दशकों की सेवा, दिहाड़ी से बदतर हालात,अंशकालीन कर्मचारियों का फूटा गुस्सा

स्कूल शिक्षा और आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत वर्षों से कार्यरत अंशकालीन कर्मचारियों ने कम वेतन, स्थायीकरण और न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर डीपीआई कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया।

दशकों की सेवा, दिहाड़ी से बदतर हालात,अंशकालीन कर्मचारियों का फूटा गुस्सा

भोपाल: स्कूल शिक्षा विभाग एवं आदिम जाति कल्याण विभाग के अंतर्गत संचालित स्कूलों,छात्रावासों और आश्रमों में वर्षों से कार्यरत अंशकालीन एवं अस्थायी चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों का सब्र आखिरकार टूट गया. लम्बे समय से काम कर रहे कर्मचारी कम वेतन मिलने से अपना घर नही चला पा रहे है.15 से 20 साल तक लगातार सेवा देने के बाद भी सिर्फ 5,000 रुपये मासिक वेतन मिलने से नाराज कर्मचारियों ने सोमवार को डीपीआई कार्यालय का घेराव कर प्रदर्शन किया।

10–12 घंटे काम, फिर भी न्यूनतम वेतन नहीं

प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने शासन और विभागीय अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनसे प्रतिदिन 10-12 घंटे काम लिया जाता है.लेकिन बदले में न तो न्यूनतम वेतन दिया जा रहा है।कर्मचारियों का कहना है कि नियमित कर्मचारियों की तरह जिम्मेदारियां निभाने के बावजूद उन्हें आज भी अंशकालीन और अस्थायी बताकर शोषण किया जा रहा है। 

न्यूनतम वेतन और समान भत्तों की मांग तेज

कर्मचारियों ने बताया कि कई साथी 15–20 वर्षों से स्कूलों और छात्रावासों में सेवाएं दे रहे हैं, फिर भी उनकी स्थिति दिहाड़ी मजदूरों से भी बदतर है। कई बार पांच,छ: महीनों की देरी से वेतन मिलता है.जिससे परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। कर्मचारियों ने मांग की कि अंशकालीन एवं अस्थायी कर्मचारियों के लिए स्पष्ट सेवा शर्तें लागू की जाए 15-20 वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को तत्काल स्थायी किया जाए और उन्हें न्यूनतम वेतन तथा शासकीय कर्मचारियों के समान वेतन-भत्ते दिए जाएं.डीपीआई कार्यालय घेराव के दौरान कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।