ईरान की टॉप लीडरशिप खत्म होने के बाद भी कैसे लड़ रहा है युद्ध? मोजेक डिफेंस रणनीति से 7 हिस्सों में बंटी सैन्य ताकत

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी युद्ध के बीच सवाल उठ रहा है कि शीर्ष नेतृत्व के नुकसान के बावजूद ईरान कैसे लड़ाई जारी रख पा रहा है।

ईरान की टॉप लीडरशिप खत्म होने के बाद भी कैसे लड़ रहा है युद्ध? मोजेक डिफेंस रणनीति से 7 हिस्सों में बंटी सैन्य ताकत

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच जारी युद्ध को 12 दिन हो चुके हैं। शुरुआती हमलों में ईरान की शीर्ष नेतृत्व पर बड़ा असर पड़ा और कई बड़े सैन्य अधिकारी मारे गए। इसके बावजूद ईरान लगातार युद्ध जारी रखने का दावा कर रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान ने युद्ध की स्थिति के लिए पहले से ही ऐसी रणनीति तैयार की थी, जिसमें पूरी सैन्य कमान एक व्यक्ति या एक केंद्र पर निर्भर नहीं रहती। इस रणनीति को “डिसेंट्रलाइज्ड मोजेक डिफेंस” कहा जाता है।

क्या है मोजेक डिफेंस रणनीति:
मोजेक का मतलब छोटे-छोटे टुकड़ों से बने पैटर्न से होता है। इसी सिद्धांत पर ईरान ने अपनी सैन्य व्यवस्था बनाई है।
इस रणनीति के तहत सेना और सुरक्षा ढांचे को कई स्वतंत्र हिस्सों में बांट दिया गया है। अगर दुश्मन किसी एक मुख्यालय या नेतृत्व को निशाना बनाकर खत्म भी कर दे, तब भी बाकी सिस्टम काम करता रहता है और युद्ध जारी रह सकता है।

नेटवर्क की तरह काम करता है पूरा सिस्टम:
ईरान का यह मॉडल मुख्य रूप से Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) से जुड़ा है। इस ढांचे में अलग-अलग सैन्य इकाइयां एक नेटवर्क की तरह काम करती हैं- IRGC

1. बसिज मिलिशिया
2. नियमित सेना
3. मिसाइल यूनिट
4. नौसेना
5. एयर डिफेंस
6. स्थानीय कमांड संरचनाएं
यदि कम्युनिकेशन टूट भी जाए तो स्थानीय कमांडर स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर सकते हैं।

सेना को 7 हिस्सों में बांटकर दिए गए अलग-अलग रोल:
1. नियमित सेना:
यह सेना दुश्मन के शुरुआती हमले को रोकने का काम करती है। टैंक, इन्फैंट्री और मैकेनाइज्ड यूनिट्स दुश्मन की प्रगति को धीमा करती हैं।

2. एयर डिफेंस यूनिट:
ये यूनिट्स छिपाव और फैलाव की रणनीति से दुश्मन की हवाई ताकत को सीमित करने की कोशिश करती हैं।

3. IRGC:
दूसरे चरण में मुख्य भूमिका निभाती है। इसमें घात लगाकर हमला, गुरिल्ला युद्ध और सप्लाई लाइनों को बाधित करना शामिल है।

4. बसिज मिलिशिया:
31 प्रांतों में फैली यह मिलिशिया स्थानीय स्तर पर प्रतिरोध और सुरक्षा संभालती है।

5. नौसेना:
फारस की खाड़ी और Strait of Hormuz जैसे अहम समुद्री रास्तों में तेज हमले, माइंस और एंटी-शिप मिसाइलों का इस्तेमाल करती है।

6. मिसाइल फोर्स:
दुश्मन के सैन्य ठिकानों और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर लंबी दूरी से हमले करती है।

7. क्षेत्रीय नेटवर्क:
मिडिल ईस्ट में मौजूद सहयोगी समूहों के जरिए युद्ध को कई मोर्चों पर फैलाया जाता है।

क्यों बनाई गई यह रणनीति:
2001 में अमेरिका ने अफगानिस्तान और 2003 में इराक पर हमला किया था। उस समय Saddam Hussein की सरकार का अत्यधिक केंद्रीकृत सिस्टम जल्दी ढह गया।

ईरान ने इससे सबक लेते हुए अपनी सैन्य व्यवस्था को विकेंद्रीकृत बनाया ताकि किसी एक केंद्र पर हमला होने से पूरा सिस्टम खत्म न हो।

हर पद के लिए पहले से तय उत्तराधिकारी:
ईरान ने अपने सैन्य और प्रशासनिक ढांचे में कई पदों के लिए पहले से उत्तराधिकारी तय कर रखे हैं। कई पदों के लिए चार-चार संभावित उत्तराधिकारी रखे गए हैं, किसी नेता की मौत या संपर्क टूटने पर दूसरा तुरंत जिम्मेदारी संभाल लेता है, इससे कमांड सिस्टम कभी पूरी तरह ठप नहीं होता

लंबी जंग की रणनीति:
ईरान की रणनीति त्वरित जीत की नहीं बल्कि दुश्मन को लंबे समय तक थकाने की है। सस्ते ड्रोन और मिसाइलों से लगातार हमले करके विरोधी देश पर आर्थिक और सैन्य दबाव बढ़ाया जाता है। इस रणनीति की सोच चीन के नेता Mao Zedong की “प्रोलॉन्ग्ड वॉर” यानी लंबी युद्ध की अवधारणा से मिलती है।

ईरान की मोजेक डिफेंस रणनीति का मकसद यही है कि भारी हमलों और नेतृत्व के नुकसान के बावजूद देश की सैन्य क्षमता खत्म न हो। विकेंद्रीकृत कमांड, स्थानीय स्वतंत्रता और पहले से तय उत्तराधिकारियों के कारण ईरान लंबे समय तक युद्ध जारी रखने की क्षमता बनाए रखता है।