1 March 2026: दुबई में फंसे पूर्व विधायक की मोदी-शाह से अपील, हमें जल्द यहां से निकालें, पढ़ें इंदौर की आज की खबरें
ईरान ने बंद किया एयर स्पेस। दुबई में लगातार गिर रहे बम। इंदौर-शारजाह फ्लाइट रद्द। दुबई में फंसे पूर्व विधायक संजय शुक्ला की सुरक्षित वापसी की अपील।
दुबई में लगातार गिर रहे बम, पूर्व विधायक संजय शुक्ला की अपील
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध तनाव का असर अब इंदौर की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर भी दिखने लगा है। ईरान द्वारा एयर स्पेस बंद किए जाने के बाद इंदौर से शारजाह जाने वाली नियमित फ्लाइट निरस्त कर दी गई है। वहीं दुबई में मौजूद पूर्व विधायक संजय शुक्ला का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने भारत सरकार से सुरक्षित वापसी की अपील की है।
दरअसल, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के चलते ईरान ने अपना एयर स्पेस बंद कर दिया है, जिसका सीधा असर इंदौर से संचालित शारजाह की डेली फ्लाइट पर पड़ा है। जानकारी के मुताबिक, इंदौर से शारजाह के लिए निर्धारित उड़ान तो रवाना हुई, लेकिन शारजाह से इंदौर आने वाली फ्लाइट नहीं पहुंच सकी। आज संचालित होने वाली उड़ान को लेकर भी सुबह 6 बजे यात्रियों को अपडेट दे दिया गया है।
एयर स्पेस बंद रहने की स्थिति में फिलहाल उड़ानों का संचालन अनिश्चितकाल के लिए प्रभावित रहेगा। हालात सामान्य होने और ईरान द्वारा एयर स्पेस दोबारा खोले जाने के बाद ही नियमित संचालन बहाल हो सकेगा। इसी बीच दुबई में मौजूद विधानसभा एक के पूर्व विधायक संजय शुक्ला ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो साझा कर भारत सरकार और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से इंदौरवासियों की सुरक्षित देश वापसी सुनिश्चित करने की अपील की है।
होली और रंग पंचमी को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर
इंदौर में होली और रंग पंचमी को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है। त्योहारों को शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए आज पुलिस कमिश्नर कार्यालय में अहम बैठक आयोजित की गई। पुलिस कमिश्नर कार्यालय में आयोजित इस बैठक में शहर के सभी थाना प्रभारियों और एसीपी मौजूद रहे। पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने होली और रंग पंचमी के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि त्योहारों के दौरान कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
शहर में ड्रोन सर्विलांस के लिए विशेष ड्रोन कंट्रोल सेंटर बनाया गया है, जहां से संवेदनशील क्षेत्रों और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर नजर रखी जाएगी। साथ ही पुराने बदमाशों और निगरानी सूची में शामिल अपराधियों पर विशेष निगरानी रखने के निर्देश भी दिए गए हैं। वहीं दूसरी ओर, विभिन्न क्षेत्रों में मोहल्ला समितियों द्वारा भी बैठकें आयोजित की जा रही हैं, ताकि पुलिस और आम नागरिकों के सहयोग से त्योहारों को सौहार्दपूर्ण वातावरण में संपन्न कराया जा सके।
ACP के मजिस्ट्रेटी अधिकारों पर सवाल, HC का सरकार-पुलिस अफसरों को नोटिस
इंदौर और भोपाल में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली के तहत एसीपी को दिए गए विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट के अधिकारों पर कानूनी विवाद गहरा गया है। इंदौर हाईकोर्ट ने इस मामले में दाखिल जनहित याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए राज्य सरकार और पुलिस अधिकारियों से जवाब तलब किया है।
दरअसल इंदौर में लागू पुलिस कमिश्नरी व्यवस्था के अंतर्गत सहायक पुलिस आयुक्त यानी एसीपी को दिए गए ‘विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट’ के अधिकारों को लेकर दायर जनहित याचिका पर हाईकोर्ट की डबल बेंच ने विस्तृत सुनवाई की। सुनवाई के बाद कोर्ट ने राज्य शासन के गृह विभाग के सचिव, इंदौर पुलिस कमिश्नर समेत सभी डीसीपी और एसीपी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि 1 जुलाई 2024 से लागू नई आपराधिक कानून व्यवस्था के तहत केवल पुलिस अधीक्षक या उससे समकक्ष अधिकारी को ही विशेष कार्यपालक मजिस्ट्रेट नियुक्त किया जा सकता है। ऐसे में एसीपी स्तर के अधिकारियों द्वारा मजिस्ट्रेटी शक्तियों का उपयोग अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया गया है। कोर्ट में आरटीआई से प्राप्त दस्तावेज भी पेश किए गए, जिनमें बताया गया कि वर्तमान में एसीपी ही मजिस्ट्रेट के रूप में आदेश पारित कर रहे हैं। याचिका में इसे संवैधानिक सिद्धांतों के विरुद्ध बताते हुए निष्पक्ष न्याय प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं।
वहीं, एसीपी के द्वारा लगाई जा रही कोर्ट के मामले में जब इंदौर के एडिशनल पुलिस कमिश्नर अमित सिंह से चर्चा की गई, तब उन्होंने कहा है जब पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की गई थी। तब मध्य प्रदेश शासन की तरफ से गजट नोटिफिकेशन यानी राजपत्र जारी किया गया था। जिसमें एसीपी याने सहायक पुलिस आयुक्त को मजिस्ट्रियल पावर दिए गए थे। वहीं, यह राजपत्र 9 दिसंबर 2021 को मध्य प्रदेश शासन के द्वारा जारी किया गया था।
डिजिटल अरेस्ट गैंग का कहर, बुजुर्ग दंपति से 1.15 करोड़ की ठगी, क्राइम ब्रांच ने लौटाए 27 लाख
इंदौर में डिजिटल अरेस्ट के नाम पर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। हीरानगर इलाके के एक बुजुर्ग दंपति को केंद्रीय जांच एजेंसी का डर दिखाकर एक करोड़ 15 लाख रुपये ठग लिए गए। हालांकि क्राइम ब्रांच की कार्रवाई से 27 लाख रुपये वापस दिलाए जा चुके हैं।
दरअसल, इंदौर के हीरानगर थाना क्षेत्र में रहने वाले बुजुर्ग दंपति को एक अनजान नंबर से कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को केंद्रीय जांच एजेंसी का अधिकारी बताते हुए कहा कि पुलवामा हमले से जुड़े एक आरोपी ने 70 लाख रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग राशि उनके खाते में जमा कराई है, जिसकी जांच की जाएगी। इसके बाद करीब 15 दिनों तक अलग-अलग समय पर दंपति को डिजिटल अरेस्ट में रखा गया। वीडियो कॉल और लगातार निगरानी के जरिए उन्हें डराया गया कि सहयोग नहीं किया तो गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
वहीं डर के कारण दंपति ने अपनी फिक्स्ड डिपॉजिट तुड़वाकर दो किश्तों में रकम ट्रांसफर की पहले 65 लाख और फिर 50 लाख रुपये, कुल मिलाकर 1 करोड़ 15 लाख रुपये आरोपियों के खातों में जमा कराए। जिसमें शिकायत मिलने पर इंदौर क्राइम ब्रांच ने त्वरित कार्रवाई करते हुए संबंधित बैंक खातों को फ्रीज कराया और करीब 27 लाख रुपये की राशि दंपति को वापस दिलाई।
फिलहाल, शेष रकम की रिकवरी और आरोपियों की तलाश के लिए क्राइम ब्रांच लगातार कार्रवाई कर रही है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल पर खुद को जांच एजेंसी बताने वाले व्यक्तियों से सावधान रहें और तुरंत पुलिस से संपर्क करें।
वीडियो कॉल से ‘किडनैपिंग’ का ड्रामा, दंपति से 1 लाख 2 हजार की ठगी, हरियाणा से यूपी और बिहार तक फैला नेटवर्क
इंदौर में साइबर ठगी का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। बदमाशों ने वीडियो कॉल पर बेटे को चाकू मारते हुए दिखाकर दंपति से एक लाख से ज्यादा रुपये वसूल लिए। बाद में बेटा सुरक्षित घर लौट आया, जिसके बाद पूरा मामला फर्जी निकला। अब क्राइम ब्रांच इस अंतरराज्यीय नेटवर्क की जांच में जुटी है।
दरअसल, इंदौर के एमआईजी थाना क्षेत्र में रहने वाले गोविंद प्रजापत और पूजा प्रजापत के साथ साइबर ठगी की वारदात हुई। उनका बेटा 2 फरवरी को कोचिंग जाने की बात कहकर घर से निकला था, लेकिन वापस नहीं लौटा। जिसमें 3 फरवरी को दंपति को एक अज्ञात नंबर से वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने उनके बेटे को चाकू मारते हुए दिखाया और जान से मारने की धमकी देकर पैसे की मांग की। घबराए माता-पिता ने बेटे की जान बचाने के लिए करीब 1 लाख 2 हजार रुपये बताए गए खाते में ट्रांसफर कर दिए।
हालांकि, 4 फरवरी को बेटा सुरक्षित वापस लौट आया। उसने बताया कि वह बिना बताए मंदिर दर्शन के लिए गया था। इसके बाद परिवार ने मामले की शिकायत इंदौर क्राइम ब्रांच में दर्ज कराई। वही जांच में सामने आया है कि जिस नंबर से कॉल आया, वह सिम हरियाणा से जारी हुआ था। जिस बैंक खाते में रकम ट्रांसफर हुई, वह उत्तर प्रदेश का है, जबकि रकम बिहार के एटीएम से निकाली गई। फिलहाल क्राइम ब्रांच इस पूरे अंतरराज्यीय साइबर गिरोह की कड़ियां जोड़ने में जुटी है और आरोपियों की तलाश जारी है।
बढ़ते अपराधों के बीच पुलिस ने एक अनोखा और सकारात्मक प्रयोग शुरू किया
इंदौर में बढ़ते अपराधों के बीच पुलिस ने एक अनोखा और सकारात्मक प्रयोग शुरू किया है। अब वाहन चेकिंग के दौरान सिर्फ कार्रवाई ही नहीं, बल्कि सुधार की कोशिश भी की जा रही है। उम्मीद अभियान के बाद पुलिस ने एक और पहल शुरू की है। जिसमें आदतन अपराधियों को अपने साथ खड़ा कर उन्हें जिम्मेदारी का अहसास कराया जा रहा है। इस रियलिटी-चेक अभियान का असर अब जमीन पर दिखाई देने लगा है।
दरअसल, इंदौर में कई मामलों में यह सामने आया कि शाम के समय नशे के बाद अपराधों की संख्या बढ़ जाती है। चोरी, लूट और झगड़े जैसे मामले अधिकतर इसी समय दर्ज होते रहे हैं। इसी को देखते हुए पुलिस ने एक नया प्रयोग शुरू किया। अब आदतन अपराधियों को शाम के वक्त अपने साथ वाहन चेकिंग और अन्य ड्यूटी में शामिल किया जा रहा है। इस पहल का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है तुकोगंज थाना क्षेत्र में, यहां थाना प्रभारी ने सबसे पहले कुछ नाबालिग, जो अपराध में सामने आये थे,उन्हें चेकिंग के दौरान अपने साथ खड़ा किया।पुलिस की संगत में खड़े होकर जब उन्होंने देखा कि अपराधियों के साथ कैसा व्यवहार होता है, कानून कितनी सख्ती से काम करता है, तो उनमे बदलाव शुरू हुआ, धीरे-धीरे यह प्रयोग अन्य आदतन अपराधियों पर भी लागू किया गया।
वहीं, इस मामले में पुलिस कमिश्नर संतोष कुमार सिंह का मानना है कि यह सिर्फ सख्ती नहीं, बल्कि सामाजिक सुधार की पहल है। उम्मीद अभियान के बाद यह रियलिटी-चेक मॉडल अब चर्चा में है। जहां पहले शाम का समय कई अपराधों के लिए संवेदनशील माना जाता था। वहीं अब उसी समय पुलिस के साथ खड़े होकर कुछ लोग अपनी नई शुरुआत कर रहे हैं। यह पहल यह भी संदेश देती है कि अगर अवसर मिले तो भटका हुआ युवा भी सही दिशा में लौट सकता है। इंदौर पुलिस का यह प्रयोग बताता है कि अपराध पर लगाम लगाने के लिए सिर्फ डंडा ही नहीं, संवाद और सुधार भी जरूरी है। अब देखना होगा कि यह मॉडल शहर के अन्य थाना क्षेत्रों में कब तक लागू होता है और इसके परिणाम कितने व्यापक होते हैं।
Varsha Shrivastava 
