उर्दू में श्रीकृष्ण के कालिया मर्दन और तुलसीदास जी का भी वर्णन
चित्रकूट में मिली 500 पांडुलिपियां मिली। अधिकांश देवनागरी, संस्कृत और उर्दू भाषा में। तुलसी शोध संस्थान में हो रहा अध्ययन।
सतना। मध्य प्रदेश की धार्मिक नगरी चित्रकूट क्षेत्र में किए गए सर्वेक्षण के दौरान तुलसी शोध संस्थान में 500 से ज्यादा महत्वपूर्ण पांडुलिपियों की पहचान की गई है। इन पांडुलिपियों में अधिकांश देवनागरी, संस्कृत और उर्दू में हैं। एक पांडुलिपि में भगवान श्री कृष्ण को कालिया मर्दन करते हुए दिखाया गया है। उर्दू की पांडुलिपि में तुलसीदास जी और भगवान गणेश का भी उल्लेख है। संस्कृत विभाग ने 350 पांडुलिपियां चित्रकूट के तुलसी शोध संस्थान में जमा कराई हैं। भारत सरकार तीन माह बाद इन पांडुलिपियों को डिजिटलाइज्ड करेगी।
महाभारत और रामायणकालीन हैं पांडुलिपियां
तुलसी शोध संस्थान के प्रबंधक ओम प्रकाश पटेल ने बताया कि चित्रकूट में रामचरितमानस की हस्तलिखित पांडुलिपियों के कुछ अंश के साथ ही रामायणकालीन, महाभारत कालीन देवनागरी लिपि अंकित पांडुलिपियां आज भी सुरक्षित हैं। इनमें से अनेक पांडुलिपियां आंशिक रूप से सूचीबद्ध हैं, जबकि कुछ अब भी क्षतिग्रस्त अवस्था में हैं। कुछ पांडुलिपियां देवनागरी लिपि हैं, जबकि एक पांडुलिपि उर्दू में है, जिन्हें समझने का प्रयास किया जा रहा है।

पोथी सतनाम के नाम से उर्दू में पांडुलिपि
एक पांडुलिपि मुंशी नवल किशोर प्रेस द्वारा प्रकाशित धार्मिक पुस्तक पोथी सतनाम का अंश है, जो उर्दू लिपि में है। इसमें मंगलाचरण, दोहा, चौपाई के साथ भगवान श्री कृष्ण के कालिया मर्दन, तुलसीदास जी का चित्र और भगवान गणेश का चित्र अंकित है।
खोज, पहचान और दस्तावेजीकरण को लेकर अभियान
केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय ने प्रथम चरण में 'ज्ञान भारतम मिशन' के अंतर्गत देशभर में प्राचीन पांडुलिपियों की खोज, पहचान और दस्तावेजीकरण को लेकर अभियान 16 मार्च से प्रारंभ किया है, जो तीन माह तक चलेगा। भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को पुन: प्रकाश में लाना और उसे जनसमुदाय तक पहुंचाना इसका उद्देश्य है। 75 वर्ष के पूर्व की देशभर में मौजूद पांडुलिपियों को संरक्षित करने व भविष्य के लिए उन्हें संरक्षित करने का प्रयास किया जा रहा है। दूसरे चरण में सरकार देशभर में मौजूद पांडुलिपियों के एकत्रीकरण के बाद उन्हें डिजिटलाइज्ड करेगी। तीसरे चरण में जहां भी यह पांडुलिपियां मिली हैं, वहां विशेषज्ञ भेजकर संरक्षित करने और अर्थ समझने का प्रयास करेगी।

ऐप में लॉगिन करके अपलोड कर सकते हैं
संस्कृति मंत्रालय दिल्ली में पदस्थ चंद्रमौली त्रिपाठी ने बताया कि सरकार ने पहले चरण में ज्ञान भारतम ऐप को आम जनमानस के लिए खोल दिया है। जिनके पास भी ऐसी पांडुलिपियां हैं, वह ऐप में लॉगिन कर लोकेशन बताते हुए उसकी भाषा बताकर फोटो अपलोड कर सकता है। ऐप का मुख्य उद्देश्य देशभर में मौजूद पाडुलिपियों के रूप में प्राचीन भारतीय ज्ञान को सहेजना और उन पांडुलिपियों को एकत्र कर एक प्लेटफार्म पर उपलब्ध कराना है।
Varsha Shrivastava 
