BRICS Summit 2026 : 7 साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग, मोदी से मुलाकात पर टिकी नजरें; BRICS में कई अहम मुद्दों पर मंथन

Guangzhou- Delhi Flight : चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं। 2020 की गलवान झड़प के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। वे नई दिल्ली में BRICS समिट में शामिल होंगे।

BRICS Summit 2026 : 7 साल बाद भारत पहुंचे शी जिनपिंग, मोदी से मुलाकात पर टिकी नजरें; BRICS में कई अहम मुद्दों पर मंथन

BRICS Summit 2026 : नई दिल्ली। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत पहुंचे हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया। 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद यह उनका पहला भारत दौरा है। जिनपिंग नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अहम द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। दोनों नेताओं की मुलाकात पर भारत और चीन के संबंधों की अगली दिशा को लेकर खास नजर रहेगी। सीमा विवाद, कारोबार और दोनों देशों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे मुद्दे बैठक में अहम रह सकते हैं।

मोदी, पुतिन और जिनपिंग फिर एक मंच पर

BRICS सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक साथ नजर आएंगे। करीब एक दशक बाद तीनों नेताओं की ऐसी मुलाकात हो रही है। इससे पहले तीनों नेता 2016 में गोवा में हुए BRICS सम्मेलन में एक साथ शामिल हुए थे।

मौजूदा समय में वैश्विक राजनीति तेजी से बदल रही है। ऐसे में तीनों प्रमुख देशों के नेताओं की मौजूदगी सम्मेलन को और महत्वपूर्ण बना रही है। व्यापार, वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे विषयों पर इन देशों का रुख चर्चा में रह सकता है।

मोदी की कई देशों के नेताओं से अहम बैठकें

BRICS सम्मेलन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई विदेशी नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत की। दिल्ली के हैदराबाद हाउस में वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हुंग के साथ बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय सहयोग पर चर्चा हुई।

इसके अलावा मोदी ने मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम और इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद के साथ भी मुलाकात की। इन बैठकों का उद्देश्य भारत के इन देशों के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत करना है। BRICS सम्मेलन के दौरान भी भारत कई देशों के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है।

China Southern फिर शुरू करेगी भारत की सीधी उड़ान

भारत और चीन के बीच हवाई संपर्क भी धीरे-धीरे सामान्य होने की दिशा में बढ़ रहा है। चीन की बड़ी एयरलाइन China Southern छह साल के अंतराल के बाद भारत के लिए नियमित सीधी उड़ान सेवा शुरू करने जा रही है।

एयरलाइन 21 सितंबर से ग्वांगझू और दिल्ली के बीच रोजाना उड़ान संचालित करने की योजना बना रही है। यह कदम ऐसे समय उठाया जा रहा है, जब दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क बढ़ रहा है। इससे यात्रियों, कारोबारियों और दोनों देशों के बीच आवाजाही करने वाले लोगों को फायदा मिल सकता है।

दूसरी चीनी एयरलाइंस भी लौटीं

China Southern से पहले Air China और China Eastern भी भारत के लिए कुछ सीधी उड़ान सेवाएं बहाल कर चुकी हैं। Air China ने करीब छह साल बाद बीजिंग-दिल्ली रूट पर सेवा दोबारा शुरू की थी। वहीं China Eastern ने कुनमिंग-कोलकाता रूट पर उड़ान बहाल की। उसने शंघाई-दिल्ली सेवा भी फिर शुरू की थी। कोरोना महामारी और 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच सीधी हवाई सेवाएं लंबे समय तक प्रभावित रही थीं। अब उड़ानों की वापसी को दोनों देशों के बीच संपर्क सामान्य होने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

BRICS सम्मेलन में दिनभर कई कार्यक्रम

शनिवार को BRICS सम्मेलन का कार्यक्रम काफी व्यस्त रहेगा। दोपहर करीब दो बजे सदस्य देशों के नेता सम्मेलन स्थल पर पहुंचेंगे। इसके बाद बंद कमरे में नेताओं की बैठक होगी। शाम को ‘भारत इनोवेट्स’ प्रदर्शनी का आयोजन किया जाएगा। 

इसके बाद BRICS नेताओं की सामूहिक तस्वीर होगी और सभी नेता वृक्षारोपण कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे। दिन के अंत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से गाला डिनर का आयोजन किया जाएगा। सम्मेलन के दौरान आर्थिक सहयोग और वैश्विक चुनौतियों सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

रामाफोसा और गौतम अडाणी की भी मुलाकात

दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा ने दिल्ली में अडाणी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडाणी से मुलाकात की। यह बैठक BRICS सम्मेलन से अलग दक्षिण अफ्रीका के कारोबारी संपर्क कार्यक्रम का हिस्सा थी। बैठक में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश संबंधों को मजबूत करने की संभावनाओं पर चर्चा हुई।

भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में इस मुलाकात को दोनों देशों के कारोबारी रिश्तों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

LAC और व्यापार होंगे भारत-चीन रिश्तों के बड़े मुद्दे

गलवान संघर्ष के बाद भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर लंबे समय तक तनाव रहा। अब दोनों देश सीमा से जुड़े विवादों के साथ व्यापार और सैन्य संपर्क जैसे मुद्दों पर आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। सीमा विवाद अभी भी दोनों देशों के रिश्तों का सबसे संवेदनशील विषय है। 

दोनों पक्ष सीमा से जुड़े मामलों पर विशेषज्ञ स्तर की बातचीत और सैन्य संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने पर भी काम कर रहे हैं। इसके साथ ही व्यापार असंतुलन भी बड़ी चिंता है। भारत चीन से बड़ी मात्रा में सामान आयात करता है, जिसके कारण दोनों देशों के बीच व्यापार घाटा काफी अधिक बना हुआ है।

BRICS में डॉलर पर निर्भरता घटाने की कोशिश

BRICS देशों के बीच आर्थिक सहयोग भी इस सम्मेलन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। सदस्य देश आपसी कारोबार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के विकल्पों पर चर्चा कर रहे हैं। इसके लिए स्थानीय मुद्राओं में व्यापार बढ़ाने और अलग-अलग देशों के डिजिटल भुगतान सिस्टम को आपस में जोड़ने की संभावनाओं पर जोर दिया जा रहा है। 

हालांकि, BRICS का फिलहाल कोई साझा भुगतान सिस्टम या एकल मुद्रा नहीं है। भारत चाहता है कि सदस्य देशों के बीच डिजिटल भुगतान और वित्तीय तकनीक का इस्तेमाल बढ़े। इससे सीमा पार भुगतान आसान हो सकता है और कारोबार में लागत तथा समय दोनों कम हो सकते हैं।

11 देशों का समूह है BRICS

BRICS दुनिया की प्रमुख उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। मौजूदा विस्तार के बाद इसमें ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब और इंडोनेशिया शामिल हैं। समूह का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक सहयोग को बढ़ावा देना है। 

शुरुआत में इसमें ब्राजील, रूस, भारत और चीन शामिल थे, इसलिए इसे BRIC कहा गया। बाद में दक्षिण अफ्रीका के शामिल होने के बाद इसका नाम BRICS हुआ। भारत 2026 में समूह की अध्यक्षता कर रहा है और इसी वजह से नई दिल्ली में होने वाला सम्मेलन खास महत्व रखता है।

पाकिस्तान और तुर्किये की सदस्यता पर सवाल

BRICS के विस्तार के बाद कई अन्य देशों ने भी समूह में शामिल होने की इच्छा जताई। पाकिस्तान और तुर्किये भी ऐसे देशों में शामिल रहे हैं। पाकिस्तान ने 2023 में BRICS की सदस्यता के लिए आवेदन किया था और उसे कुछ देशों का समर्थन भी मिला। इसके बावजूद उसे अभी तक पूर्ण सदस्यता नहीं मिली है। तुर्किये ने भी समूह का हिस्सा बनने की कोशिश की है।

BRICS में नए सदस्य को शामिल करने के लिए मौजूदा सदस्यों की सहमति महत्वपूर्ण होती है। इसलिए किसी देश की आपत्ति सदस्यता प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, किसी विशेष देश की सदस्यता रोकने को लेकर भारत की ओर से आधिकारिक तौर पर कोई स्पष्ट बयान नहीं दिया गया है।