विपक्ष लोकसभा सीटें बढ़ाने के बिल का करेगा विरोध

Mallikarjun Kharge ने ऐलान किया कि विपक्ष महिला आरक्षण का समर्थन करेगा, लेकिन परिसीमन बिल का विरोध करेगा। लोकसभा सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव पर सियासी टकराव तेज हो गया है।

विपक्ष लोकसभा सीटें बढ़ाने के बिल का करेगा विरोध

नई दिल्ली..लोकसभा में सीटों की संख्या बढ़ाने और इससे जुड़े परिसीमन (Delimitation) के प्रस्ताव का पूरा विपक्ष विरोध करेगा। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने बुधवार को अपनी आवास पर हुई विपक्षी पार्टियों की बैठक के बाद यह ऐलान किया। मीटिंग में राहुल गांधी, TMC, RJD, शिवसेना (UBT), NCP (शरद गुट) और AAP समेत कई विपक्षी नेताओं ने हिस्सा लिया।

खड़गे ने कहा, हम महिला आरक्षण के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सरकार इसे राजनीतिक फायदे के लिए परिसीमन के साथ जोड़कर आगे बढ़ा रही है ताकि विपक्ष को कमजोर किया जा सके। इसलिए हम परिसीमन बिल का पूर्ण विरोध करेंगे और संसद में इसके खिलाफ वोट देंगे। सरकार 16, 17 और 18 अप्रैल 2026 को संसद का विशेष सत्र बुलाई है, जिसमें तीन अहम बिल पेश किए जाएंगे, संविधान (131वां संशोधन) बिल, परिसीमन विधेयक (संशोधन) और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026।

विपक्ष की दो प्रमुख मांगें..

महिलाओं को एक तिहाई आरक्षण मौजूदा 543 लोकसभा सीटों के आधार पर ही 2029 के चुनाव से लागू किया जाए। परिसीमन के सभी प्रावधानों का विरोध। विपक्ष संसद में बहस करेगा और बिल के खिलाफ खड़ा रहेगा।

परिसीमन पर दक्षिण भारत की चिंता..
BRS के कार्यकारी अध्यक्ष KTR ने कहा कि 2022 से वे दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों की रक्षा की बात कर रहे हैं। फिलहाल संसद में दक्षिण राज्यों का प्रतिनिधित्व 24% है, परिसीमन से यह और प्रभावित हो सकता है। टीवीके अध्यक्ष विजय ने इसे “पक्षपातपूर्ण कदम” बताते हुए कहा कि संविधान संशोधन पारित होने पर दक्षिण और उत्तर राज्यों के बीच प्रतिनिधित्व का अंतर बहुत बढ़ जाएगा।

बिल से क्या बदलाव प्रस्तावित हैं..
लोकसभा की सीटें 543 से बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव (राज्यों के लिए 815 + केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 35)। कुल सीटों में 33% यानी करीब 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित। यह आरक्षण 15 साल (2029, 2034, 2039 तक) के लिए होगा, बाद में संसद फैसला करेगी।आरक्षित सीटें हर चुनाव में रोटेशन से बदलेंगी। अनुसूचित जाति और जनजाति की महिलाओं के लिए भी आरक्षण शामिल। परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर होगा। परिसीमन आयोग की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व जज करेंगे। आयोग का फैसला अंतिम होगा और कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकेगी। 

राज्यों पर असर..
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा 40 सीटें बढ़ सकती हैं (80 से 120)।
महाराष्ट्र में 24 महिला आरक्षित सीटें, कुल सीटें 48 से 72।
बिहार में कुल सीटें 40 से 60 तक, महिला आरक्षित 20।
मध्य प्रदेश में 15 महिला आरक्षित सीटें बढ़ने का अनुमान।
तमिलनाडु में 20 और दिल्ली में 4 महिला आरक्षित सीटें।

सरकार बिल पास करा पाएगी..
संविधान संशोधन के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जरूरी है। लोकसभा में NDA के पास 292 सांसद हैं, जबकि INDIA ब्लॉक के पास 233। सरकार को विपक्ष का समर्थन चाहिए, वरना बिल पास होना मुश्किल है। विपक्ष का कहना है कि सरकार महिला आरक्षण के नाम पर परिसीमन लाकर दक्षिण भारतीय राज्यों और संघीय ढांचे को कमजोर कर रही है।