SGMH में सोनोग्राफी के लिए मरीज बेहाल, प्राइवेट सेंटर जाने को मजबूर
रीवा के संजय गांधी अस्पताल में सोनोग्राफी जांच के लिए मरीजों को 10 दिन से लेकर एक महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है। डॉक्टरों की कमी और सीमित संसाधनों की वजह से मरीज प्राइवेट सेंटरों में पैसे खर्च करने को मजबूर हो रहे हैं।
संजय गांधी अस्पताल में इलाज कराने आने वाले मरीजों की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है। यहां बीमारी से ज्यादा मरीज अस्पताल की बदहाल व्यवस्था से परेशान हैं। हालत ये है कि एक नॉर्मल सी सोनोग्राफी के लिए मरीजों को 10 दिन से लेकर महीने भर तक का इंतजार करना पड़ रहा है। मजबूरी में जेब ढीली कर प्राइवेट जांच केंद्रों का रुख करना पड़ रहा है।
अस्पताल में हर दिन सैकड़ों मरीज जांच के लिए पहुंचते हैं, लेकिन सिर्फ दो सोनोग्राफी मशीनों के भरोसे पूरा सिस्टम चल रहा है। ऊपर से रेडियोलॉजिस्ट के पांच पदों में से तीन पद खाली पड़े हैं। नतीजा ये है कि मरीज पूरे दिन अस्पताल के चक्कर काटते रहते हैं, लेकिन राहत नहीं मिलती।

सबसे ज्यादा परेशानी गायनी और सर्जरी विभाग के मरीजों को झेलनी पड़ रही है। डॉक्टर जांच लिख देते हैं, लेकिन तारीख इतनी दूर की मिलती है कि मरीज की बीमारी बढ़ जाए। दूर-दराज गांवों से आने वाले मरीजों के लिए यह परेशानी और भी बड़ी हो जाती है। कई लोग किराया खर्च कर बार-बार अस्पताल आते हैं, फिर भी समय पर जांच नहीं हो पाती।
मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि अस्पताल में दिनभर भटकने के बाद भी काम नहीं होता। आखिरकार मजबूरी में प्राइवेट सेंटरों में हजारों रुपये खर्च कर के सोनोग्राफी करानी पड़ती है। सवाल है कि जब सरकारी अस्पताल में जांच की सुविधा मौजूद है तो मरीजों को प्राइवेट सेंटरों का सहारा क्यों लेना पड़ रहा है?
जांच रिपोर्ट दिखाने के लिए भी जंग
सुबह डॉक्टर को दिखाने के बाद मरीजों को जांच रिपोर्ट लेकर दोबारा परामर्श लेने में भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। कई मरीजों को अस्पताल में रात गुजारनी पड़ती है। गर्मी हो या सर्दी, मरीज और उनके परिजन खुले परिसर में बैठे अपनी बारी का इंतजार करते दिखाई देते हैं।
Saba Rasool 
