अवैध खनन और क्रेशर की धमक से परेशान ग्रामीण, आधा गांव हुआ पलायन को मजबूर

मऊगंज के सरदमन गांव में हैवी ब्लास्टिंग से दहशत, आदिवासी परिवारों ने लगाई सुरक्षा की गुहार

अवैध खनन और क्रेशर की धमक से परेशान ग्रामीण, आधा गांव हुआ पलायन को मजबूर

मऊगंज से रिपोर्टर राजेंद्र पयासी। जिले के पहाड़ी क्षेत्र में तथाकथित अवैध उत्खनन रुकने का नाम नहीं ले रहा है। आदिवासी अंचल क्षेत्र सरदमन गांव में खनन माफिया का आतंक चरम पर है। शनिवार को गांव के करीब दो दर्जन से अधिक आदिवासी परिवार हाथों में आवेदन लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय मऊगंज पहुंचे और सुरक्षा की गुहार लगाई। ग्रामीणों का आरोप है कि माइंस के अवैध उत्खनन ने उनका जीना मुहाल कर दिया है।

ग्रामीणों ने कहा- सिर पर गिरता है पत्थर

मऊगंज पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे सरदमन गांव निवासी 80 वर्षीय बुजुर्ग महिला धनिया बाई ने कार्यालय की चौखट पर हाथ जोड़कर भावुक होकर कहा, "साहब, जब खाना खाने बैठते हैं तो ब्लास्टिंग के पत्थर थाली में आकर गिरते हैं। खनिज कारोबारी हमें हाथ पकड़कर जबरन घर से निकाल देते हैं। दूधमुंहे बच्चे जान बचाने को किलोमीटर दूर पेड़ के नीचे दिन गुजारते हैं।" ग्रामीणों के अनुसार, नियम विरुद्ध किसी भी समय की जाने वाली ब्लास्टिंग से पूरा गांव धूल और पत्थरों की चपेट में है। पत्थर तोड़ाई हेतु हो रही हैवी ब्लास्टिंग से मकानों में दरारें पड़ चुकी हैं।

पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे आदिवासियों ने खनिज कारोबारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि विरोध करने पर उन्हें रिवॉल्वर की नोक पर धमकाया जाता है। पीड़ितों का आरोप है कि क्रेशर एवं खदान चलाने वाले हरियाणा निवासी चिंटू सिंह, सोनू सिंह, रणवीर सिंह और कल्लू सिंह अक्सर हथियार लेकर गांव में घुसते हैं। एक पीड़ित ने बताया कि जब माफिया से पूछा गया कि "राइफल लेकर क्यों आए हो", तो उसने जवाब दिया, "राइफल मेरी सुरक्षा के लिए है, तेरे लिए 500 की गोली थोड़ी खर्च करूंगा।" आदिवासियों ने आरोप लगाते हुए कहा कि खनिज कारोबारियों द्वारा महिलाओं एवं बच्चों के साथ अभद्रता की जाती है।

कानून ताक पर, आधी आबादी कर चुकी पलायन

ग्रामीणों का आरोप है कि सिद्धिविनायक स्टोन क्रेशर के पास खुद की खदान नहीं है। यह मऊगंज के सरदमन में मौजूद बालाजी माइंस से पत्थर लेता है, लेकिन स्वीकृत क्षेत्र छोड़कर उस जगह अवैध खनन कर रहा है जहां वर्षों से आदिवासियों का बसेरा है। लगातार धूल और धमाकों से हवा में सांस लेना मुश्किल हो गया है। कई लोग टीबी एवं दमा जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि गांव की आधी आबादी पलायन कर चुकी है। ग्रामीणों का दर्द है कि इस क्षेत्र का काला पत्थर हमारे लिए वरदान था, लेकिन अब अभिशाप बन गया है।

कानून का उल्लंघन, खनिज विभाग पर उठे सवाल

गौरतलब है कि यह पूरा क्षेत्र आदिवासी क्षेत्र के रूप में जाना जाता है। कानून के तहत ग्रामसभा की मंजूरी एवं खनिज विभाग द्वारा जारी आदेश एवं गाइडलाइन के बिना कोई भी खनन गतिविधि नहीं हो सकती। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी ग्रामसभा से कभी अनुमति नहीं ली गई। महीनों से शिकायतों के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि जो भी मदद के लिए आता है, वह पैसे लेकर लौट जाता है।

परेशान ग्रामीणों ने सवाल उठाए कि खनन माफियाओं के सामने खनिज प्रशासन कब तक बेबस रहेगा? ग्रामीणों ने पुलिस अधिकारियों को आवेदन सौंपकर सुरक्षा और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की है। प्रभारी खनिज अधिकारी मऊगंज, दीपमाला तिवारी का कहना है कि अवैध उत्खनन आदि की शिकायत संज्ञान में आई है। हम टीम भेजकर जांच कराएंगे और नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।