मौत के मुहाने पर स्कूल: सड़क और गहरे तालाब के बीच पढ़ने को मजबूर बच्चे, शौचालय में लगा ताला
मऊगंज के महावीरपुर स्कूल में बच्चों की सुरक्षा भगवान भरोसे, शौचालय में लटका ताला-खुले में शौच को मजबूर नौनिहाल, 2 साल बाद भी नहीं बनी स्कूल की बाउंड्री, विधायक-कलेक्टर के आदेश का नहीं हुआ पालन
मऊगंज से राजेंद्र पयासी की रिपोर्ट।
मऊगंज जिले में शिक्षा व्यवस्था की पोल खोलती तस्वीर सामने आई है। जिले के दर्जनों शासकीय स्कूलों में शौचालयों पर ताला लटका नजर आता है और बच्चे खुले में शौच जाने को मजबूर हैं। लेकिन सबसे भयावह और जानलेवा स्थिति नगर परिषद नईगढ़ी क्षेत्र में संचालित शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय महावीरपुर की है, जहां बच्चे हर दिन मौत के साये में पढ़ने को मजबूर हैं।
नईगढ़ी-देवतालाब मुख्य मार्ग से सटे इस विद्यालय की भौगोलिक स्थिति ही अपने आप में बड़े हादसे को न्योता दे रही है। विद्यालय भवन से महज 20 फीट की दूरी पर 24 घंटे व्यस्त रहने वाला मुख्य मार्ग गुजरता है।

बच्चे जैसे ही कक्षा से बाहर निकलते हैं, सीधे तेज रफ्तार वाहनों के सामने आ जाते हैं। वहीं, भवन की पिछली दीवार से सटा हुआ 10 फीट से अधिक गहरा, पानी से भरा सिगदार नामक तालाब है। विद्यालय परिसर में आज तक बाउंड्री का निर्माण नहीं कराया गया है। ऐसे में कभी भी कोई बच्चा सड़क हादसे या तालाब में डूबने का शिकार हो सकता है।
बुनियादी सुविधाओं से वंचित विद्यार्थी
विद्यालय में स्वच्छता की स्थिति और भी शर्मनाक है। जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी के कारण विद्यालय के विद्यार्थी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। हालात कुछ इस कदर हैं कि पुराना शौचालय पूरी तरह खंडहर में तब्दील हो चुका है।
शासन से नए शौचालय के लिए राशि स्वीकृत भी हुई और निर्माण भी कराया गया, लेकिन भ्रष्टाचार और लापरवाही की हद देखिए कि शौचालय का सेप्टिक टैंक आज तक अधूरा पड़ा है। वहीं, अधूरे शौचालय के मुख्य दरवाजे पर संस्था प्रमुख द्वारा 24 घंटे ताला लगाकर रखा जाता है।
परिणामस्वरूप, यहां पढ़ने वाले मासूम बच्चों और विशेषकर बच्चियों को मजबूरी में तालाब किनारे खुले मैदान में शौच के लिए जाना पड़ता है, जो उनकी सुरक्षा और सम्मान दोनों के लिए गंभीर खतरा है।सबसे बड़ा सवाल शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर उठता है। विकासखंड शिक्षा अधिकारी, संकुल प्राचार्य से लेकर जिला शिक्षा अधिकारी तक सभी इस गंभीर लापरवाही से आंखें मूंदे बैठे हैं।

सूत्रों का कहना है कि अधिकारी टूर डायरी में खानापूर्ति के लिए निरीक्षण दर्ज कर देते हैं, लेकिन कभी यह जानने की कोशिश नहीं करते कि स्कूलों में पढ़ाई हो रही है या नहीं, शासन की राशि का उपयोग कहां हो रहा है और बच्चों को उसका लाभ मिल रहा है या नहीं।
विधायक-कलेक्टर के निर्देशों का पालन नहीं
शासकीय विद्यालय में जिम्मेदारों द्वारा बरती गई यह लापरवाही तब और भी गंभीर हो जाती है, जब तत्कालीन मऊगंज कलेक्टर अजय श्रीवास्तव और देवतालाब विधायक गिरीश गौतम ने फरवरी 2024 में हुई समीक्षा बैठक में स्पष्ट निर्देश दिए थे कि महावीरपुर विद्यालय की लोकेशन खतरनाक है, इसलिए बच्चों की सुरक्षा के लिए प्राथमिकता के आधार पर बाउंड्री का निर्माण कराया जाए।
दो साल बीत जाने के बाद भी न तो शिक्षा विभाग ने सुध ली और न ही नगर परिषद नईगढ़ी ने इस ओर कोई कदम उठाया। कलेक्टर और विधायक के निर्देशों तक को ठंडे बस्ते में डाल देना प्रशासनिक उदासीनता का सबसे बड़ा प्रमाण है।
अभिभावकों में आक्रोश, कार्रवाई की मांग
शौचालय में ताला बंद होने और तालाब तथा मुख्य मार्ग के कारण निर्मित खतरे को लेकर अभिभावकों में आक्रोश का माहौल बना हुआ है। स्थानीय नागरिकों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि बच्चों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए तुरंत महावीरपुर सहित जिले के सभी बंद शौचालयों के ताले खुलवाए जाएं, अधूरे टैंक का निर्माण पूरा कराया जाए, अति शीघ्र बाउंड्रीवाल बनाई जाए और इस घोर लापरवाही के दोषी संस्था प्रमुख एवं निरीक्षण में लापरवाही बरतने वाले शिक्षा अधिकारियों पर विधि संगत कठोर कार्रवाई की जाए।

अभिभावकों का कहना है कि क्या स्थानीय प्रशासन किसी बड़ी अनहोनी का इंतजार कर रहा है? इस संबंध में डीपीसी राजेश तिवारी से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। वहीं, जिला शिक्षा अधिकारी पीएल मिश्रा ने कहा कि आठवीं तक के स्कूलों की सभी व्यवस्थाओं का दायित्व डीपीसी का है।
बच्चों की सुरक्षा सर्वोपरि है। विद्यालय में अध्ययनरत विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए इंतजाम किए जाएंगे। शौचालय की सुगम व्यवस्था के साथ-साथ बाउंड्री निर्माण हेतु कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
Varsha Shrivastava 
