MP RERA को मिला नया अध्यक्ष, शैलेंद्र सिंह की नियुक्ति; संजय गुप्ता सदस्य, रविंद्र सिंह को भी जिम्मेदारी
मध्यप्रदेश RERA को नया अध्यक्ष मिल गया है। पूर्व ACS शैलेंद्र सिंह को MP RERA का चेयरमैन बनाया गया है। संजय गुप्ता और रविंद्र सिंह को भी अहम जिम्मेदारियां मिली हैं।
भोपाल। मध्यप्रदेश भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण (MP RERA) में लंबे समय से खाली चल रहे अहम पदों पर नियुक्तियां कर दी गई हैं। पूर्व अपर मुख्य सचिव शैलेंद्र सिंह को MP RERA का नया अध्यक्ष बनाया गया है. इसके साथ ही संजय गुप्ता को प्राधिकरण का सदस्य और रिटायर्ड IAS अधिकारी रविंद्र सिंह को RERA अपीलीय प्राधिकरण का सदस्य नियुक्त किया गया है.
शैलेंद्र सिंह को RERA की कमान
शैलेंद्र सिंह प्रशासनिक सेवा में लंबे अनुभव वाले अधिकारी रहे हैं. उन्होंने इंदौर में अपर कलेक्टर के तौर पर भी जिम्मेदारी संभाली है और बाद में अपर मुख्य सचिव के पद तक पहुंचे. अब उन्हें मध्यप्रदेश RERA की कमान सौंपी गई है. RERA अध्यक्ष के तौर पर उनके सामने रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की निगरानी, होम बायर्स की शिकायतों और बिल्डर्स से जुड़े विवादों के निपटारे जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे.
संजय गुप्ता को सदस्य की जिम्मेदारी
सरकार ने पूर्व IAS अधिकारी संजय गुप्ता को MP RERA का सदस्य बनाया है. संजय गुप्ता उज्जैन संभाग के कमिश्नर के तौर पर भी काम कर चुके हैं. प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए उनकी नियुक्ति को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
रविंद्र सिंह RERA अपीलीय प्राधिकरण में
रिटायर्ड IAS अधिकारी रविंद्र सिंह को RERA अपीलीय प्राधिकरण का सदस्य नियुक्त किया गया है. यहां RERA के आदेशों से जुड़े मामलों की अपील और संबंधित कानूनी मामलों की सुनवाई होती है.
पांच महीने से खाली था RERA अध्यक्ष का पद
MP RERA के अध्यक्ष का पद करीब चार से पांच महीने से खाली था. पूर्व अध्यक्ष एपी श्रीवास्तव का कार्यकाल मार्च 2026 में खत्म होने के बाद यह पद रिक्त था. उनकी नियुक्ति के बाद अब प्राधिकरण के कामकाज को गति मिलने की उम्मीद है.
शैलेंद्र सिंह की उम्र को देखते हुए उनका कार्यकाल करीब एक साल चार महीने रहने की जानकारी सामने आई है. RERA अध्यक्ष के लिए अधिकतम आयु सीमा 65 वर्ष है और उनका कार्यकाल दिसंबर 2027 तक रहने की बात कही गई है.
होम बायर्स और बिल्डर्स से जुड़े मामलों पर रहेगी नजर
MP RERA का काम रियल एस्टेट सेक्टर में पारदर्शिता बनाए रखना और प्रॉपर्टी खरीदारों के हितों की रक्षा करना है. प्राधिकरण के पास प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन, प्रोजेक्ट में देरी, खरीदारों की शिकायतों और बिल्डर्स से जुड़े विवादों जैसे मामले आते हैं. नई नियुक्तियों के बाद अब RERA के नियमित कामकाज के साथ लंबित मामलों और अपीलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है.

