अनदेखी या मिलीभगत? संदिग्ध पैथोलॉजी लैबों का जाल, फर्जी रिपोर्टों के मत्थे हजारों जिंदगियां

रीवा में कई पैथोलॉजी लैबों पर फर्जी और संदिग्ध जांच रिपोर्ट देने के आरोप हैं। बिना पर्याप्त मशीनों और निगरानी के चल रही इन लैबों से मरीजों की सेहत खतरे में पड़ सकती है, जबकि स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं।

अनदेखी या मिलीभगत? संदिग्ध पैथोलॉजी लैबों का जाल, फर्जी रिपोर्टों के मत्थे हजारों जिंदगियां
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रीवा जिले में कई पैथोलॉजी लैब ऐसे चल रहे हैं, जहां न तो सही व्यवस्था है और न ही पर्याप्त निगरानी। आरोप है कि कई जगह जांच कोई और करता है, लेकिन रिपोर्ट पर किसी एमडी पैथोलॉजिस्ट के स्कैन किए हुए हस्ताक्षर लगा दिए जाते हैं। मरीजों से जांच के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती है, लेकिन रिपोर्ट सही है या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं होती।

सैकड़ों संदिग्ध रिपोर्ट जारी होने का दावा

जानकारों का कहना है कि जिले में रोज 500 से ज्यादा संदिग्ध जांच रिपोर्ट जारी की जा रही हैं। इन्हीं रिपोर्टों के आधार पर मरीजों का इलाज होता है। अगर रिपोर्ट गलत हुई तो मरीज की सेहत पर गंभीर असर पड़ सकता है। कई बार दूसरे शहरों में इलाज कराने जाने पर डॉक्टर इन रिपोर्टों को भरोसेमंद नहीं मानते।

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सड़क किनारे चल रही मोबाइल लैब

रीवा के चाकघाट, त्योंथर, चिल्ला, जवा, डभौरा और चंदपुर जैसे इलाकों में छोटी-छोटी वैन में चलित पैथोलॉजी लैब चलने की बात सामने आई है। आरोप है कि ये लैब सड़क किनारे ही सैंपल लेकर कुछ ही मिनटों में रिपोर्ट तैयार कर मरीजों को दे देती हैं। कई जगह रिपोर्ट में स्कैन किए हुए हस्ताक्षरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। कुछ वैन में एक्स-रे मशीन तक होने की बात भी कही जा रही है।

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लाइसेंस से ज्यादा लैब संचालित

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के मुताबिक, जिले में करीब 50 पैथोलॉजी सेंटरों को लाइसेंस जारी किए गए हैं, लेकिन जमीन पर इनसे कहीं ज्यादा लैब संचालित हो रही हैं। कई क्लीनिक, नर्सिंग होम और हेल्थ केयर सेंटरों में भी बिना पर्याप्त निगरानी के लैब चल रहे हैं।

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छोटे कस्बों तक फैला जाल

रीवा शहर से लेकर छोटे कस्बों और ब्लॉकों तक पैथोलॉजी सेंटरों का जाल फैल चुका है। कई लैबों में न तो पर्याप्त मशीनें हैं और न ही आधुनिक उपकरण, फिर भी कुछ ही मिनटों में जांच रिपोर्ट तैयार कर मरीजों को थमा दी जाती है। आरोप यह भी है कि बड़े अस्पतालों में जांच की सुविधा होने के बावजूद कई डॉक्टर मरीजों को निजी पैथोलॉजी सेंटरों में जांच कराने की सलाह देते हैं।

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CMHO : शिकायत मिली तो होगी कार्रवाई

CMHO डॉ. यत्नेश त्रिपाठी का कहना है कि पैथोलॉजी का लाइसेंस नियमों का पालन करने के बाद ही दिया जाता है। स्कैन हस्ताक्षर और फर्जी तरीके से रिपोर्ट जारी करने की कोई शिकायत अभी तक नहीं मिली है। हालांकि, अगर जांच में ऐसी गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लैब का लाइसेंस रद्द करने समेत कार्रवाई की जाएगी और पैथोलॉजी सेंटरों की जांच भी कराई जाएगी।