मोदी सरकार के 12 साल: दावे कितने सच, कितने झूठ?

मोदी सरकार ने अपने 12 साल पूरे कर लिए हैं। इस दौरान केंद्र सरकार ने जनधन योजना, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना और स्वच्छ भारत मिशन जैसी कई बड़ी योजनाओं को अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताया है। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन योजनाओं का लाभ वास्तव में आम जनता तक पहुंचा है? क्या सरकारी दावे और जमीनी हकीकत एक जैसे हैं?

मोदी सरकार ने अपने 12 साल पूरे कर लिए हैं. इसके साथ ही नरेंद्र मोदी एक निर्वाचित प्रधानमंत्री के रूप से लगातार सबसे लंबा कार्यकाल पूरा करने वाले पीएम बन गए हैं. इससे पहले भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू 1952 में हुए पहले आम चुनाव से लेकर 1964 में अपने निधन तक लगातार प्रधानमंत्री बने रहे. अब पीएम मोदी उनके आगे निकल गए हैं.... मगर सवाल ये है कि रिकॉर्ड बनाने के अलावा मोदी सरकार के इन 12 सालों में क्या हुआ. आम भारतवासी को कुछ हासिल हुआ भी या नहीं? सरकार कहती है कि उसने 140 करोड़ की आबादी वाले देश में 50 करोड़ से ज्यादा बैंक खाते खुलवाए.... आयुष्मान योजना और दूसरी हेल्थ स्कीमों के जरिए करोड़ों का मुफ्त इलाज किया... मोदी सरकार का दावा करती है कि PM आवास योजना के तहत लाखों परिवारों को पक्के मकान दिए गए.... अंत्योदय योजना के समाज के सबसे निचले और गरीब तबके को मुफ्त राशन भी दिया गया. सरकार ने 12 साल पूरा होने पर ऐसी 5 बड़ी योजनाओं का रिपोर्ट कार्ड भी जारी किया है... मगर सवाल ये उठता है कि सरकारी कागजों में जो बड़े-बड़े दावे किये जा रहे हैं, वो जमीनी हक़ीकत से मेल खाते भी हैं या नहीं. जनता के लिए दिल्ली से जो पैसा निकल रहा है, वो गांव-देहात तक पहुंच भी रहा है या नहीं और पहुंच रहा है तो कितना? अस्सी के दशक में भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने कहा था कि दिल्ली से अगर एक रुपये दिये जाते हैं तो जनता को महज 15 पैसे ही मिल पाते हैं. ऐसे में सवाल ये भी उठता है कि चार दशकों में हालात कितने बदले हैं? मोदी सरकार के 12 साल पूरा होने के मौके पर हम उन 5 सरकारी फ्लैगशिप योजनाओं का पोस्टमार्टम करेंगे.... जिनकी उपलब्धियां गिनाते सरकार थकती नहीं है. बेहद आसान और क्रिस्पी अंदाज सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच तुलना करने की कोशिश भी करेंगे