सरकारी गोदामों में सड़ा लाखों क्विंटल गेहूं, अजय सिंह बोले- ये किसानों का अपमान और गरीबों के साथ क्रूर मजाक

पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने मध्य प्रदेश के सरकारी गोदामों में 1 लाख 32 हजार क्विंटल से अधिक गेहूं सड़ जाने पर आक्रोश व्यक्त किया।

सरकारी गोदामों में सड़ा लाखों क्विंटल गेहूं, अजय सिंह बोले- ये किसानों का अपमान और गरीबों के साथ क्रूर मजाक

भोपाल। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह ने प्रदेश के सरकारी गोदामों में 1 लाख 32 हजार क्विंटल से अधिक गेहूं सड़ जाने पर आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि यह कृत्य सरकारी तंत्र की आपराधिक लापरवाही और किसानों की मेहनत का घोर अपमान है। साथ ही गरीब जनता के साथ एक क्रूर मजाक है।

बिचौलियों की लूट और सिस्टम की लापरवाही

अजय सिंह ने कहा कि हमारा अन्नदाता दिन-रात खून-पसीना बहाकर अन्न पैदा करता है। लगातार कर्ज के बोझ से हलाकान रहकर, खाद-बीज की किल्लत झेलकर और मौसम की मार सहकर अनाज उपजाता है। बिचौलियों की लूट और सरकारी सिस्टम की कड़वी कशमकश को पार करके जब उसकी उपज सरकारी गोदामों तक पहुंचती है, तो वहां जिम्मेदार अमले की लापरवाही के कारण उसे सड़ने के लिए छोड़ दिया जाता है। साल 2017 से 2024 के बीच खरीदा गया यह गेहूं जबलपुर, उज्जैन, भोपाल और सागर संभाग के गोदामों में बर्बाद हो गया, जो यह साबित करता है कि सरकार अनाज के सुरक्षित भंडारण को लेकर कितनी लापरवाह है।

लाखों लोगों का पेट भरने वाला अनाज खाने लायक नहीं

पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि जो अनाज प्रदेश के लाखों गरीब परिवारों का पेट भर सकता था, वह अब इंसानों के खाने लायक नहीं बचा। इसके लिए कौन जिम्मेदार है? अब इस गेहूं का उपयोग शराब बनाने और खाद  बनाने तथा पशु आहार के लिए किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इससे बड़ा दुर्भाग्य और क्या हो सकता है कि जिस देश और प्रदेश की  एक बड़ी आबादी आज भी कुपोषण और भुखमरी से जूझ रही है, वहां गरीबों के हक का अनाज अफसरों की नाकामी के कारण शराब फैक्ट्रियों को औने-पौने दामों पर नीलाम किया जाएगा।

पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने की मामले में उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग

अजय सिंह ने नागरिक आपूर्ति निगम के प्रबंध संचालक के उस बयान की भी निंदा की जिसमें उन्होंने इसे एक 'नियमित प्रक्रिया' और 'लापरवाही पर नियमानुसार कार्रवाई करने’ की बात कहकर टालने की कोशिश की है। उन्होंने पूछा कि आखिर सात-सात सालों तक इस अनाज की निकासी क्यों नहीं की गई? ओपन कैप में अनाज को सड़ने के लिए किसने छोड़ा? पूर्व नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि जिम्मेदार अफसरों पर आपराधिक लापरवाही का मुकदमा दर्ज किया जाए। इसके साथ ही भविष्य में अनाज की ऐसी बर्बादी रोकने के लिए भंडारण और समय पर निकासी की व्यवस्था को पूरी तरह सुव्यवस्थित और पारदर्शी बनाया जाए।