पुरी में जगन्नाथ रथयात्रा में भगदड़, 1 की मौत
पुरी में जगन्नाथ रथयात्रा में भगदड़, 1 की मौत:तेज बारिश के बीच यात्रा रूट पर 10 लाख से ज्यादा लोग मौजूद
पुरी: जगन्नाथ रथ यात्रा के पहले दिन 16 जुलाई को पुरी के ग्रैंड रोड (बड़ा डंडा) पर भक्तों की भारी भीड़ के कारण भगदड़ मच गई। भीड़ के कारण बेहोश होने से 1 की मौत हो गई। भगदड़ में बेहोश व्यक्ति को इलाज के लिए पुरी जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मौत का सही कारण का अभी पता नहीं चल पाया है। पुलिस ने कहा कि मरने वाले की पहचान अभी तक नहीं हो पाई है आगे की जांच चल रही है। पुलिस ने फुर्ती दिखाते हुए दर्जनों भक्तों को नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया है। फिलहाल भक्तों की भारी भीड़ अपने प्रिय भगवान के साथ चल रही है। दूसरी तरफ अस्पतालों में घायलों का इलाज जारी है।
दुनिया भर में अपने विराट रूप के लिए प्रसिद्ध भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 16 जुलाई से शुरू हो गई है। इस यात्रा में दुनियाभर से लाखों लोग अपने प्रिय भगवान के दर्शन करने के लिए आते हैं। इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा अपने मंदिर से निकलते हैं। घंटे, शंख और तमाम तरह के साजो सामान के साथ यात्रा शुरू होती है। इसके बाद विधिवत रूप से यह यात्रा संपन्न होती है। हर साल बढ़ती भीड़ को देखते हुए पुरी प्रशासन ने भी कमर कसी थी। बारिश और जल भराव से निपटने के लिए पर्याप्त तैयारियां की गई थीं। अधिकारियों के मुताबिक, 24 घंटे अलर्ट टीमें तैनात हैं।

हजारों की भीड़ में एंबुलेंस को मिली जगह
ओडिशा पुलिस के मुताबिक यात्रा शुरू होने के ठीक बाद एक श्रद्धालु भीड़ की वजह से बेहोश हो गया। भीड़ के बीच से ही एंबुलेंस के जरिए उसे वहां से निकाला गया। हालांकि, उसकी जान नहीं बचाई जा सकी।
फायर एंड इमरजेंसी डिपार्टमेंट ने करीब 33 भक्तों की बचाई जान
लाखों की संख्या में जुटे श्रद्धालुओं को लेकर ओडिशा प्रशासन सक्रिय है। पुलिस की तरफ से दी गई जानकारी के मुताबिक, गर्मी उमस और धक्का मुक्की की वजह से करीब 34 लोगों की हालत खराब हो गई थी। इन्हें भीड़ से निकालकर अलग किया गया। फिलहाल इन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुरी रथ यात्रा
ओडिशा के पुरी में 9 दिनों तक चलने वाली वार्षिक रथ यात्रा की शुरुआत लागातार बारिश और लाखों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में ‘पहंडी’ की रस्म के साथ हुई। 'पहंडी' की रस्म में महाप्रभु भगवान जगन्नाथ, उनके बड़े भाई भगवान बलभद्र और उनकी बहन देवी सुभद्रा के विग्रहों को 12वीं सदी के पुरी मंदिर से रथों तक ले जाया जाता है।
घंटियों, शंख और झांझ की ध्वनि के बीच, चक्रराज सुदर्शन को सबसे पहले मुख्य मंदिर से बाहर लाया गया और देवी सुभद्रा के ‘दर्पदलन’ रथ पर विराजमान किया गया। पंडित सूर्यनारायण रथशर्मा ने बताया कि श्री सुदर्शन भगवान विष्णु का अस्त्र है, जिनकी पूजा पुरी में भगवान जगन्नाथ के रूप में की जाती है।
उन्होंने बताया कि भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई भगवान बलभद्र के विग्रह को भी उनके ‘तालध्वज’ रथ पर स्थापित किया गया। सेवादारों द्वारा शून्य पहंडी (रथ तक ले जाते समय देवी सुभद्रा के विग्रह का मुख आकाश की ओर होता है) शैली में भगवान जगन्नाथ और भगवान बलभद्र की बहन देवी सुभद्रा के विग्रह को उनके रथ तक ले लाया गया।
अंत में महाप्रभु भगवान जगन्नाथ के विग्रह को मंदिर से बाहर लाया गया, तो ‘बड़ा डंडा’ (रथमार्ग) पर भक्तों की भावनाएं उमड़ पड़ीं। उन्होंने अपने हाथ उठाकर और ‘जय जगन्नाथ’ का जयघोष कर महाप्रभु के रथ पर विराजमान होने का जश्न मनाया. ओडिसी नर्तकों, लोक कलाकारों और सांस्कृतिक दलों ने 'कालिया ठाकुर' के सामने प्रस्तुति दी।

