गुना में छात्राओं की पानी की बोतल में यूरिन डालने का आरोप, प्राचार्य के जवाब से भड़का आक्रोश
गुना के आरोन में एक सरकारी स्कूल के कक्षा 5वीं में पढ़ने वाली दो 10 छात्राओं की पानी की बोतल में कक्षा के शरारती छात्रों ने मूत्र मिला दिया।
रिपोर्ट- गौरव शर्मा | गुना
मध्य प्रदेश के गुना जिले के आरोन क्षेत्र से स्कूल व्यवस्था और बच्चों की सुरक्षा पर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है. यहां एक सरकारी स्कूल में कक्षा 5वीं की छात्राओं की पानी की बोतल में कथित तौर पर कुछ छात्रों ने यूरिन मिला दिया. आरोप है कि छात्राएं स्कूल परिसर में रंगोली बनाने के लिए कक्षा से बाहर गई थीं, इसी दौरान उनकी पानी की बोतलों के साथ यह हरकत की गई. वापस लौटने के बाद छात्राओं ने उसी बोतल से पानी पी लिया.
घटना के बाद छात्राएं रोते हुए स्कूल की प्राचार्य के पास शिकायत लेकर पहुंचीं. परिजनों का आरोप है कि शिकायत को गंभीरता से लेने के बजाय प्राचार्य ने कथित तौर पर छात्राओं से कहा कि 'मुंह खराब हो गया हो तो 10-10 रुपये वाली चॉकलेट खा लो. इस कथित जवाब ने मामले को और गंभीर बना दिया. सवाल सिर्फ बच्चों की शरारत का नहीं, बल्कि शिकायत सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन के रवैये का भी है.
घर पहुंचकर छात्राओं ने बताई पूरी बात
घटना सोमवार की बताई जा रही है. स्कूल से घर पहुंचने के बाद छात्राओं ने अपने परिजनों को पूरी घटना बताई. जानकारी मिलते ही परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो गए. मंगलवार सुबह बड़ी संख्या में लोग स्कूल पहुंचे और जमकर विरोध प्रदर्शन किया.
परिजनों ने स्कूल में ताला लगा दिया और दोषी छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. साथ ही प्राचार्य के कथित लापरवाह रवैये पर भी नाराजगी जताई.
प्रशासन ने संभाला मोर्चा
मामले की जानकारी मिलने के बाद आरोन एसडीएम मंजूषा खत्री ने तत्काल संज्ञान लिया. उन्होंने तहसीलदार और ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) को मौके पर पहुंचकर मामले की जांच करने के निर्देश दिए. प्रशासनिक अधिकारी पुलिस बल के साथ स्कूल पहुंचे. यहां पीड़ित छात्राओं, उनके परिजनों और आरोपित छात्रों के बयान दर्ज किए गए. मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अधिकारियों ने पूरे घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है.
दो दिन में मांगी जांच रिपोर्ट
आरोन एसडीएम मंजूषा खत्री ने बीईओ को पूरे मामले की गहन जांच कर दो दिन के भीतर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात कही गई है।
मामले में स्कूल की प्राचार्य को भी नोटिस जारी किया गया है। एसडीएम के मुताबिक घटना की सूचना मिलते ही अधिकारियों को मौके पर भेजा गया था और जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बच्चों की 'शरारत' कहकर टालना कितना सही?
यह घटना अगर जांच में सही पाई जाती है तो इसे महज बच्चों की शरारत कहकर खत्म नहीं किया जा सकता. स्कूल बच्चों के लिए सुरक्षित जगह होनी चाहिए, जहां वे बिना डर के पढ़ सकें, खाना-पीना कर सकें और अपनी परेशानी शिक्षकों को बता सकें.
सबसे गंभीर सवाल यह है कि छात्राओं की शिकायत सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन ने उसे किस तरह लिया. बच्चों की शिकायत पर तत्काल उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना, अभिभावकों को सूचना देना और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराना स्कूल की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए.
दूसरी ओर, आरोपी बताए जा रहे बच्चे भी नाबालिग हैं. इसलिए कार्रवाई का उद्देश्य केवल सजा देना नहीं, बल्कि यह पता लगाना भी होना चाहिए कि ऐसी हरकत क्यों हुई और बच्चों में इस तरह के व्यवहार को लेकर किस स्तर पर समझ और संवेदनशीलता की कमी है.
इस पूरे मामले में निष्पक्ष जांच जरूरी है. यदि आरोप सही साबित होते हैं तो जिम्मेदार छात्रों के साथ-साथ शिकायत को गंभीरता से न लेने वाले जिम्मेदारों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए. साथ ही स्कूल में बच्चों की सुरक्षा, व्यवहार और शिकायतों से निपटने की व्यवस्था की भी समीक्षा की जानी चाहिए. फिलहाल प्रशासन की जांच रिपोर्ट का इंतजार है. रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घटना की वास्तविकता क्या थी और इस मामले में किन लोगों पर कार्रवाई की जाती है.

