TMC का नाम और चुनाव चिन्ह फ्रीज : ममता के समर्थन में आगे आया विपक्ष, राहुल बोले- वोट के बाद अब पार्टी चोरी
TMC Name and Election Symbol Frozen : चुनाव आयोग की ओर से अधिसूचित मुक्त चुनाव चिह्नों की सूची में से दोनों गुटों को अलग-अलग चुनाव चिह्न दिए जाएंगे। यह व्यवस्था पश्चिम बंगाल की आगामी उपचुनाव प्रक्रिया के लिए लागू होगी।
TMC Name and Election Symbol Frozen : नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में विधानसभा उपचुनाव से पहले चुनाव आयोग ने ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस यानी TMC के नाम और उसके आरक्षित ‘घास-फूल’ चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगा दी है। आयोग ने कहा है कि पार्टी के दोनों प्रतिद्वंद्वी गुट आगामी उपचुनाव में फिलहाल TMC के नाम और इसी आरक्षित चुनाव चिह्न का इस्तेमाल नहीं कर सकेंगे। यह व्यवस्था तब तक लागू रहेगी, जब तक आयोग पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम फैसला नहीं कर देता। आयोग ने दोनों पक्षों को अंतरिम व्यवस्था के तहत अलग-अलग नाम और मुक्त चुनाव चिह्न उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू की है।
दोनों गुटों से मांगे गए तीन-तीन नाम और चिह्न
चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी और अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दोनों गुटों को निर्देश दिया है कि वे अपने-अपने समूह के लिए तीन नाम और तीन मुक्त चुनाव चिह्न प्राथमिकता के क्रम में उपलब्ध कराएं। आयोग इन विकल्पों में से प्रत्येक गुट के लिए एक नाम और एक चुनाव चिह्न को मंजूरी देगा।
दोनों पक्षों के बीच पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर दावे की स्थिति को देखते हुए यह अंतरिम व्यवस्था की गई है। आयोग के अनुसार, अंतिम निर्णय अभी बाकी है और मौजूदा उपचुनाव के लिए दोनों गुटों को अलग-अलग पहचान के साथ चुनाव लड़ने की व्यवस्था की जाएगी।
अंतिम फैसला पैरा 15 के तहत होना बाकी
दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने कहा कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस में दो प्रतिद्वंद्वी गुट हैं और दोनों ही पार्टी पर अपना दावा कर रहे हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। यह निर्णय चुनाव चिह्न- (आरक्षण और आवंटन) आदेश, 1968 के पैरा 15 के तहत किया जाना बाकी है।
अंतिम निर्णय होने तक दोनों गुटों के लिए अंतरिम व्यवस्था लागू रहेगी। आयोग ने दोनों पक्षों को अलग-अलग नाम रखने की अनुमति दी है। वे चाहें तो अपने नए नाम में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस से अपने संबंध का उल्लेख भी कर सकते हैं।
नंदीग्राम और रेगीनगर में 6 अक्टूबर को उपचुनाव
चुनाव आयोग की ओर से अधिसूचित मुक्त चुनाव चिह्नों की सूची में से दोनों गुटों को अलग-अलग चुनाव चिह्न दिए जाएंगे। यह व्यवस्था पश्चिम बंगाल की आगामी विधानसभा उपचुनाव प्रक्रिया के लिए लागू होगी। नंदीग्राम और रेगीनगर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होने हैं।
ऐसे में चुनाव आयोग के इस आदेश का सीधा असर दोनों गुटों की चुनावी पहचान पर पड़ेगा। उम्मीदवारों और मतदाताओं के लिए भी नए नाम और चुनाव चिह्न महत्वपूर्ण होंगे, क्योंकि उपचुनाव में दोनों पक्षों को अलग पहचान के साथ मैदान में उतरना होगा।
राहुल गांधी ने EC के आदेश पर उठाए सवाल
कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने TMC के नाम और चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाने वाले चुनाव आयोग के आदेश की आलोचना की। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल ममता बनर्जी की नहीं है। राहुल गांधी ने अपने बयान में ‘वोट चोरी’, ‘सरकार चोरी’ और अब ‘पार्टी चोरी’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया।
शुक्रवार को X पर लिखे अपने पोस्ट में उन्होंने दावा किया कि पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस के मामले में एक जैसा पैटर्न देखने को मिल रहा है। उन्होंने BJP और चुनाव आयोग पर मिलकर एक पार्टी को तोड़ने और उसका चुनाव चिह्न छीनने का आरोप लगाया। ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप हैं।
पहले शिवसेना, फिर NCP और अब तृणमूल कांग्रेस।
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) September 18, 2026
हर बार एक ही पैटर्न - BJP और चुनाव आयोग मिलकर एक पार्टी को तोड़ते हैं। फिर उसका चुनाव चिन्ह छीन लिया जाता है।
जब पूरी की पूरी पार्टी चोरी हो सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होना भी हैरानी की बात नहीं।
वोट चोरी। सरकार चोरी।…
शिवसेना और NCP का भी दिया उदाहरण
राहुल गांधी ने अपने पोस्ट में शिवसेना और NCP में हुए विभाजन का भी उल्लेख किया। शिवसेना में उद्धव ठाकरे और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले गुट 21 जून 2022 को अलग हुए थे। इसी तरह NCP में शरद पवार और अजित पवार के नेतृत्व वाले गुट 2 जुलाई 2023 को अलग हुए थे।
राहुल गांधी ने इन घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि जब पूरी पार्टी के स्तर पर ऐसी स्थिति बन सकती है, तो करोड़ों भारतीयों के वोट चोरी होने की बात भी हैरान करने वाली नहीं होगी। उन्होंने ‘वोट चोरी’, ‘सरकार चोरी’ और ‘पार्टी चोरी’ को लोकतांत्रिक पतन के प्रतीक के तौर पर पेश किया।
‘जनादेश की रक्षा करना आयोग की जिम्मेदारी’
कांग्रेस सांसद ने कहा कि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी जनता के जनादेश की रक्षा करना है। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि आयोग इसके विपरीत उन ताकतों की मदद कर रहा है, जो जनता के फैसले को बदलना चाहती हैं।
उन्होंने कहा कि TMC से जुड़ा विवाद सिर्फ ममता बनर्जी का मामला नहीं है। उनके अनुसार, यह हर राजनीतिक दल और हर उस मतदाता से जुड़ा मुद्दा है, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहता है। इन टिप्पणियों में राहुल गांधी ने चुनाव आयोग की भूमिका पर राजनीतिक सवाल उठाए हैं।
विपक्षी नेताओं ने भी TMC के समर्थन में बयान दिए
कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग के फैसले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP ने असंवैधानिक तरीके से AITC के नाम और चुनाव चिह्न पर कब्जा कर लिया है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का जिक्र करते हुए इस फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देर रात दिया गया ‘जन्मदिन का तोहफा’ बताया। वेणुगोपाल ने चुनाव आयोग पर BJP के हाथों की कठपुतली की तरह काम करने का आरोप भी लगाया। ये सभी टिप्पणियां कांग्रेस नेता की ओर से की गई राजनीतिक प्रतिक्रियाएं हैं।
संजय राउत और अखिलेश यादव की भी प्रतिक्रिया
शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस को ममता बनर्जी ने अपने संघर्ष और मेहनत से बनाया था। उन्होंने कहा कि TMC का राज्य और देश की राजनीति में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। राउत ने TMC की तुलना शिवसेना से करते हुए कहा कि जिस तरह शिवसेना को बाला साहेब ठाकरे की पार्टी के तौर पर जाना जाता है, उसी तरह तृणमूल कांग्रेस को ममता बनर्जी की पार्टी के रूप में देखा जाता है।
वहीं समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव ने कहा कि अगर चुनाव आयोग लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने वाले फैसले लेगा तो उसके सम्मान में बढ़ोतरी होगी। उन्होंने यह भी पूछा कि उनकी पार्टी की ओर से चुनाव आयोग में जमा किए गए एफिडेविट मिले हैं या नहीं।
1998 में ममता बनर्जी ने बनाई थी TMC
तृणमूल कांग्रेस की स्थापना 1 जनवरी 1998 को हुई थी। ममता बनर्जी ने कांग्रेस छोड़ने के बाद अपनी अलग राजनीतिक पार्टी बनाई। उपलब्ध राजनीतिक विवरण के अनुसार, ममता बनर्जी कांग्रेस नेतृत्व से इस बात को लेकर नाराज थीं कि राज्य में वामपंथी सरकार के खिलाफ प्रभावी राजनीतिक लड़ाई नहीं लड़ी जा रही थी।
नई पार्टी का नाम तृणमूल कांग्रेस रखा गया। ‘तृणमूल’ शब्द का अर्थ जमीन से जुड़े होने से जोड़ा गया और पार्टी को आम लोगों तथा कार्यकर्ताओं की पार्टी के रूप में पेश किया गया। वर्ष 1998 में ही चुनाव आयोग ने पार्टी को मान्यता दी और उसे ‘घास-फूल’ यानी जुड़वां फूल और घास वाला चुनाव चिह्न मिला।
लोकसभा से विधानसभा और फिर सत्ता तक का सफर
TMC ने अपना पहला लोकसभा चुनाव 1998 में लड़ा था। इसके बाद 1999 में पार्टी ने NDA के साथ गठबंधन किया और ममता बनर्जी अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में रेल मंत्री बनीं। पार्टी ने 2001 में पहली बार पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव लड़ा। हालांकि उस समय राज्य में वाम मोर्चे की सरकार बनी रही।
इसके बाद 2011 का विधानसभा चुनाव TMC के राजनीतिक सफर में बड़ा पड़ाव रहा। पार्टी ने 34 साल से चली आ रही वाम मोर्चा सरकार को सत्ता से बाहर किया और ममता बनर्जी पहली बार पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री बनीं। इसके बाद TMC ने 2016 और 2021 के विधानसभा चुनावों में भी जीत दर्ज की और ममता बनर्जी लगातार तीन बार मुख्यमंत्री बनीं।

