नामांतरण के बदले प्लॉट का खेल? अब EOW भोपाल ने मांगी रिपोर्ट, नप सकते हैं ये अफसर

हुजूर तहसीलदार शिव शंकर शुक्ला पर जमीन नामांतरण के बदले प्लॉट मांगने का आरोप लगा है। इस मामले में नायब तहसीलदार यतीश शुक्ला समेत 2 पटवारी भी घेरे में हैं। ये एक बड़ा राजस्व घोटाला माना जा रहा है जिसकी शिकायत के बाद अब मामला EOW तक पहुंचा और हेड ऑफिस भोपाल ने इसकी रिपोर्ट तलब की है।

नामांतरण के बदले प्लॉट का खेल? अब EOW भोपाल ने मांगी रिपोर्ट, नप सकते हैं ये अफसर

हुजूर तहसीलदार शिव शंकर शुक्ला पर एक मामले में नामांतरण के बदले प्लॉट मांगने का गंभीर आरोप लगा है। शिकायत के बाद मामला Economic Offences Wing (EOW) तक पहुंच गया है। भोपाल मुख्यालय ने भी इस मामले में रिपोर्ट तलब की है। आरोप तहसीलदार, नायब तहसीलदार यतीश शुक्ला और दो पटवारियों पर लगे हैं। 

क्या है पूरा मामला?

ग्राम करही, तहसील हुजूर में खसरा नंबर 31/1/2/1/2 की 0.291 हेक्टेयर जमीन आवेदक ने रजिस्टर्ड बिक्री पत्र से खरीदी थी। 23 सितंबर 2025 और 8 अक्टूबर 2025 को जमीन के अलग-अलग हिस्सेदारों ने अपना हिस्सा बेच दिया। जमीन खरीदने के बाद आवेदक ने अपने नाम नामांतरण के लिए आवेदन दिया। 

आरोप है कि नामांतरण करने के बदले उससे 40×60 वर्गफीट के दो प्लॉट मांगे गए। जब आवेदक ने प्लॉट देने से मना कर दिया तो उसका नामांतरण नहीं किया गया।

आपत्तियां लगवाने का आरोप

आवेदक का कहना है कि प्लॉट न देने पर कुछ लोगों से उसके नामांतरण के खिलाफ आपत्तियां लगवाई गईं। बाद में उसका मामला तहसीलदार के न्यायालय से नायब तहसीलदार, इटौरा सर्किल के पास भेज दिया गया, जबकि ऐसा करने का कोई स्पष्ट आदेश नहीं था।

EOW और लोकायुक्त में शिकायत

पीड़ित ने इस मामले की शिकायत SP लोकायुक्त और EOW में की है। भोपाल से रिपोर्ट मांगी गई है। आरोप है कि जमीन के निराकरण के बदले अधिकारियों ने अपने परिजनों के नाम प्लॉट की रजिस्ट्री कराई।

परिजनों के नाम जमीन खरीदने का आरोप

शिकायत में कहा गया है कि तहसीलदार के परिवार और रिश्तेदारों के नाम पर 2023 में 40×60 और 50×40 वर्गफीट के प्लॉट खरीदे गए और उनका नामांतरण भी कराया गया। आरोप है कि इन प्लॉटों की बाजार कीमत काफी ज्यादा है और इन्हें बेनामी संपत्ति के रूप में खरीदा गया है। 

जांच के घेरे में ये अधिकारी 

शिकायत में तहसीलदार एस.एस. शुक्ला, नायब तहसीलदार यतीश शुक्ला (इटौरा सर्किल), और दो पटवारियों – अनामिका द्विवेदी व प्रभाकर तिवारी – के नाम शामिल हैं। आरोप है कि इनकी मिलीभगत से परिजनों के नाम जमीन खरीदी और नामांतरण कराया गया।

वकीलों और जनता में नाराजगी

इस मामले को लेकर वकीलों और आम लोगों में नाराजगी है। एडवोकेट टास्क फोर्स ने कलेक्टर को ज्ञापन देकर तहसीलदार को हटाने और पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।

तहसीलदार का पक्ष

तहसीलदार एस.एस. शुक्ला ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। उनका कहना है कि जमीन कोई भी खरीद सकता है और शिकायतकर्ता की जमीन से उनके परिवार द्वारा खरीदी गई जमीन का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि नामांतरण का मामला आपत्तियों के कारण नायब तहसीलदार के पास विचाराधीन था।