Bhopal Taxi Strike : टैक्सी हड़ताल से यात्री परेशान, रेलवे स्टेशन पर कैब नहीं, ऑटो चालक वसूल रहे डेढ़-दो गुना किराया
Bhopal Taxi Strike : भोपाल रेलवे स्टेशन पर पहुंचे यात्रियों ने कई बार ऑनलाइन कैब बुक करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें वाहन उपलब्ध नहीं हो सके।
Bhopal Taxi Strike : भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में एग्रीगेटर कंपनियों के खिलाफ टैक्सी चालक संघ की हड़ताल का असर सुबह से साफ दिखाई दे रहा है। मंगलवार रात 12 बजे से ओला, उबर समेत अन्य ऑनलाइन कैब सेवाओं का संचालन बंद है। भोपाल रेलवे स्टेशन पर पहुंचे यात्रियों ने कई बार ऑनलाइन कैब बुक करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें वाहन उपलब्ध नहीं हो सके। इसके बाद यात्रियों को ऑटो, बस और दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ा। यात्रियों का कहना है कि सामान्य दिनों में स्टेशन से आसानी से कैब मिल जाती थी, लेकिन हड़ताल के कारण उन्हें काफी देर तक सामान के साथ इंतजार करना पड़ा।
यात्री बोले- ऑटो चालकों ने बढ़ाया किराया
कैब उपलब्ध नहीं होने का असर ऑटो किराए पर भी दिखाई दिया। यात्रियों ने आरोप लगाया कि कुछ ऑटो चालक सामान्य किराए से डेढ़ से दो गुना तक राशि मांग रहे हैं। रेलवे स्टेशन से टीटी नगर का सामान्य ऑटो किराया करीब 80 से 90 रुपये बताया गया, लेकिन यात्रियों से 150 से 170 रुपये तक मांगे जाने की शिकायत सामने आई।
इसी तरह लालघाटी का किराया सामान्य तौर पर 90 से 100 रुपये के आसपास बताया गया, जबकि अब 150 से 180 रुपये तक मांगे जा रहे हैं। पिपलानी पुलिस स्टेशन तक सामान्य किराया 170 से 190 रुपये के करीब है, लेकिन कुछ यात्रियों के अनुसार यहां 250 से 280 रुपये तक वसूले जा रहे हैं।
बच्चों के साथ कैब का इंतजार
रेलवे स्टेशन पर मिली महिला यात्री ने बताया कि वह करीब आधे घंटे से कैब का इंतजार कर रही थीं। उन्होंने बताया कि उनके घुटने में परेशानी है और उनके साथ दो बेटियां भी हैं। उनकी एक बेटी दो साल और दूसरी आठ साल की है।
उन्हें रोहित नगर स्थित अपोलो अस्पताल जाना था, लेकिन ऑनलाइन कैब उपलब्ध नहीं हो सकी। इसके आलावा कर्नाटक से भोपाल पहुंचे यात्री ने बताया कि वह उत्तराखंड के रहने वाले हैं और कर्नाटक से भोपाल पहुंचे हैं।
उन्हें सुल्तानिया अस्पताल जाना था। उन्होंने काफी देर तक ऑनलाइन कैब बुक करने की कोशिश की, लेकिन कोई वाहन उपलब्ध नहीं हुआ। इसके बाद उन्हें रेलवे स्टेशन के बाहर दूसरे साधन तलाशने पड़े।
कैब बंद होने पर ऑटो ही बना प्रमुख सहारा
भोपाल रेलवे स्टेशन पर कैब सेवा बंद होने के बाद ऑटो यात्रियों के लिए सबसे बड़ा विकल्प बन गया है। हालांकि, कुछ यात्रियों ने अधिक किराया मांगने की शिकायत की है। स्टेशन पर बाहर से आने वाले यात्रियों को सामान के साथ ऑटो की तलाश करनी पड़ रही है। हड़ताल का असर खास तौर पर उन यात्रियों पर ज्यादा दिखाई दे रहा है, जिन्हें रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, बस स्टैंड और अस्पताल जैसे स्थानों तक तुरंत पहुंचना है।
बोर्ड ऑफिस चौराहे पर प्रदर्शन की तैयारी
टैक्सी चालक संगठनों ने आंदोलन को आगे बढ़ाने की तैयारी की है। संयुक्त मोर्चे की ओर से 19 अगस्त को बोर्ड ऑफिस चौराहे पर धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है। संगठन की ओर से मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसमें टैक्सी चालकों की मांगों का जल्द समाधान करने की मांग की जाएगी। संगठन का कहना है कि धरना और बंद शांतिपूर्ण तरीके से किया जा रहा है।
स्टेशन पर कैब रोकने की भी शिकायत
हड़ताल के दौरान बुकिंग लेकर यात्रियों को रेलवे स्टेशन छोड़ने पहुंच रही कुछ कैब को रोके जाने की बात भी सामने आई है। संगठन से जुड़े लोग कैब चालकों से वाहन नहीं चलाने की अपील कर रहे हैं। कुछ यात्रियों ने आरोप लगाया कि उन्हें कैब का भुगतान करने से भी रोका गया।
अवधपुरी से भोपाल स्टेशन पहुंचे यात्री परिहार ने बताया कि उनकी कैब को स्टेशन पर रोक लिया गया। उनके अनुसार वह किराया देना चाहते थे, लेकिन मौके पर मौजूद लोगों ने भुगतान नहीं करने दिया। इसके बाद वह बिना किराया दिए स्टेशन से उतर गए।
ओवरचार्जिंग पर कार्रवाई करेगा आरटीओ
ओवरचार्जिंग की शिकायतों को लेकर आरटीओ जितेंद्र शर्मा ने कार्रवाई की बात कही है। उनका कहना है कि कैब संगठन के लोगों को बातचीत के लिए बुलाया गया है।
इसके साथ ही किसी भी तरह की ओवरचार्जिंग की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। इससे यात्रियों को उम्मीद है कि हड़ताल के दौरान अधिक किराया वसूले जाने की शिकायतों पर प्रशासन नजर रखेगा।
स्थायी किराया तय करने की मुख्य मांग
टैक्सी चालक संघ की सबसे बड़ी मांग सरकार द्वारा टैक्सी का उचित और स्थायी किराया तय करने की है। संगठन का आरोप है कि एग्रीगेटर कंपनियां अपनी सुविधा के अनुसार किराया तय करती हैं। दूसरी ओर ईंधन, वाहन की किस्त, बीमा, सर्विस और मेंटेनेंस का खर्च लगातार बढ़ रहा है।
संघ पहले ही 22 से 30 रुपये प्रति किलोमीटर किराया, 1 से 2 रुपये प्रति मिनट टाइम चार्ज और बेस फेयर लागू करने की मांग कर चुका है। संगठन चाहता है कि सरकार किराया तय करे और एग्रीगेटर कंपनियों को उसी दर के अनुसार सेवा संचालित करने के निर्देश दे।
प्राइवेट वाहनों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर रोक की मांग
संयुक्त मोर्चे ने एग्रीगेटर कंपनियों के जरिए नॉन-कमर्शियल वाहनों के इस्तेमाल पर भी रोक लगाने की मांग की है। इसमें प्राइवेट नंबर वाली कार, बाइक और ई-रिक्शा शामिल हैं।
संगठन का आरोप है कि इन वाहनों का व्यावसायिक इस्तेमाल करने से कमर्शियल टैक्सी चालकों की आय प्रभावित हो रही है। संघ का कहना है कि सरकार को इस व्यवस्था को स्पष्ट करना चाहिए और नियमों के अनुसार ही यात्री परिवहन की अनुमति देनी चाहिए।
जून में भी हुआ था एयरपोर्ट राइड का बहिष्कार
टैक्सी चालक संघ इससे पहले 23, 24 और 25 जून को एयरपोर्ट राइड का बहिष्कार कर चुका है। संगठन का कहना था कि उस आंदोलन के बाद एग्रीगेटर कंपनियों ने किराए में कुछ सुधार किया था। हालांकि, प्रदर्शन समाप्त होने के बाद कंपनियों के फिर पुराने रेट पर लौटने का आरोप लगाया गया। इसके बाद संगठन ने परिवहन मंत्री से मुलाकात की थी। इस बैठक में किराया निर्धारण सहित कई मांगें रखी गई थीं।
अनिश्चितकालीन बंद की चेतावनी
संयुक्त मोर्चे ने चेतावनी दी है कि मौजूदा आंदोलन के बाद भी यदि सरकार और एग्रीगेटर कंपनियों की ओर से मांगों का समाधान नहीं किया गया तो टैक्सी बंद को अनिश्चितकालीन आंदोलन में बदला जा सकता है। संगठन का कहना है कि बढ़ते खर्च और अपेक्षाकृत कम कमाई के कारण ड्राइवर आर्थिक दबाव में हैं। इसलिए सरकार को जल्द हस्तक्षेप कर किराया और दूसरे मुद्दों पर स्थायी समाधान निकालना चाहिए।

