इंदौर: 2 करोड़ की MD ड्रग बरामदगी फर्जी निकली, FSL की रिपोर्ट में यूरिया साबित
इंदौर शहर में एक साल पहले तेजाजी नगर थाना पुलिस द्वारा की गई करीब दो करोड़ रुपये की एमडी ड्रग्स की हाई-प्रोफाइल बरामदगी अब पूरी तरह फर्जी साबित हो गई है।
इंदौर शहर में एक साल पहले तेजाजी नगर पुलिस ने एक हाई-प्रोफाइल दो करोड़ रुपये की एमडी ड्रग की काल्पनिक बरामदगी का दावा किया था, लेकिन अब वही ड्रग्स केंद्रीय लेब की रिपोर्ट में यूरिया निकली है। जांच के दौरान जब कथित एमडी नमूनों को भोपाल स्थित राज्य फोरेंसिक साइंस लैब में परीक्षण के लिए भेजा गया, तब रिपोर्ट में कोई भी मादक तत्व नहीं पाया गया। यह खुलासा अदालत में पेश रिपोर्ट में हुआ, जिससे मामले की सच्चाई उजागर हुई और पुलिस की जांच पर सवाल उठे।
दरअसल, तेजाजी पुलिस पुलिस ने फरवरी 2025 में एक प्रकरण दर्ज किया था जिसमें 198 ग्राम एमडी ड्रग्स जब्त होना बताया गया था जिसमें विजय, शाहनवाज, राजा और आजाद नगर थाने के कांस्टेबल लखन गुप्ता को आरोपी बनाया गया था, पुलिस जांच में बताया गया था कि चेकिंग के दौरान दो आरोपियों से जांच के दौरान एमडी ड्रग्स जब्त की गई थी, जबकि आरक्षक लखन और शाहनवाज को ड्रग्स सप्लाई चेन का सहयोगी बताया गया था। जब्त की गई एमडी ड्रग्स की कीमत लगभग 2 करोड़ रुपये बताई गई थी। इस मामले में पुलिस ने सभी आरोपियों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था।
हालांकि, जब कोर्ट में चालान पेश किया जाना था तब तक जब्त किए गए ड्रग्स की भोपाल से आई फॉरेंसिक रिपोर्ट ने पूरे मामले को बदल दिया। जहां भोपाल लेब से मिली जांच रिपोर्ट में एमडी ड्रग्स को यूरिया दर्शाया गया, जिसके बाद जिला अदालत ने इंदौर पुलिस के केस को खारिज कर दिया है और सभी आरोपियों को राहत दी गई है। कोर्ट ने जांच प्रक्रिया की गंभीरता पर सवाल उठाए हैं और नमूनों को हैदराबाद के केंद्रीय FSL में दोबारा परीक्षण के लिए भेजने का निर्देश दिया है ताकि निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जा सके लेकिन जब हैदराबाद स्थित केंद्रीय FSL लेब से आई रिपोर्ट में भी इसे यूरिया बता दिया गया।
इस मामले में पीड़ितों के एडवोकेट नितिन भारद्वाज ने बताया कि तत्कालीन थाना प्रभारी और ट्रेनिंग पर इंदौर आए आईपीएस अधिकारी आदित्य सिंघानिया के रिकॉर्ड को मजबूत दिखाने के लिए यह पूरा फर्जी मामला तैयार किया गया था, जिसके तहत तत्कालीन आजाद नगर एसीपी आईपीएस करणदीप सिंह और आजाद नगर थाना प्रभारी ने मिलकर यह फर्जी मामला तैयार किया था और पुलिस कमिश्नर से दस दस हजार रुपए का इनाम भी लिया था, इस पूरे मामले में लेब की रिपोर्ट के आधार पर पूरा मामला बदल गया और सभी चारों आरोपियों को कोर्ट ने बरी कर दिया है। अब उनके पक्षकार मानहानि का दावा प्रस्तुत करने जा रहे हैं।
Varsha Shrivastava 
