प्रतिमा बागरी का SC प्रमाणपत्र वैध, जांच समिति ने खारिज की शिकायत; कांग्रेस ने उठाए सवाल

Meta Description: मंत्री प्रतिमा बागरी के एससी प्रमाणपत्र को जांच समिति ने वैध माना है। समिति को सभी रिकॉर्ड में परिवार की जाति बागरी मिली। कांग्रेस ने फैसले पर सवाल उठाते हुए जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर आरोप लगाए हैं।

प्रतिमा बागरी का SC प्रमाणपत्र वैध, जांच समिति ने खारिज की शिकायत; कांग्रेस ने उठाए सवाल

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार की उच्च स्तरीय जांच समिति ने मंत्री प्रतिमा बागरी के अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाणपत्र को वैध माना है। समिति ने विस्तृत जांच के बाद निष्कर्ष निकाला कि उपलब्ध दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर प्रमाणपत्र को निरस्त करने का कोई तथ्यात्मक या कानूनी आधार नहीं है। इसके साथ ही शिकायत को खारिज कर दिया गया।

परिवार के दस्तावेजों में भी 'बागरी' जाति दर्ज

जांच के दौरान समिति ने राजस्व अभिलेख, खसरा-खतौनी, परिवार की वंशावली, स्कूल रिकॉर्ड, निर्वाचन संबंधी दस्तावेज, पहले जारी किए गए जाति प्रमाणपत्र, परिवार के अन्य सदस्यों के अभिलेख और संबंधित विभागों से प्राप्त रिकॉर्ड की जांच की। समिति के अनुसार सभी दस्तावेजों में परिवार की जाति 'बागरी' दर्ज मिली। किसी भी रिकॉर्ड में परिवार को राजपूत नहीं बताया गया।

समिति ने राजस्व अधिकारियों, जाति प्रमाणपत्र जारी करने वाले सक्षम प्राधिकारी और अन्य संबंधित विभागों से भी रिपोर्ट प्राप्त की। सभी पक्षों की सुनवाई और दस्तावेजों के परीक्षण के बाद यह फैसला लिया गया।

शिकायतकर्ता न्यायालय जा सकते हैं

अपने अंतिम आदेश में समिति ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रतिमा बागरी का अनुसूचित जाति प्रमाणपत्र पूरी तरह वैध है। इसे रद्द करने का कोई तथ्यात्मक या कानूनी आधार नहीं मिला। इसलिए शिकायत स्वीकार नहीं की जा सकती। हालांकि, यदि शिकायतकर्ता इस निष्कर्ष से असहमत हैं तो वे सक्षम न्यायिक मंच पर इस फैसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र हैं।

कांग्रेस ने समिति की निष्पक्षता पर उठाए सवाल

इस फैसले के बाद कांग्रेस ने जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं। कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने कहा कि यह जांच समिति नहीं, बल्कि "देखभाल समिति" की तरह काम कर रही थी। उनका आरोप है कि समिति ने मंत्री प्रतिमा बागरी के पक्ष में काम किया और संवैधानिक दस्तावेजों तथा तथ्यों की अनदेखी की।

उन्होंने कहा कि मामले में आगे की कानूनी रणनीति पर विचार किया जाएगा और जरूरत पड़ने पर न्यायालय का रुख किया जाएगा।