स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में अस्पताल ही 'बीमार', दो साल से पानी के संकट से जूझ रहा तिवनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र

रीवा के मनगवां स्थित तिवनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में पिछले दो वर्षों से पेयजल संकट बना हुआ है। मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में अस्पताल ही 'बीमार', दो साल से पानी के संकट से जूझ रहा तिवनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र

रीवा/मनगवां: स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावों के बीच रीवा जिले के मनगवां क्षेत्र स्थित तिवनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बदहाल स्थिति कई सवाल खड़े कर रही है। अस्पताल में पिछले करीब दो वर्षों से पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं है, जिसके कारण मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

तिवनी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का लोकार्पण 10 अगस्त 1998 को तत्कालीन मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और तत्कालीन विधानसभा अध्यक्ष स्वर्गीय श्रीनिवास तिवारी ने किया था। उद्देश्य ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना था, लेकिन आज यह अस्पताल अपनी बुनियादी जरूरत—पानी—के लिए संघर्ष कर रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार अस्पताल के पास मौजूद खारे पानी का हैंडपंप खराब होने के बाद उसे हटा दिया गया। वर्तमान में उस स्थान पर खाद गोदाम का निर्माण किया जा रहा है। अस्पताल परिसर में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं होने से मरीजों को बाहर से पानी लाना पड़ता है।

ग्रामीणों का कहना है कि यह अस्पताल मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के गृह जिले में स्थित है और उनके निवास से लगभग 27 किलोमीटर की दूरी पर है। वहीं गंगेव जनपद पंचायत के अध्यक्ष विकास तिवारी भी इसी गांव के निवासी हैं। इसके बावजूद वर्षों से जल संकट का समाधान नहीं हो सका है। क्षेत्रीय विधायक इंजीनियर नरेंद्र प्रजापति पर भी स्थानीय लोग इस मुद्दे की अनदेखी का आरोप लगा रहे हैं।

पानी की कमी का असर अस्पताल की साफ-सफाई पर भी पड़ रहा है। स्वास्थ्यकर्मी अपने घरों से पानी लाकर काम चला रहे हैं, जबकि मरीजों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।

सूत्रों के अनुसार हाल ही में अस्पताल में डॉक्टर और फार्मासिस्ट की पदस्थापना हुई है, जिससे क्षेत्र के लोगों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं की उम्मीद जगी थी। हालांकि, इसी बीच आउटसोर्स के माध्यम से नियुक्त सफाईकर्मी को भी दूसरे स्थान पर भेज दिया गया। ऐसे में अब अस्पताल की नियमित साफ-सफाई को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय नागरिकों ने शासन और प्रशासन से अस्पताल में तत्काल पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा आवश्यक स्टाफ की उपलब्धता बनाए रखने की मांग की है, ताकि मरीजों को मूलभूत स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें।