संसदीय समिति के NTA-CBSE से तीखे सवाल, पूछा- पेपर लीक की परिभाषा क्या है?

NEET पेपर लीक और CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) विवाद की जांच कर रही संसदीय समिति ने NTA और CBSE से कई अहम सवाल पूछे हैं। समिति ने NTA से पेपर लीक की परिभाषा और 2018 से हुई परीक्षाओं में लीक की जानकारी मांगी, जबकि CBSE से Coempt कंपनी को ठेका देने की प्रक्रिया और उसके बैकग्राउंड की जांच पर जवाब तलब किया है।

संसदीय समिति के NTA-CBSE से तीखे सवाल, पूछा- पेपर लीक की परिभाषा क्या है?

नीट (NEET) पेपर लीक और सीबीएसई (CBSE) के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम में हुई कथित गड़बड़ियों को लेकर संसद की स्थायी समिति बेहद सख्त रुख अपना रही है। कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति ने राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) और CBSE को तलब कर लिखित जवाब मांगा है। समिति ने दोनों ही शीर्ष संस्थाओं के सामने सवालों की झड़ी लगा दी है।

NTA से पूछा: 'गेस पेपर' या 'पेपर लीक' में क्या अंतर है?
दिल्ली में 1 और 2 जून को हुई समिति की अहम बैठक में NTA अधिकारियों को आड़े हाथों लिया गया।

पेपर लीक की परिभाषा:
समिति ने NTA से सीधा सवाल किया कि उसकी नजर में ‘पेपर लीक’ की असल परिभाषा क्या है? दरअसल, हाल ही में NTA ने दावा किया था कि उनकी तरफ से कोई पेपर लीक नहीं हुआ, बल्कि सोशल मीडिया पर केवल एक 'गेस पेपर' वायरल हुआ था।

2018 से अब तक का रिकॉर्ड:
समिति ने पूछा कि 2018 में गठन के बाद से अब तक क्या NTA की किसी भी परीक्षा का पेपर कभी लीक हुआ है?

अंदरूनी ढांचे पर शक:
समिति ने NTA के मैनपावर और आंतरिक ढांचे पर पूरा ब्योरा मांगा है। पिछले 3 साल में काम कर रहे कुल कर्मचारियों और 2022 से अब तक विभाग में हुईं सभी नई नियुक्तियों की पूरी कुंडली मांगी गई है।

CBSE और 'कोएम्प्ट' कंपनी के कनेक्शन पर बवाल
संसदीय समिति ने सीबीएसई (CBSE) को भी कटघरे में खड़ा किया है। परीक्षा कॉपियों के डिजिटल मूल्यांकन (OSM- ऑन स्क्रीन मार्किंग) का ठेका 'कोएम्प्ट' (Coempt) नाम की कंपनी को देने पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

विवादित बैकग्राउंड को क्यों छुपाया?
समिति ने पूछा कि क्या CBSE को पता था कि कोएम्प्ट कंपनी के डायरेक्टर पहले 'ग्लोबरेना टेक्नोलॉजीज' से जुड़े थे? गौरतलब है कि साल 2019 में तेलंगाना 12वीं बोर्ड परीक्षा के रिजल्ट में भारी गड़बड़ी हुई थी, जिसके लिए ग्लोबरेना कंपनी के सॉफ्टवेयर को दोषी पाया गया था। आरोप है कि इसी कंपनी का नाम बदलकर 'कोएम्प्ट' किया गया।

नियमों में ढील क्यों?
समिति ने पूछा कि OSM के तीसरे टेंडर में खराब रिकॉर्ड वाली कंपनियों को अयोग्य (Blacklist) ठहराने की शर्त को अचानक क्यों हटा दिया गया?

रोबोटिक स्कैनर की जगह सामान्य स्कैनर:
बोर्ड से यह भी सवाल किया गया कि 12वीं की आंसर शीट की स्कैनिंग के लिए आधुनिक रोबोटिक स्कैनर की जगह सामान्य स्कैनर के इस्तेमाल की इजाजत क्यों और किसके कहने पर दी गई?

राहुल गांधी ने भी उठाए थे सवाल
इस मामले में राजनीतिक पारा भी गर्म है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 27 मई को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया था कि CBSE ने जिस 'कोएम्प्ट' कंपनी को करोड़ों का डिजिटल इवैल्यूएशन का ठेका दिया है, वह असल में बदनाम हो चुकी 'ग्लोबरेना' ही है। राहुल ने सवाल उठाया था कि आखिर किसके इशारे पर इस दागी कंपनी को इतना बड़ा टेंडर सौंपा गया.