राजा हिरदेशाह लोधी की शौर्य यात्रा: CM बोले– उनका जीवन संघर्ष और बलिदान का प्रतीक, उमा भारती ने कहा- कोई माई का लाल आरक्षण नहीं छीन सकता

राजा हिरदेशाह लोधी की पुण्यतिथि पर भोपाल के जम्बूरी मैदान में ऐतिहासिक शौर्य यात्रा का आयोजन। सीएम डॉ. मोहन यादव ने की पाठ्यक्रम में शामिल करने की घोषणा। 

राजा हिरदेशाह लोधी की शौर्य यात्रा: CM बोले– उनका जीवन संघर्ष और बलिदान का प्रतीक, उमा भारती ने कहा- कोई माई का लाल आरक्षण नहीं छीन सकता

भोपाल के जम्बूरी मैदान में राजा हिरदेशाह लोधी की पुण्यतिथि के अवसर पर “शौर्य यात्रा” कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती, मंत्री प्रह्लाद पटेल, मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, पिछोर विधायक प्रीतम लोधीऔर बड़ी संख्या में लोधी समाज सहित जनजातीय समुदाय के लोग शामिल हुए। कार्यक्रम में पूरे प्रदेश से आए लोगों की भारी भीड़ देखने को मिली। आयोजन का मुख्य उद्देश्य राजा हिरदेशाह लोधी के बलिदान, साहस और स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को स्मरण करना था।

राजा हिरदेशाह लोधी को दी गई श्रद्धांजलि

इस अवसर पर वक्ताओं ने राजा हिरदेशाह लोधी को “नर्मदा टाइगर” और स्वतंत्रता संग्राम का महान योद्धा बताते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। वक्ताओं ने कहा कि उन्होंने 1857 की क्रांति से पहले ही अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष की नींव रख दी थी और उनके साहसिक कार्य आज भी प्रेरणा देते हैं।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि राजा हिरदेशाह जैसे महापुरुषों के कारण ही आज हम गर्व से अपने इतिहास को याद कर पाते हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे वीरों का जीवन केवल इतिहास नहीं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन एक बार मिलता है और इसे महान कार्यों के लिए समर्पित करना चाहिए। उन्होंने कहा कि राजा हिरदेशाह लोधी ने अपने संकल्प और संघर्ष से इतिहास रचा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजा हिरदेशाह ने अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी और उनका बलिदान हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने यह भी घोषणा की कि—

  • राजा हिरदेशाह लोधी के जीवन पर शोध कार्य कराया जाएगा। 
  • उनके जीवन और योगदान को शिक्षा पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा।
  • उनके ऐतिहासिक योगदान को जन-जन तक पहुंचाया जाएगा। 

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि राज्य सरकार शिक्षा, संस्कृति और विरासत को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने रानी अवंतीबाई लोधी के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे महापुरुषों को पाठ्यक्रम में शामिल करना आवश्यक है।

तीसरी आजादी समानता की लड़ाई है- उमा भारती 

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने अपने संबोधन में कई ऐतिहासिक और राजनीतिक मुद्दों पर बात की। उन्होंने राजा हिरदेशाह को स्वतंत्रता संग्राम का प्रारंभिक नायक बताते हुए कहा कि उन्होंने 1857 से पहले ही अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंक दिया था।

उमा भारती ने कहा कि भारत को वास्तविक आजादी तभी मिली जब विचारों की आजादी मिली। उन्होंने कहा कि अब देश को “तीसरी आजादी” की जरूरत है, जो समानता और सामाजिक न्याय पर आधारित होनी चाहिए।

आरक्षण कोई माई का लाल नहीं छीन सकता

अपने भाषण में उमा भारती ने आरक्षण को लेकर भी बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि जब तक देश के शीर्ष पदों—राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्य न्यायाधीश—के परिवार एक ही तरह की सरकारी शिक्षा प्रणाली में नहीं पढ़ते, तब तक आरक्षण की आवश्यकता बनी रहेगी।

उन्होंने कहा कि भारत में लंबे समय तक सामाजिक और आर्थिक असमानता रही है, जिसे दूर करने का सबसे प्रभावी साधन आरक्षण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समानता केवल कानून से नहीं बल्कि व्यवहार में बदलाव से आएगी।

उमा भारती ने अपने संबोधन में राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि भारत एक दिन पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को वापस लेकर रहेगा। उन्होंने यह भी कहा कि भारत की ताकत अब पहले से कहीं अधिक है और देश अपने निर्णयों पर दृढ़ है।

उमा भारती ने भारतीय संस्कृति की प्रशंसा करते हुए कहा कि हमारी परंपरा में प्रकृति, जीव-जंतु और पर्यावरण सभी का सम्मान किया जाता है। उन्होंने समाज से अपील की कि अब नई लड़ाई विषमता और असमानता के खिलाफ लड़ी जानी चाहिए। उन्होंने लोधी समाज की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि इस समाज की संख्या और प्रभाव दोनों महत्वपूर्ण हैं और यह समाज सरकारों के गठन में भी भूमिका निभाता है।

प्रह्लाद पटेल का संबोधन: समाज और इतिहास पर चिंता

मंत्री प्रह्लाद पटेल ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि आजादी की लड़ाई लड़ने वाले वीरों के वंशज आज कई जगहों पर भूमिहीन हैं, जो एक गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि समाज को अपने इतिहास से सीख लेते हुए आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि समाज की ताकत का उपयोग सकारात्मक दिशा में होना चाहिए, न कि उसका दुरुपयोग। प्रह्लाद पटेल ने कहा कि बड़े लक्ष्य प्राप्त करने के लिए धैर्य और अनुशासन जरूरी है। केवल राजनीतिक पद प्राप्त करना ही अंतिम उद्देश्य नहीं होना चाहिए।

धर्मेंद्र सिंह लोधी और अन्य नेताओं की मांग

मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी ने मंच से मांग की कि राजा हिरदेशाह लोधी के जीवन को भी स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल किया जाए, जैसा कि रानी अवंतीबाई के जीवन को शामिल किया गया है।
उन्होंने कहा कि ऐसे ऐतिहासिक व्यक्तित्वों को नई पीढ़ी तक पहुँचाना समय की जरूरत है।

प्रीतम लोधी का बयान: युवाओं और समाज पर टिप्पणी

विधायक प्रीतम लोधी ने समाज के युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी को सही दिशा देने की जरूरत है।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज को राजनीतिक रूप से अधिक प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए और कम से कम एक लोधी मुख्यमंत्री होना चाहिए।

जालम सिंह पटेल की प्रतिक्रिया

पूर्व मंत्री जालम सिंह पटेल ने कहा कि आजादी की लड़ाई में योगदान देने वाले कई परिवार आज भी उचित सम्मान और संसाधनों से वंचित हैं। उन्होंने सरकारों से इस दिशा में ध्यान देने की अपील की।

भोपाल के जम्बूरी मैदान में आयोजित शौर्य यात्रा कार्यक्रम ने न केवल राजा हिरदेशाह लोधी के बलिदान को याद किया, बल्कि समाज, राजनीति और इतिहास से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों को भी सामने रखा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव द्वारा पाठ्यक्रम में उनके जीवन को शामिल करने की घोषणा को इस आयोजन का सबसे महत्वपूर्ण निर्णय माना जा रहा है। वहीं उमा भारती के समानता और आरक्षण पर दिए गए बयान ने भी कार्यक्रम को व्यापक राजनीतिक विमर्श का रूप दे दिया।