भोपाल में SPEAK की बैठक,पदोन्नति नियम-2025 पर आपत्ति:संगठन के अध्यक्ष बोले-2016 से पदोन्नति प्रभावित, नई प्रक्रिया से सामान्य, पिछड़ा वर्ग को नुकसान

भोपाल में सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था (SPEAK) ने रविवार को शौर्य स्मारक पास बैठक की.

भोपाल में SPEAK की बैठक,पदोन्नति नियम-2025 पर आपत्ति:संगठन के अध्यक्ष बोले-2016 से पदोन्नति प्रभावित, नई प्रक्रिया से सामान्य, पिछड़ा वर्ग को नुकसान

भोपाल में सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था (SPEAK) ने रविवार को शौर्य स्मारक पास बैठक की. संगठन ने सरकार के प्रस्तावित लोकसेवा पदोन्नति नियम-2025 पर आपत्ति जताई है. संगठन का कहना है कि नए नियम लागू होने से 2016 से लंबित पदोन्नति विवाद का समाधान नहीं होगा, बल्कि कई कर्मचारियों के सेवा हित प्रभावित होंगे.

स्पीक ने सरकार से नियमों में संशोधन की मांग करते हुए कई संवधानिक और प्रशासनिक सवाल भी उठाए हैं. संस्था के अध्यक्ष के.एस तोमर ने कहा कि सरकार पदोन्नति मामले में न्यायालय का फैसला आने से पहले ही जल्दबाजी में पदोन्नति प्रक्रिया शुरू कर रही है. आज की बैठक में संगठन की आगे की रणनीति पर चर्चा की जा रही है. उन्होंने कहा कि सरकार खुद तय नहीं कर पा रही है कि 2002 के नियम सही हैं या 2025 के. यदि सरकार ने नियमावली में जरूरी बदलाव नहीं किए, तो संगठन न्यायालय का रुख करेगा और अपना पक्ष रखेगा.

2016 से पदोन्नति प्रभावित हो रही

के.एस तोमर ने कहा कि साल 2016 से पदोन्नति प्रक्रिया प्रभावित रही है. यदि नए नियम केवल साल 2025 से लागू किए जाते हैं तो 2016 से 2025 के बीच प्रभावित कर्मचारियों तथा इस अवधि में सेवानिवृत्त हो चुके अधिकारियों के हितों की अनदेखी होगी. संगठन ने दावा किया कि नए नियमों में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जिनसे पदोन्नति प्रक्रिया में सामान्य, पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक वर्ग के कर्मचारियों को नुकसान हो सकता है. इनमें वरिष्ठता निर्धारण, कॉमन विचारण सूची, आरक्षित वर्ग के अधिकारियों को अनारक्षित रिक्तियों में विचारण, प्रतीक्षा सूची की व्यवस्था तथा बैकलॉग पदों को भविष्य के लिए सुरक्षित रखने जैसे प्रावधान शामिल हैं.

संस्था ने यह भी कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णयों में पदोन्नति में आरक्षण से जुड़े सिद्धांतों का उल्लेख किया गया है. नए नियम इन निर्णयों की भावना के अनुरूप नहीं हैं. संगठन ने सरकार से न्यायालय के निर्देशों के अनुसार नियमों की समीक्षा करने की मांग की है.