Nepal Flood Update : नेपाल बाढ़ में अब तक 359 शव बरामद, 288 भारतीय समेत 1500 लापता; सरकार ने कहा- फिर बाढ़ का खतरा

Nepal Flood Update : नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक इसमें 300 से ज्यादा भारतीय हैं। खराब मौसम, मलबे और टूटे रास्तों के बीच राहत एवं बचाव अभियान जारी है।

Nepal Flood Update : नेपाल बाढ़ में अब तक 359 शव बरामद, 288 भारतीय समेत 1500 लापता; सरकार ने कहा- फिर बाढ़ का खतरा

Nepal Flood Update : नेपाल भीषण बाढ़ के बाद अब तक 359 शव बरामद किए जा चुके हैं। गुरुवार शाम 5 बजे तक चितवन जिले में सबसे ज्यादा 132 शव मिले हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, करीब 1,500 लोगों की तलाश जारी है। इनमें 288 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। वहीं, 21 भारतीयों को सुरक्षित बचाया गया है, जिनमें से 11 की पहचान हो चुकी है।

इसी बीच प्रशासन ने भोटेकोशी नदी में फिर बाढ़ के खतरे का अलर्ट जारी किया है। चीन से मिली सैटेलाइट तस्वीरों में बाढ़ वाली जगह पर नदी का पानी रुकने से एक झील बनने की जानकारी मिली है। झील में पानी बढ़ रहा है और इसके टूटने का खतरा भी बना हुआ है। भोटेकोशी नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों, यात्रियों और राहत-बचाव में जुटे लोगों को नदी किनारे और जोखिम वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी है।

बाढ़ में मौतों का आंकड़ा 332 पहुंचा

बाढ़ में मौतों का आंकड़ा बढ़कर 332 हो गया है। नेपाल पुलिस के मुताबिक, गुरुवार शाम 3:50 बजे तक 8 जिलों से इतने शव बरामद किए गए। सबसे ज्यादा चितवन में 121 शव मिले हैं। इसके बाद पूर्वी नवलपरासी में 74, धादिंग और गोरखा में 29-29, नुवाकोट में 28, तनहुन में 19, रसुवा में 17 और पश्चिमी नवलपरासी में 15 शव बरामद हुए हैं।

पूर्व DRDO प्रमुख जी. सतीश रेड्डी और उनकी पत्नी समेत 31 तीर्थयात्री तिब्बत में फंसे हुए हैं। ये सभी कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए थे। खराब मौसम के कारण उनकी वापसी प्रभावित हुई है।

नेपाली सेना ने 116 लोगों को बचाया

नेपाली सेना ने रसुवा के टिमुरे इलाके से बुधवार सुबह 116 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। इनमें 95 नेपाली और 21 भारतीय नागरिक हैं। इसके अलावा एक सुरंग में फंसे 7 नेपाली नागरिकों को भी सुरक्षित निकाल लिया गया। खराब मौसम और क्षतिग्रस्त सड़कों के बावजूद बचाव दल लगातार मलबे में लोगों की तलाश कर रहे हैं।

लैंडस्लाइड से आया 5.2 तीव्रता जैसा झटका

बुधवार सुबह 8:37 बजे नेपाल-चीन सीमा के पास तेज झटके महसूस किए गए। यह इलाका काठमांडू के उत्तर में स्थित है। शुरुआत में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण यानी USGS ने इसे 4.4 तीव्रता का भूकंप बताया था। इसी दौरान पहाड़ का बड़ा हिस्सा बर्फ और चट्टानों के साथ टूटकर ल्हेंदे खोला नदी में गिर गया। यह नदी भोटेकोशी की सहायक नदी है और चीन से निकलकर नेपाल में प्रवेश करती है।

वैज्ञानिक जांच के बाद सामने आई असली वजह

वैज्ञानिकों के अनुसार, पहाड़ से ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूटकर गिरने की संभावना है। हालांकि, घटना की वास्तविक वजह पता लगाने में कई सप्ताह लग सकते हैं। बाद में USGS ने स्पष्ट किया कि यह भूकंप नहीं था। पहाड़ से हुआ लैंडस्लाइड इतना शक्तिशाली था कि उससे 5.2 तीव्रता के भूकंप के बराबर झटका पैदा हुआ। यानी झटका भूकंप के कारण नहीं, बल्कि लैंडस्लाइड के कारण आया था।

बिहार और यूपी में बढ़ी चिंता

बाढ़ का असर भारत में मुख्य रूप से बिहार की गंडक नदी और उससे जुड़ी नदियों में दिखाई देने की आशंका है। नेपाल से करीब 3 मीटर ऊंची फ्लड वेव आने का अलर्ट है। पश्चिमी चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर और वैशाली में विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

सीतामढ़ी और शिवहर पर भी नजर रखी जा रही है। नेपाल का पानी त्रिशूली नदी के रास्ते गंडक तक पहुंचेगा। इससे बिहार के निचले इलाकों में जलस्तर बढ़ सकता है। उत्तर प्रदेश के महाराजगंज और कुशीनगर में भी अलर्ट जारी किया गया है।

राष्ट्रपति ने PM बालेन को दिए निर्देश

नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बात की। उन्होंने रसुवा में भोटेकोशी बाढ़ से प्रभावित लोगों की तलाश और बचाव के लिए सरकार की पूरी मशीनरी लगाने को कहा। राष्ट्रपति ने राहत और रेस्क्यू अभियान तेज करने की अपील की।

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने उन्हें जान-माल के नुकसान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि प्रभावित लोगों के बचाव, इलाज और राहत के लिए सुरक्षा और प्रशासनिक एजेंसियों को लगाया गया है।

भारत ने भेजी 10 टन मानवीय मदद

नेपाल में बाढ़ के बाद भारत ने राहत और बचाव कार्यों के लिए 10 टन मानवीय सहायता और जरूरी दवाइयां भेजी हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने फेसबुक पोस्ट के जरिए इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह सहायता बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नेपाल के राहत कार्यों में मदद करेगी।

भारत ने हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई है। जयशंकर ने कहा कि मुश्किल की इस घड़ी में भारत नेपाल और नेपाली नागरिकों के साथ खड़ा है।

1,000 तक वाहन फंसे, 300 बसें शामिल

भोटेकोशी नदी में चीन की ओर से आए तेज पानी और भूस्खलन के कारण नेपाल में कई सड़कें और राजमार्ग बंद हो गए हैं। इससे करीब 800 से 1,000 वाहन फंस गए या डूब गए हैं। इनमें लगभग 300 यात्री बसें शामिल हैं।

गोसाईंकुंड जाने वाले यात्रियों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। नेपाली मीडिया के अनुसार, काठमांडू से गोसाईंकुंड गई 18 से 20 बसों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। इन बसों में सवार यात्रियों की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है।

30 हेलिकॉप्टर रेस्क्यू अभियान में लगाए

बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लोगों को बचाने के लिए नेपाल सरकार ने 30 हेलिकॉप्टर तैनात किए हैं। त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रेस्क्यू कोऑर्डिनेशन सेंटर ने सुबह 6:30 बजे से बचाव अभियान की तैयारी शुरू कर दी थी।

अतिरिक्त बचाव के लिए 20 हेलिकॉप्टर स्टैंडबाय पर रखे गए हैं। 10 हेलिकॉप्टर प्रभावित और आसपास के क्षेत्रों में भेजे जा चुके हैं। जहां सड़क से पहुंचना संभव नहीं है, वहां हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू किया जा रहा है।

चितवन में 64 शव मिले

चितवन में तिब्बत से आए बाढ़ के पानी के बाद त्रिशूली और नारायणी नदियों से 64 शव बरामद किए गए हैं। इनमें पूरे शवों के साथ शरीर के कुछ अंग भी शामिल हैं। जिला पुलिस के अनुसार, बरामद सभी शवों को भरतपुर अस्पताल के शवगृह में रखा गया है। प्रशासन की टीमें शवों की पहचान और प्रभावित लोगों की तलाश में जुटी हैं।