Mauganj जिला बनने के बाद प्रजापति समाज की बढ़ी मुश्किलें, पोर्टल से नाम गायब होने का आरोप
मऊगंज में प्रजापति-कुम्हार समाज ने जाति प्रमाण पत्र नहीं बनने और डिजिटल पोर्टल पर नाम गायब होने का आरोप लगाया है। महासंघ ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पोर्टल में सुधार की मांग की।
राजेंद्र पयासी मऊगंज
Mauganj। Rewa से अलग होकर वर्ष 2023 में अस्तित्व में आए Mauganj जिले से लोगों को बेहतर प्रशासन और विकास की नई उम्मीदें थीं। लेकिन प्रजापति-कुम्हार समाज का आरोप है कि जिला गठन के बाद एक तकनीकी खामी ने हजारों परिवारों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। समाज के लोगों का कहना है कि डिजिटल पोर्टल पर अनुसूचित जाति की सूची में अनुसूची क्रमांक 35 के तहत दर्ज प्रजापति-कुम्हार का नाम दिखाई नहीं दे रहा, जिसके कारण पिछले करीब तीन वर्षों से जाति प्रमाण पत्र बनने में परेशानी आ रही है।
जाति प्रमाण पत्र नहीं बन पाने से समाज के छात्र-छात्राओं और युवाओं को शिक्षा, छात्रवृत्ति, रोजगार और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। समस्या के समाधान की मांग को लेकर अखिल भारतीय प्रजापति कुम्भकार महासंघ की जिला इकाई ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है।
रीवा में मिल रहा लाभ, मऊगंज में प्रमाण पत्र के लिए परेशानी
समाज के लोगों के मुताबिक, मऊगंज के अलग जिला बनने से पहले संबंधित क्षेत्र रीवा जिले का हिस्सा था और प्रजापति-कुम्हार समाज के पात्र लोगों को अनुसूचित जाति के तहत जाति प्रमाण पत्र जारी किए जाते थे। उनका दावा है कि आज भी रीवा जिले में रहने वाले पात्र परिवारों को छात्रवृत्ति, आवास और सरकारी नौकरियों में आरक्षण सहित अन्य लाभ मिल रहे हैं, लेकिन मऊगंज जिले में प्रमाण पत्र जारी नहीं होने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।
समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि स्थिति ऐसी है कि एक ही परिवार के सदस्य अलग-अलग जिलों में रहने के कारण अलग प्रशासनिक स्थिति का सामना कर रहे हैं। रीवा में रहने वाले सदस्य का जाति प्रमाण पत्र बन रहा है, जबकि मऊगंज में रहने वाले सदस्य को प्रमाण पत्र बनवाने में समस्या आ रही है।
जाति प्रमाण पत्र के अभाव में छात्रों का भविष्य प्रभावित
जिला गठन के बाद इस समस्या का सबसे अधिक असर छात्र-छात्राओं और युवाओं पर पड़ने का दावा किया जा रहा है। समाज के अनुसार, जाति प्रमाण पत्र के अभाव में कॉलेज प्रवेश, छात्रवृत्ति और सरकारी भर्तियों में आरक्षण का लाभ लेने में परेशानी हो रही है।
समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि स्कूल स्तर पर बच्चों के प्रवेश की व्यवस्था किसी तरह हो गई, लेकिन आगे की पढ़ाई और NEET, JEE, व्यापम सहित अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन के दौरान जाति प्रमाण पत्र की आवश्यकता के कारण छात्रों के सामने मुश्किलें खड़ी हो रही हैं। कई युवा सरकारी भर्तियों में आरक्षित वर्ग के तहत आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
तीन साल में 35 बार पत्र भेजने का दावा
समस्या के समाधान की मांग को लेकर बुधवार को अखिल भारतीय प्रजापति कुम्भकार महासंघ, जिला इकाई मऊगंज के अध्यक्ष राममिलन प्रजापति के नेतृत्व में बड़ी संख्या में समाज के लोग कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पोर्टल में सुधार और जाति प्रमाण पत्र जारी करने की मांग की।
महासंघ के पदाधिकारियों का दावा है कि पिछले तीन वर्षों के दौरान शासन को करीब 35 बार आवेदन और पत्र भेजे जा चुके हैं। इसके बावजूद अब तक समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। समाज का आरोप है कि पोर्टल पर हुई तकनीकी त्रुटि के कारण हजारों लोगों की शिक्षा और रोजगार से जुड़े अवसर प्रभावित हो रहे हैं।
प्रजापति समाज ने रखीं दो प्रमुख मांगें
ज्ञापन में महासंघ ने राज्य शासन से दो प्रमुख मांगें की हैं। पहली मांग है कि पोर्टल में तत्काल आवश्यक संशोधन कर अनुसूची क्रमांक 35 के तहत प्रजापति-कुम्हार समाज की प्रविष्टि बहाल की जाए। दूसरी मांग है कि स्थायी समाधान होने तक पात्र छात्र-छात्राओं को अस्थायी जाति प्रमाण पत्र जारी करने की व्यवस्था की जाए, ताकि उनकी पढ़ाई और प्रतियोगी परीक्षाओं में आवेदन प्रभावित न हों।
महासंघ ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द पोर्टल में सुधार कर पात्र लोगों के जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया शुरू नहीं की गई तो समाज बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होगा।
इस दौरान प्रजापति कुम्भकार महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर संजय कुमार जैन से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, कलेक्टर ने अब तक हुई प्रक्रिया की जानकारी देते हुए समस्या के जल्द समाधान का भरोसा दिलाया।
मऊगंज जिले के गठन का उद्देश्य लोगों को प्रशासनिक सुविधाएं उनके नजदीक उपलब्ध कराना था, लेकिन प्रजापति-कुम्हार समाज के लोगों का कहना है कि वे पिछले तीन वर्षों से जाति प्रमाण पत्र से जुड़ी समस्या के समाधान के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अब समाज की नजर राज्य शासन की कार्रवाई पर है।
Anubhav Dubey 
