MP में जल्द लागू होगा UCC, समिति ने CM को सौंपी फाइनल रिपोर्ट

मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है UCC बिल, 404 धाराओं वाला मसौदा तैयार, उच्च स्तरीय समिति ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अंतिम रिपोर्ट सौंपी

MP में जल्द लागू होगा UCC, समिति ने CM को सौंपी फाइनल रिपोर्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code-UCC) लागू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम आगे बढ़ाया है। UCC के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति ने सोमवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी। अब यह रिपोर्ट विधि विभाग के पास भेजी जाएगी, जहां इसकी कानूनी समीक्षा और आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। इसके बाद प्रस्ताव को मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाएगा और मंजूरी मिलने पर आगामी मानसून सत्र में UCC विधेयक विधानसभा में पेश किए जाने की संभावना है।

तीन खंडों में तैयार की गई विस्तृत रिपोर्ट

उच्च स्तरीय समिति ने अपनी अंतिम रिपोर्ट को तीन अलग-अलग खंडों में तैयार किया है। पहले खंड में समान नागरिक संहिता को लेकर समिति की सिफारिशें, देश-विदेश में लागू संबंधित कानूनों का अध्ययन और मध्य प्रदेश की वर्तमान कानूनी व्यवस्था का विस्तृत विश्लेषण शामिल है। इस भाग में कुल 10 अध्याय हैं, जिनमें संवैधानिक प्रावधानों, सामाजिक परंपराओं और विभिन्न कानूनी व्यवस्थाओं का तुलनात्मक अध्ययन किया गया है।

रिपोर्ट का दूसरा खंड सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इसमें UCC विधेयक का मसौदा तैयार किया गया है। इस ड्राफ्ट में 4 भाग, 404 धाराएं और 7 अनुसूचियां शामिल हैं। समिति ने यह मसौदा मध्य प्रदेश की मौजूदा परिस्थितियों, सामाजिक संरचना और कानूनी व्यवस्थाओं को ध्यान में रखकर तैयार किया है।

तीसरे खंड में प्रदेशभर से प्राप्त सुझावों और जन-परामर्श का विस्तृत विवरण दिया गया है। इसमें लोगों की राय का विषयवार, लिंगवार और समुदायवार विश्लेषण भी शामिल किया गया है।

9.58 लाख से अधिक लोगों ने दिए सुझाव

समिति ने UCC का मसौदा तैयार करने से पहले व्यापक जन-परामर्श किया। जिला स्तरीय बैठकों, राज्य स्तरीय चर्चाओं और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से लोगों से सुझाव आमंत्रित किए गए। समिति को कुल 9.58 लाख से अधिक सुझाव प्राप्त हुए। रिपोर्ट में इन सुझावों का विस्तृत विश्लेषण शामिल किया गया है, ताकि कानून बनाते समय प्रदेश के विभिन्न वर्गों की राय को ध्यान में रखा जा सके।

राज्य सरकार ने समिति को विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, दत्तक ग्रहण और लिव-इन संबंध जैसे व्यक्तिगत एवं पारिवारिक मामलों का अध्ययन करने की जिम्मेदारी सौंपी थी। समिति ने इन सभी विषयों पर मौजूदा कानूनों, न्यायालयों के निर्णयों, सामाजिक परंपराओं और संवैधानिक प्रावधानों का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें तैयार की हैं। रिपोर्ट में लैंगिक समानता को विशेष महत्व दिया गया है। साथ ही यह प्रयास भी किया गया है कि प्रदेश की सामाजिक, सांस्कृतिक और पारंपरिक विविधता का सम्मान बना रहे।

22 मई को हुआ था समिति का गठन

समिति ने अपनी रिपोर्ट में अनुसूचित जनजातियों (ST) को समान नागरिक संहिता के दायरे से बाहर रखने की अनुशंसा की है। समिति का मानना है कि प्रदेश की आदिवासी आबादी की विशिष्ट परंपराओं, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक पहचान को ध्यान में रखते हुए उन्हें इस कानून से अलग रखा जाना चाहिए। मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय निवास करते हैं, इसलिए यह सिफारिश महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

राज्य सरकार ने 22 मई को समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार करने के लिए उच्च स्तरीय समिति का गठन किया था। समिति की अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को बनाया गया था। समिति में वरिष्ठ सलाहकार शत्रुघ्न सिंह, सदस्य अनूप नायर, प्रो. गोपाल शर्मा, बुधपाल सिंह, शोभा पैठणकर और सदस्य सचिव अजय कटेसरिया सहित अन्य सदस्य शामिल रहे।

मानसून सत्र में पेश हो सकता है विधेयक

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने निर्धारित समय-सीमा के भीतर रिपोर्ट सौंपने पर समिति के सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया और कहा कि रिपोर्ट तैयार करने में व्यापक जनभागीदारी और संवैधानिक मूल्यों का ध्यान रखा गया है।

रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अब पूरा मामला विधि विभाग के पास जाएगा। विभाग कानूनी परीक्षण और आवश्यक संशोधन करेगा। इसके बाद प्रस्ताव वरिष्ठ सचिव समिति और फिर राज्य मंत्रिपरिषद के समक्ष रखा जाएगा। यदि कैबिनेट से मंजूरी मिल जाती है तो समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक को विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जा सकता है।

हालांकि, फिलहाल UCC कानून लागू नहीं हुआ है। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अभी विधायी प्रक्रिया पूरी होना बाकी है। विधानसभा से विधेयक पारित होने और राज्यपाल की मंजूरी मिलने के बाद ही यह कानून प्रभावी हो सकेगा।