शाजापुर: मेड़ा नगर और रविदास नगर के रहवासी सड़क, बिजली और पानी को तरसे, कलेक्टर से लगाई गुहार
कॉलोनाइजरों पर वादाखिलाफी के आरोप: मेड़ा नगर-रविदास नगर के रहवासियों ने मूलभूत सुविधाओं की मांग उठाई
शाजापुर। शहर से सटे ग्राम पंचायत लोदिया के अंतर्गत मुलीखेड़ा हल स्थित मेड़ा नगर औररविदास नगर के रहवासी आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। सालों पहले प्लॉट खरीदकर घर बनाने वाले सैकड़ों परिवार अब सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं। मंगलवार को रहवासियों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द पक्की सड़क निर्माण की मांग की।

रहवासियों के अनुसार कॉलोनियों में करीब 300 से 400 मीटर लंबा मुख्य मार्ग आज भी कच्चा और ऊबड़-खाबड़ है। बरसात में सड़क कीचड़ और जलभराव से भर जाती है, जिससे बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और दोपहिया वाहन चालकों का निकलना मुश्किल हो जाता है। कॉलोनी में रहने वाले लगभग 300 से अधिक परिवार रोजाना इस परेशानी का सामना कर रहे हैं।
रहवासियों का आरोप है कि कॉलोनी बसाते समय कॉलोनाइजरों ने पक्की सड़क, बिजली, पेयजल पाइपलाइन और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े वादे किए थे। लोगों ने अपनी जीवनभर की जमा पूंजी लगाकर प्लॉट खरीदे, लेकिन प्लॉट बेचने के बाद विकास कार्य अधूरे छोड़ दिए गए। आज तक न सड़क बनी, न नियमित बिजली व्यवस्था उपलब्ध हुई और न ही पेयजल की समुचित व्यवस्था हो सकी।

रहवासियों ने बताया कि इस संबंध में कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को आवेदन दिए जा चुके हैं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। इस बार भी उन्होंने कलेक्टर से मांग की है कि सड़क निर्माण के साथ-साथ कॉलोनी में अन्य आवश्यक सुविधाएं भी शीघ्र उपलब्ध कराई जाएं।

रहवासियों द्वारा जिन कॉलोनाइजरों के नाम बताए गए हैं, उनमें भूपेंद्र सिंह मीणा, राज नारायण चौहान उर्फ रज्जू, स्वाति चौहान और गवली शामिल हैं। रहवासियों का आरोप है कि सुविधाओं का भरोसा दिलाकर प्लॉट बेचे गए, लेकिन बाद में वादे पूरे नहीं किए गए।
मामले में पंचायत स्तर पर भी भ्रम की स्थिति बनी हुई है। रहवासियों का कहना है कि जब उन्होंने सरपंचों से संपर्क किया तो दोनों पंचायतों ने क्षेत्राधिकार का हवाला देते हुए जिम्मेदारी लेने से इंकार कर दिया। विधायक को भी समस्या से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि बिना सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं के कॉलोनियां विकसित हो रही हैं तो इसकी जवाबदेही किसकी है? क्या संबंधित कॉलोनाइजरों पर कार्रवाई होगी? क्या प्रशासन यह जांच करेगा कि कॉलोनियों का वैधानिक अनुमोदन हुआ था या नहीं, और यदि हुआ था तो विकास कार्यों की शर्तों का पालन क्यों नहीं कराया गया?

रहवासियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए तथा मेड़ा नगर और रविदास नगर के लोगों को शीघ्र सड़क, बिजली और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
Varsha Shrivastava 
