रीवा के महेवा में क्रेशर की धूल और ब्लास्टिंग से ग्रामीण परेशान, प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
रीवा के महेवा गांव में क्रेशर से उड़ती धूल और ब्लास्टिंग के कारण ग्रामीणों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और जान-माल के खतरे का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए क्रेशर संचालन पर सख्त कार्रवाई और प्रदूषण से राहत की मांग की है।
रिपोर्टर- राजेंद्र पयासी
रीवा जिले की त्योंथर तहसील के महेवा में तथाकथित नियम-कानून को ताक पर रखकर चल रही क्रेशर मशीनें झिरिया बसाहट के लोगों के लिए 'डस्ट बम' बन गई हैं। क्रेशर से उड़ती धूल और पत्थर ब्लास्टिंग ने ग्रामीणों का जीना मुहाल कर दिया है।

महेवा गांव स्थित झिरिया बसाहट में निवास करने वाले स्थानीय निवासियों के अनुसार क्रेशर से निकलने वाला धुआं और डस्ट सीधे सांसों में घुल रहा है। इससे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक में दमा और सांस की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। सबसे बड़ी लापरवाही यह है कि क्रेशर संचालकों ने पर्यावरण सुरक्षा के लिए जरूरी पेड़-पौधे तक नहीं लगाए हैं, जबकि यह नियमों में अनिवार्य है।
ब्लास्टिंग से दहल रहे घर, पत्थर पहुंच रहे आंगन तक

ग्रामीणों का आरोप है कि पत्थर तोड़ने के लिए कई बार हाई ब्लास्टिंग की जाती है। ब्लास्टिंग से उड़ने वाले पत्थर के टुकड़े सीधे घरों तक पहुंच रहे हैं। इससे जान-माल का खतरा बना रहता है।
झिरिया बसाहट के लोगों का कहना है कि उन्होंने दर्जनों बार खनिज विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से शिकायत की। अधिकारी जांच के नाम पर आते हैं, क्रेशर मालिकों से बात करते हैं और कार्रवाई का आश्वासन देकर लौट जाते हैं। लेकिन ब्लास्टिंग और धूल का कहर रुकता नहीं।

नियम को ताक पर रखकर किया जा रहा पत्थर का उत्खनन
महेवा में संचालित क्रेशर संचालक द्वारा तथाकथित निर्धारित एरिया के बाहर न केवल उत्खनन किया जा रहा है, बल्कि बस्ती के नजदीक तक गहरी खाई कर दी गई है, जबकि खनिज विभाग के अनुसार क्रेशर आबादी से 500 मीटर दूर होना चाहिए। धूल रोकने के लिए क्रेशर के चारों ओर पेड़ लगाना अनिवार्य है। धूल उड़ने से रोकने के लिए पानी का छिड़काव जरूरी है। केवल दिन में, नियंत्रित तरीके से ही संचालन किया जा सकता है।

महेवा में इनमें से किसी भी नियम का पालन नहीं हो रहा। खनिज विभाग, वन विभाग, पर्यावरण विभाग और स्थानीय पुलिस की चुप्पी पर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। हालांकि नियम विरुद्ध कारोबार कोई नया नहीं है, बल्कि जमीनी हकीकत यह है कि कई वर्षों से सारे कानून-कायदों को दरकिनार कर पत्थर का उत्खनन एवं क्रेशर का संचालन किया जा रहा है, लेकिन आज तक जिम्मेदार विभागों के अधिकारियों द्वारा कानून-कायदों का पालन नहीं कराया जा सका, जिसका परिणाम रहा कि नियम विरुद्ध कारोबार दिन-रात फल-फूल रहा है।
त्योंथर तहसील के ग्राम महेवा झिरिया बसाहट के लोगों ने खनिज, पर्यावरण एवं जिला प्रशासन रीवा का ध्यान आकृष्ट कराते हुए क्रेशर के कारण निर्मित प्रदूषण से निजात दिलाए जाने की मांग की है।


