CGPSC Controversy : 1 पेज पर 55 और पूरी कॉपी लिखी फिर भी 10 नंबर, अब 147 अफसरों की दोबारा खुलेगी फाइल

CGPSC Recruitment Controversy : भर्ती के दौरान मुख्य उत्तर पुस्तिकाओं की जांच और कैंडिडेट्स को दिए गए अंकों में कथित गड़बड़ी के आरोप लगे थे।

CGPSC Controversy : 1 पेज पर 55 और पूरी कॉपी लिखी फिर भी 10 नंबर, अब 147 अफसरों की दोबारा खुलेगी फाइल

CGPSC Recruitment Controversy : रायपुर। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) की 2003 की भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामला 23 साल बाद फिर सुर्खियों में है। यह भर्ती जोगी सरकार के कार्यकाल में हुई थी। इसमें डिप्टी कलेक्टर और डीएसपी जैसे महत्वपूर्ण पदों पर चयन हुआ था। अब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) इस मामले में जांच के बाद कोर्ट में चालान पेश करने की तैयारी कर रहा है। इससे पुराने मामले में एक बार फिर हलचल बढ़ गई है।

15 से ज्यादा अधिकारी जांच के दायरे में

इस मामले में 15 से ज्यादा प्रशासनिक अधिकारियों के जांच के घेरे में होने की बात सामने आई है। आरोप है कि मुख्य उत्तर पुस्तिकाओं की जांच में गड़बड़ी की गई और कुछ अभ्यर्थियों को नियमों से अलग अंक दिए गए। स्केलिंग प्रक्रिया में भी कथित हेरफेर का आरोप है। इससे कुछ उम्मीदवारों की मेरिट बदली और उन्हें बड़े प्रशासनिक पदों पर चयन का फायदा मिला।

एक पेज के जवाब पर 55 अंक का दावा

दस्तावेजों के मुताबिक, एक अभ्यर्थी ने कथित तौर पर केवल एक पेज का उत्तर लिखा था। इसके बावजूद उसे 60 में से 55 अंक मिलने का दावा किया गया। दूसरी ओर, पूरी उत्तर पुस्तिका लिखने वाले कुछ अभ्यर्थियों को सिर्फ 10 से 15 अंक मिले। अंकों में इस कथित अंतर ने परीक्षा की मूल्यांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए।

RTI से खुली जानकारी की परतें

मामले में 2005 के बाद तेजी आई। उम्मीदवार रविंद्र सिंह, वर्षा डोंगरे और अन्य अभ्यर्थियों ने RTI के जरिए परीक्षा और मूल्यांकन से जुड़ी जानकारी जुटाई। इसके बाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। हाईकोर्ट के नोटिस के बाद PSC पर चयन प्रक्रिया में गड़बड़ी स्वीकार करने का आरोप लगा। करीब 11 साल बाद, 2016 में बिलासपुर हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला सुनाया।

हाईकोर्ट ने री-स्केलिंग का दिया था आदेश

हाईकोर्ट ने 2003 PSC मेंस परीक्षा के सभी वैकल्पिक विषयों की दोबारा स्केलिंग करने का आदेश दिया था। साथ ही एंथ्रोपोलॉजी विषय की उत्तर पुस्तिकाओं की फिर से जांच और संशोधित मेरिट सूची जारी करने को कहा गया था। इस फैसले से उस समय चयनित 147 अधिकारियों की नियुक्तियों पर असर पड़ने की संभावना बनी थी।

मामला अब सुप्रीम कोर्ट में लंबित

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ तत्कालीन डिप्टी कलेक्टर पद्मिनी भोई, संजय चंदन त्रिपाठी समेत कई अधिकारियों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल हाईकोर्ट के री-स्केलिंग वाले आदेश पर रोक लगा रखी है। मामला अभी सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है। इसी बीच EOW की जांच और संभावित चालान ने इस पुराने भर्ती मामले को फिर चर्चा में ला दिया है।

स्केलिंग क्या होती है?

स्केलिंग अलग-अलग विषयों के पेपर की कठिनाई के अंतर को संतुलित करने की प्रक्रिया है। इसमें कठिन और आसान पेपर में मिले अंकों को एक समान पैमाने पर लाने की कोशिश की जाती है। इसका उद्देश्य अलग-अलग विषयों के उम्मीदवारों की मेरिट को तुलनात्मक रूप से संतुलित करना होता है। इसी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी को लेकर 2003 की CGPSC भर्ती पर सवाल उठे थे।