SATNA: मझगवां में मासूम की मौत से हड़कंप, श्वास नली में दूध फंसने से हुई मौत

मझगवां में 11 माह की बच्ची की मौत के बाद कुपोषण की अफवाह फैली, लेकिन जांच में इसे खारिज कर दिया गया। प्रारंभिक रिपोर्ट के मुताबिक श्वसन नली में दूध फंसने (मिल्क एस्पिरेशन) से मौत की आशंका जताई गई है।

SATNA: मझगवां में मासूम की मौत से हड़कंप, श्वास नली में दूध फंसने से हुई मौत
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सतना जिले के आदिवासी बहुल क्षेत्र मझगवां में 11 माह की मासूम बच्ची की मौत के बाद महिला एवं बाल विकास विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया। सोशल मीडिया में बच्ची की मौत कुपोषण से होना बताया जा रहा था। मामला सामने आते ही संबंधित विभागों के अधिकारी तत्काल मौके पर पहुंचे और विस्तृत जांच शुरू की गई। प्रारंभिक तौर पर बच्ची की मौत कुपोषण से होने की आशंका जताई जा रही थी, लेकिन जांच टीम ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार मझगवां ब्लॉक की महतैन ग्राम पंचायत के कैमहा गांव में 11 माह 20 दिन की मासूम भारती मवासी, पुत्री राजललन, की रविवार-सोमवार की दरमियानी रात मौत हो गई। भारती को 3 दिन से बुखार आ रहा था। परिजन गांव में ही कथित डॉ. लालबहादुर से इलाज करा रहे थे।

मासूम की मौत की खबर लगते ही सोमवार को प्रशासनिक, स्वास्थ्य और महिला बाल विकास विभाग की संयुक्त टीम कैमहा पहुंच गई। प्रारंभिक जांच में टीम ने पाया कि इलाज के बाद भारती मवासी को आराम मिल रहा था। रविवार की रात बच्ची मां के साथ सो रही थी। मां ने उसे लेटकर फीड कराया। रात 12 बजे मां ने देखा तो भारती के शरीर में कोई हलचल नहीं हो रही थी।

शिशु रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि बच्चे को लेटकर फीड कराने के बाद उसे उठाकर थपकी देना जरूरी रहता है। ऐसा नहीं करने से श्वसन नली में दूध जाने से भी मौत हो सकती है।

श्वसन नली में दूध जाने की आशंका

सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला ने बताया कि प्रथम दृष्टया श्वसन नली में दूध जाने की वजह से ही मौत की आशंका जताई जा रही है। हालांकि स्पष्ट वजह के लिए पोस्टमार्टम जरूरी होता है, लेकिन टीम के पहुंचने के पहले ही परिजन भारती को दफना चुके थे।

टीम में मझगवां एसडीएम महिपाल सिंह गुर्जर, सीएमएचओ डॉ. मनोज शुक्ला, डीपीओ राजीव सिंह, बीएमओ डॉ. रूपेश सोनी, सीडीपीओ अभय द्विवेदी आदि शामिल रहे। इससे पहले डीआईओ डॉ. सुचित्रा अग्रवाल ने भी गांव पहुंचकर जांच की। डीआईओ ने बताया कि आधार कार्ड नहीं होने की वजह से परिवार को शासन की योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है।

तो क्या कुपोषित थी भारती?

भारती की मौत के बाद उसके कुपोषित होने का सवाल दिन भर चर्चा में रहा। विशेषज्ञ बताते हैं कि 11 माह की लड़कियों का वजन 8 से 10 किलोग्राम होना चाहिए, लेकिन 10 मार्च को आखिरी जांच में भारती का वजन 7 किलो 208 ग्राम था, जो सामान्य से थोड़ा कम था।

जांच टीम के मुताबिक भारती का वजन जरूर कम था, लेकिन इससे किसी की मौत नहीं होती। मौत की वजह जानने के लिए पोस्टमार्टम जरूरी था, जो नहीं हुआ।

जांच में यह भी सामने आया है कि 21 वर्ष की उम्र में भूरी मवासी ने भारती को जन्म दिया था। अभी वह पांचवीं बार गर्भवती है, जिससे बच्चों की बेहतर देखभाल नहीं हो पाती।

इस मामले में कलेक्टर डॉ. सतीश कुमार एस ने बताया कि बच्ची की मौत की खबर मिलते ही मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय टीम भेजी गई थी, जिससे वास्तविक स्थिति का पता चल सके। टीम की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।