सरकारी स्कूलों के मर्जर पर तत्काल रोक लगे, खाली पदों पर शिक्षकों की भर्ती हो: अजय सिंह

पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों के मर्जर पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। उन्होंने शिक्षकों के खाली पद भरने और छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित होने का मुद्दा उठाया।

सरकारी स्कूलों के मर्जर पर तत्काल रोक लगे, खाली पदों पर शिक्षकों की भर्ती हो: अजय सिंह

भोपाल। मध्य प्रदेश में सरकारी स्कूलों के मर्जर को लेकर पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सरकारी स्कूलों की मर्जर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और नियमों का उल्लंघन कर दूर-दराज के स्कूलों को मर्ज करने के आदेश निरस्त करने की मांग की है। अजय सिंह ने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों के खाली पद तुरंत भरे जाएं और जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए प्राथमिकता के आधार पर बजट जारी किया जाए।

अजय सिंह ने 'एक परिसर, एक शाला' और संदीपनी स्कूल नीति के तहत सरकारी स्कूलों के मर्जर को लेकर सरकार की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि मर्जर के नाम पर प्रदेश के सरकारी स्कूलों को बंद करने का काम किया जा रहा है। इसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण क्षेत्रों के गरीब विद्यार्थियों और खासकर छात्राओं की पढ़ाई पर पड़ रहा है।

2 किलोमीटर के नियम का उल्लंघन करने का आरोप

अजय सिंह ने कहा कि स्कूलों के मर्जर के लिए दो किलोमीटर के दायरे का नियम है, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने दावा किया कि कई जगह 5 से 10 किलोमीटर दूर स्थित स्कूलों को भी आपस में मर्ज किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि सागर, उज्जैन, सीहोर, सतना, रायसेन और विदिशा समेत प्रदेश के कई हिस्सों से मर्जर के खिलाफ विरोध की आवाजें उठ रही हैं। उनके मुताबिक उज्जैन में बड़ी संख्या में छात्राओं को सड़क पर उतरकर इस नीति का विरोध करना पड़ा।

छात्राओं की पढ़ाई पर पड़ रहा असर

पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि स्कूलों की दूरी बढ़ने और बार-बार स्कूल बदले जाने का सबसे ज्यादा असर छात्राओं पर पड़ रहा है। ग्रामीण इलाकों में परिवहन और सुरक्षा के पर्याप्त साधन नहीं होने के कारण कई बेटियों को पढ़ाई बीच में छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

अजय सिंह ने कहा कि एक तरफ सरकार 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ' का नारा देती है, वहीं दूसरी ओर स्कूलों को दूर मर्ज करने की नीति प्रदेश की बेटियों के भविष्य के लिए चुनौती बन रही है।

जर्जर भवन और शिक्षकों की कमी का मुद्दा उठाया

अजय सिंह ने सरकार पर स्कूलों की बुनियादी समस्याओं की अनदेखी करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कई सरकारी स्कूलों के भवन जर्जर हैं, शिक्षकों के पद खाली हैं और पेयजल व शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की भी कमी है।

उन्होंने कहा कि सरकार को स्कूलों को मर्ज करने के बजाय जर्जर भवनों की मरम्मत, शिक्षकों की कमी दूर करने और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए।

अजय सिंह ने कहा कि सरकारी स्कूलों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय मर्जर के जरिए स्कूलों को बंद करना आसान रास्ता है। उन्होंने सरकार से मर्जर प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए फैसलों की समीक्षा करने की मांग की।