ईरान को मिला नया सुप्रीम लीडर? मुजतबा खामेनेई के नाम से मिडिल ईस्ट में हलचल
ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के बेटे मुजतबा खामेनेई का नाम सत्ता में उभर रहा है। उनकी भूमिका से मिडिल ईस्ट की राजनीति में हलचल तेज हो गई है।
इस समय दुनिया की नज़रें मिडिल ईस्ट पर टिकी हुई हैं। ईरान की सत्ता और भविष्य को लेकर नई चर्चाएं तेज हो गई हैं। खबरों और अटकलों के बीच Mojtaba Khamenei का नाम एक बार फिर सुर्खियों में है। उन्हें ईरान की राजनीति का सबसे रहस्यमयी चेहरा माना जाता है और कहा जा रहा है कि वे लंबे समय से सत्ता के पर्दे के पीछे प्रभाव रखते आए हैं।
मुजतबा, ईरान के मौजूदा सुप्रीम लीडर Ali Khamenei के बेटे हैं। उनकी संभावित भूमिका को लेकर अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी हलचल देखी जा रही है। अमेरिका और इजराइल जैसे देशों की नजर भी ईरान के अंदरूनी राजनीतिक घटनाक्रम पर बनी हुई है।

बचपन में देखी इस्लामिक क्रांति:
Mojtaba Khamenei का जन्म 1969 में ईरान के मशहद शहर में हुआ था। जब 1979 में ईरान में ऐतिहासिक Iranian Revolution हुई, तब वे मात्र 10 साल के थे। उस समय देश में बड़े राजनीतिक बदलाव हो रहे थे और इसी माहौल में उनका बचपन बीता।
17 साल की उम्र में थामी बंदूक:
ईरान-इराक युद्ध के दौरान मुजतबा ने कम उम्र में ही सैन्य भूमिका निभाई। बताया जाता है कि 1987 में उन्होंने ईरान की शक्तिशाली सेना Islamic Revolutionary Guard Corps (IRGC) से जुड़कर युद्ध में हिस्सा लिया। यह वही सेना है जिसे ईरान की सबसे प्रभावशाली सैन्य ताकत माना जाता है और जिसका देश की राजनीति में भी बड़ा प्रभाव है।

युद्ध के बाद चुना धार्मिक रास्ता:
युद्ध के बाद मुजतबा ने धार्मिक शिक्षा की ओर रुख किया। लगभग 30 साल की उम्र में वे ईरान के प्रमुख धार्मिक शहर Qom गए, जहां उन्होंने इस्लामिक कानून और धार्मिक अध्ययन किया। धीरे-धीरे वे एक प्रभावशाली धर्मगुरु के रूप में पहचाने जाने लगे। हालांकि वे सार्वजनिक मंचों पर कम ही दिखाई देते हैं, लेकिन माना जाता है कि ईरान की राजनीति और प्रशासन में उनका प्रभाव काफी गहरा है।
पर्दे के पीछे की ताकत:
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुजतबा खामेनेई का नेटवर्क ईरान की सेना, धार्मिक संस्थानों और प्रशासन में काफी मजबूत है। यही वजह है कि उन्हें लंबे समय से सत्ता के पीछे का प्रभावशाली चेहरा कहा जाता रहा है।
अमेरिका और इजराइल की बढ़ी चिंता:
मुजतबा खामेनेई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने पहले भी ईरान की नीतियों को लेकर कड़ा रुख अपनाया था। वहीं इजराइल भी ईरान की सैन्य और राजनीतिक गतिविधियों को लेकर सतर्क रहता है।

मिडिल ईस्ट की राजनीति पर क्या होगा असर:
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मुजतबा खामेनेई का प्रभाव बढ़ने से मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ेगा। कई विश्लेषकों का मानना है कि वे अपने पिता से भी ज्यादा सख्त रुख अपना सकते हैं। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर कोई बड़ा राजनीतिक फैसला सामने नहीं आया है, लेकिन ईरान की राजनीति में उनके बढ़ते प्रभाव ने पूरी दुनिया का ध्यान जरूर खींच लिया है।

