमों पर उठे सवाल

जबलपुर में मरीज लेकर जा रही एक एंबुलेंस पर आगे-पीछे अलग-अलग नंबर प्लेट मिलने से सवाल उठे हैं। परमिट, फिटनेस, बीमा और रजिस्ट्रेशन की जांच की मांग।

एक एंबुलेंस में दो नंबर, मरीज लेकर दौड़ रही संदिग्ध गाड़ी; नियमों पर उठे सवाल

जबलपुर। मरीजों को अस्पताल पहुंचाने वाली एंबुलेंस वैध है या नहीं इसी को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. दरअसल एक एंबुलेंस पर दो नंबर प्लेट लगी हुई थी. एक में उत्तरप्रदेश का नंबर था दर्ज था. तो दूसरे में टेंपररी नंबर प्लेट लगी हुई थी.

मामला बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात करीब 1 बजे का है. यह संदिग्ध एंबुलेंस प्रेम नर्सिंग होम से एक गंभीर मरीज को लेकर जबलपुर के लिए रवाना हुई. एंबुलेंस पर दिवित हार्ट हॉस्पिटल का नाम भी दर्ज था. वाहन पर अलग-अलग नंबर देखकर इसके रजिस्ट्रेशन, दस्तावेज और वैधता को लेकर सवाल उठ रहे हैं.

बताया गया कि एंबुलेंस की आगे की नंबर प्लेट पर UP-23 AT-0827, जबकि पीछे TMP-2019/7042 दर्ज था. ऐसे में सवाल है कि एक ही वाहन पर दो अलग-अलग नंबर क्यों लगाए गए थे और क्या वाहन के सभी दस्तावेज नियमानुसार हैं?

दूसरे राज्यों के नंबर वाली एंबुलेंस पर भी सवाल

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि शहर में कई ऐसी एंबुलेंस संचालित हो रही हैं, जिनका पंजीयन दूसरे राज्यों का है। ये वाहन मध्यप्रदेश में मरीजों को लेकर दौड़ रहे हैं। ऐसे में इनके स्थानीय संचालन, परमिट, फिटनेस, बीमा और अन्य जरूरी दस्तावेजों की जांच की जरूरत महसूस की जा रही है।

अस्पतालों के बाहर एंबुलेंस की ‘मंडी’?

शहर में अस्पतालों के आसपास बड़ी संख्या में एंबुलेंस खड़ी दिखाई देती हैं। आरोप हैं कि इनमें से कुछ वाहनों की हालत बेहद खराब है और जरूरी सुरक्षा इंतजाम भी नहीं हैं। बिरला अस्पताल के सामने, सहकारी बैंक के पास और जिला अस्पताल के आसपास एंबुलेंस का जमावड़ा देखा जाता है।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ जगहों पर दलाल भी सक्रिय रहते हैं, जो मरीजों को अस्पताल पहुंचाने से लेकर ब्लड की व्यवस्था तक में भूमिका निभाते हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

सबसे बड़ा सवाल मरीजों की सुरक्षा को लेकर है। क्या सभी एंबुलेंस में फायर सेफ्टी उपकरण, जरूरी मेडिकल सुविधाएं, फिटनेस और अन्य सुरक्षा मानक पूरे हैं? यदि नहीं, तो गंभीर मरीजों को ऐसी गाड़ियों में ले जाना कितना सुरक्षित है?

आरटीओ अभियान थमा तो फिर बढ़े हौसले

कुछ समय पहले परिवहन विभाग ने एंबुलेंस की चेकिंग के लिए अभियान चलाया था। इस दौरान कई वाहनों पर कार्रवाई भी की गई थी। कार्रवाई के बाद कुछ समय तक व्यवस्था में सुधार दिखाई दिया, लेकिन अभियान धीमा पड़ने के बाद एक बार फिर संदिग्ध एंबुलेंस के संचालन को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

अब जरूरत है कि आरटीओ और संबंधित विभाग दोबारा विशेष जांच अभियान चलाएं। एंबुलेंस के रजिस्ट्रेशन नंबर, परमिट, फिटनेस, बीमा, नंबर प्लेट और मरीज परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की जांच की जाए। साथ ही अस्पतालों के आसपास खड़ी एंबुलेंस की भी जांच हो, ताकि नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जा सके और गंभीर मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित हो।