मऊगंज में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, किसानों को घनामृत-जीवामृत अपनाने की सलाह

मऊगंज में कृषि विभाग प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए अभियान चला रहा है। किसानों को घनामृत, जीवामृत और प्राकृतिक खेती की तकनीकों की जानकारी दी गई। साथ ही 31 जुलाई तक फसल बीमा कराने की अपील की गई।

मऊगंज में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा, किसानों को घनामृत-जीवामृत अपनाने की सलाह

राजेंद्र पयासी मऊगंज

मऊगंज।
मऊगंज जिले में प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने के लिए कृषि विभाग लगातार अभियान चला रहा है। कलेक्टर संजय कुमार जैन के निर्देश पर किसानों को रासायनिक खेती छोड़कर प्राकृतिक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। विभाग का कहना है कि इससे मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, खेती की लागत घटेगी और पर्यावरण संरक्षण को भी मजबूती मिलेगी.

किसानों के खेतों का किया निरीक्षण

इसी अभियान के तहत अनुविभागीय कृषि अधिकारी रवि सिंह बघेल ने प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों के खेतों और बायो रिसोर्स सेंटर (बीआरसी) का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने किसानों से बातचीत कर रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों की जगह घनामृत, जीवामृत, नीमास्त्र, केंचुआ खाद और कंपोस्ट खाद के उपयोग की सलाह दी.

प्राकृतिक खेती से लागत होगी कम

एसडीओ कृषि रवि सिंह बघेल ने बताया कि प्राकृतिक खेती अपनाने से मिट्टी की गुणवत्ता बेहतर होती है, उत्पादन लागत कम होती है और किसानों को सुरक्षित व गुणवत्तापूर्ण फसल मिलती है। उन्होंने किसानों को प्राकृतिक खेती की नई तकनीकों की जानकारी दी और अधिक से अधिक किसानों को इस पद्धति से जुड़ने की अपील की। साथ ही बीआरसी में उपलब्ध संसाधनों का अधिक से अधिक लाभ किसानों तक पहुंचाने के निर्देश भी दिए.

31 जुलाई तक कराएं फसल बीमा

निरीक्षण के दौरान किसानों और कृषि सखियों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की भी जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि खरीफ फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। सभी पात्र किसानों से समय रहते बीमा कराने की अपील की गई। कृषि सखियों से कहा गया कि वे गांव-गांव जाकर किसानों को योजना की जानकारी दें और अधिक से अधिक पंजीयन सुनिश्चित कराएं.

कृषि विभाग का कहना है कि प्राकृतिक खेती और फसल बीमा दोनों ही किसानों की आय बढ़ाने और खेती के जोखिम को कम करने के प्रभावी उपाय हैं.