ZEE5 से क्यों हटाई गई दिलजीत दोसांझ की 'Satluj'? जानिए फिल्म, विवाद और पूरी कहानी
दिलजीत दोसांझ की फिल्म Satluj (Punjab 95) ZEE5 से क्यों हटाई गई? जानिए फिल्म किस पर आधारित है, सेंसर विवाद, Jaswant Singh Khalra की कहानी और क्या फिल्म दोबारा लौट सकती है।
दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' एक बार फिर सुर्खियों में है। वजह फिल्म की कहानी नहीं, बल्कि उसका अचानक ZEE5 से हट जाना है। 3 जुलाई को OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ हुई इस फिल्म को महज दो दिन बाद भारत में उपलब्ध नहीं रखा गया। इसके बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठने लगे कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि वर्षों के इंतजार के बाद रिलीज़ हुई फिल्म इतनी जल्दी हटा दी गई। हालांकि, ZEE5 ने अब तक हटाने की स्पष्ट वजह सार्वजनिक नहीं की है।

'सतलुज' पहले 'Punjab 95' नाम से बनाई गई थी। यह फिल्म मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा के जीवन और उनके संघर्ष से प्रेरित है। उन्होंने 1990 के दशक में पंजाब में कथित फर्जी मुठभेड़ों और अज्ञात शवों के गुप्त अंतिम संस्कार से जुड़े मामलों को उजागर किया था। बाद में 1995 में उनका अपहरण हुआ और उनकी हत्या कर दी गई। इसी संवेदनशील विषय के कारण फिल्म शुरुआत से ही चर्चा में रही।
फिल्म की रिलीज़ का सफर भी आसान नहीं रहा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक इसका निर्माण कई साल पहले पूरा हो चुका था, लेकिन सेंसर बोर्ड से जुड़े विवादों और प्रमाणन प्रक्रिया के चलते यह करीब चार साल तक रिलीज़ नहीं हो सकी। आखिरकार 3 जुलाई 2026 को इसे नए नाम 'सतलुज' के साथ ZEE5 पर रिलीज़ किया गया।
रिलीज़ के दो दिन बाद ही ZEE5 ने फिल्म को भारत में उपलब्ध न रखने का फैसला लिया। प्लेटफॉर्म ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि मौजूदा परिस्थितियों के कारण फिल्म फिलहाल भारत में नहीं देखी जा सकेगी। हालांकि, कंपनी ने यह भी कहा कि वह फिल्म और उसके निर्माताओं के साथ खड़ी है तथा कानूनी प्रक्रिया के तहत इसे दोबारा उपलब्ध कराने की कोशिश करेगी।
Diljit Dosanjh said the government has been trying to silence Punjab’s voice since 1995, and even in 2026 it continues the same. He expressed relief that Satluj has reached everywhere, and everyone has already downloaded and they cannot silence #Satluj now. https://t.co/zmaLBJF2Jy pic.twitter.com/eY87P1qJN5
— r (@bekhayalime) July 6, 2026
इस पूरे मामले में दिलजीत दोसांझ का एक पुराना बयान भी चर्चा में है। फिल्म रिलीज़ होने के बाद सोशल मीडिया पर बातचीत के दौरान उन्होंने कहा था कि उन्हें आशंका है कि फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटाया जा सकता है। फिल्म हटने के बाद उनका यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने लगा।
फिल्म का सेंसर विवाद भी कम चर्चित नहीं रहा। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जब यह फिल्म 'Punjab 95' नाम से रिलीज़ के लिए तैयार थी, तब प्रमाणन प्रक्रिया के दौरान कई बदलाव सुझाए गए। इसी वजह से इसकी थिएटर रिलीज़ टलती रही। बाद में इसे नए नाम के साथ सीधे OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज़ किया गया।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि फिल्म आखिर हटाई क्यों गई। फिलहाल इसकी कोई आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि संवेदनशील ऐतिहासिक और राजनीतिक विषयों पर बनी फिल्मों को अक्सर कानूनी और प्रशासनिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, जब तक संबंधित पक्ष स्पष्ट जानकारी नहीं देते, किसी एक कारण को अंतिम सच नहीं माना जा सकता।
अब नजर इस बात पर है कि क्या 'सतलुज' दोबारा ZEE5 पर लौटेगी। अभी तक फिल्म पर किसी स्थायी प्रतिबंध की घोषणा नहीं हुई है। ऐसे में माना जा रहा है कि यदि कानूनी प्रक्रियाएं पूरी होती हैं तो भविष्य में इसे फिर से रिलीज़ किया जा सकता है, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है।
लेखक की राय: व्यक्तिगत तौर पर मेरा मानना है कि यदि किसी फिल्म पर आधिकारिक प्रतिबंध नहीं है, तो उसे दर्शकों की पहुंच से हटाना अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सवाल खड़े करता है। किसी फिल्म से असहमति होना स्वाभाविक है, लेकिन उसका जवाब बहस, आलोचना या कानूनी प्रक्रिया से होना चाहिए। यदि हटाने के पीछे कोई ठोस कानूनी या सुरक्षा कारण है, तो उसे सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना भी जरूरी है।
फिलहाल 'सतलुज' केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि सेंसरशिप, इतिहास, मानवाधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर चल रही बहस का हिस्सा बन चुकी है। अब देखना होगा कि आने वाले दिनों में ZEE5 और संबंधित पक्ष इस विवाद पर क्या रुख अपनाते हैं और क्या यह फिल्म एक बार फिर भारतीय दर्शकों के लिए उपलब्ध हो पाती है।
Anubhav Dubey 
