कुणाल चौधरी का आरोप: मध्य प्रदेश में किसान कल्याण योजनाएं केवल दिखावा, गेहूं खरीदी और नीतियों पर उठाए सवाल

मध्य प्रदेश में किसान मुद्दों पर गरमाई राजनीति। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने सरकार की नीतियों को बताया किसान विरोधी।

कुणाल चौधरी का आरोप: मध्य प्रदेश में किसान कल्याण योजनाएं केवल दिखावा, गेहूं खरीदी और नीतियों पर उठाए सवाल

भोपाल। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने मध्य प्रदेश सरकार की किसान नीतियों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा है कि राज्य में “किसान कल्याण वर्ष” के नाम पर केवल प्रचार किया जा रहा है, जबकि वास्तविकता में किसान परेशान हैं और उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश सरकार द्वारा घोषित किसान कल्याण योजनाएं धरातल पर प्रभावी नहीं हैं। उन्होंने कहा कि रायसेन में आयोजित कृषि कार्यक्रम और “कृषि कल्याण” से जुड़े आयोजनों को सिर्फ दिखावे के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि किसानों की वास्तविक समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया गया।

कुणाल चौधरी ने गेहूं खरीदी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस वर्ष खरीद प्रक्रिया में देरी हुई। उनके अनुसार, गेहूं की खरीदी फरवरी में शुरू हो जानी चाहिए थी, लेकिन यह अप्रैल में शुरू हुई, जिससे किसानों को भारी असुविधा हुई। उन्होंने दावा किया कि शुरुआती दिनों में लाखों किसानों से संबंधित लाखों मीट्रिक टन गेहूं की खरीदी की गई, लेकिन पूरी प्रक्रिया अब भी अधूरी है।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार द्वारा फसल खरीद की सीमा और नियमों में बदलाव के कारण किसानों को नुकसान हो रहा है। उनके अनुसार, एक बीघा में उत्पादन और खरीद के मानकों में असंतुलन है, जिससे कई किसानों को अपनी उपज का पूरा मूल्य नहीं मिल पा रहा है।

कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार किसानों से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से नहीं ले रही है। उन्होंने पराली (नरवाई) जलाने पर लगाए जाने वाले जुर्माने का विरोध करते हुए कहा कि एक तरफ किसानों पर निगरानी और दंडात्मक कार्रवाई की जा रही है, जबकि दूसरी तरफ उनकी फसलों का समय पर सर्वे और उचित मूल्यांकन नहीं हो रहा है।

पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के नाम पर राजनीति कर रही है और बड़े-बड़े वादों के बावजूद जमीनी स्तर पर सुधार नहीं दिख रहा है। उन्होंने यह भी दावा किया कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जिससे वे आर्थिक संकट में हैं।

कुणाल चौधरी ने पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन मुख्यमंत्री कमल नाथ के समय आपदा की स्थिति में किसानों को बिना जटिल प्रक्रिया के आर्थिक सहायता दी गई थी, जबकि वर्तमान सरकार में प्रक्रिया जटिल और धीमी है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार कृषि नीतियों में बाहरी दबाव में काम कर रही है और ओपन मार्केट व निर्यात नीतियों को लेकर भी किसानों के हितों की अनदेखी की जा रही है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस के अंत में उन्होंने मांग की कि सरकार किसानों की पूरी फसल की समय पर और पारदर्शी तरीके से खरीद सुनिश्चित करे, पराली जलाने पर दंडात्मक कार्रवाई को रोके और कृषि नीतियों को किसानों के हित में संशोधित करे।