मैहर जिला अस्पताल में गर्भवती महिला के 5वें प्रसव पर कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी ने जताई नाराजगी
मैहर जिला अस्पताल में कलेक्टर का औचक निरीक्षण। गंदगी और खराब खाने पर जताई नाराजगी,सिजेरियन डिलीवरी बंद होने पर सिविल सर्जन को लगाई फटकार।
मैहर। कलेक्टर बिदिशा मुखर्जी शनिवार शाम अचानक जिला अस्पताल पहुंची। उनके इस औचक निरीक्षण से अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने सुरक्षा व्यवस्था में सेंध, खाने की खराब गुणवत्ता और बंद पड़े OT (ऑपरेशन थिएटर) को लेकर कड़ी नाराजगी जाहिर की। कलेक्टर के साथ एसडीएम दिव्या पटेल और अस्पताल प्रभारी डॉ. आर.एन. पाण्डेय भी मौजूद रहे।

खाने में गुणवत्ता शून्य, सुरक्षा गार्ड नदारद
कलेक्टर ने अस्पताल की रसोई और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने पाया कि मरीजों को दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब है और स्वच्छता का अभाव है। सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि मौके पर सुरक्षा गार्ड मौजूद नहीं थे, जो बेहद चिंताजनक है।

ओटी निर्माणाधीन होने पर भड़कीं कलेक्टर
निरीक्षण में यह बात सामने आई कि पिछले एक महीने से अस्पताल में सिजेरियन (बड़ा ऑपरेशन) डिलीवरी नहीं हो रही है और मरीजों को रेफर किया जा रहा है। इसका कारण ओटी का निर्माणाधीन होना बताया गया। इस पर कलेक्टर ने सख्त लहजे में कहा अगर ओटी निर्माणाधीन है तो इसे विशेष तौर पर 5-6 दिनों के भीतर पूरा कराएं। हमारी कोशिश है कि अगले दो दिनों में इसे ऑपरेशनल कर दिया जाए ताकि महिलाओं को रेफर न करना पड़े।उन्होंने सिविल सर्जन को इस संबंध में तत्काल कार्यवाही के निर्देश दिए।

2026 में भी 5 बच्चे... यह सिस्टम की विफलता है
प्रसूति वार्ड में भर्ती महिलाओं से चर्चा के दौरान जब कलेक्टर को पता चला कि एक महिला ने अपनी पांचवीं संतान को जन्म दिया है, तो वह हैरान रह गईं। उन्होंने इसे एएनएम, आशा कार्यकर्ताओं और सीएचओ की बड़ी विफलता बताया। कलेक्टर ने कहा आज 2026 में भी अगर महिलाएं लड़के की चाहत में 5 बच्चों के बारे में सोच रही हैं, तो इसका मतलब है कि हमारा मैदानी अमला फैमिली प्लानिंग को लेकर कोई काम नहीं कर रहा है। हमें इस रूढ़िवादी सोच से बाहर निकलना होगा।

इसके साथ ही अस्पताल में मिलने वाले खाने पर मरीजों द्वारा खाने के लिए बर्तन लाये जाने पर कलेक्टर भड़क उठी है उन्होंने सीधा कहा कि है यह सब काम तो ठेकेदार का है। उन्होंने सख्त लहजे में कहा है अगर ठेकेदार काम नही कर पा रहा तो उसको बाहर करो।
एमपी में 31% कलेक्टर और SDM महिलाएं हैं
कलेक्टर ने महिला सशक्तिकरण का हवाला देते हुए कहा कि आज जमाना बदल चुका है। एमपी में ही 31 प्रतिशत कलेक्टर और बड़ी संख्या में एसडीएम महिलाएं हैं। उन्होंने 'सभा संवाद' अभियान का जिक्र करते हुए स्पष्ट किया कि जिले से एनीमिया और कुपोषण को जड़ से खत्म करना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है।

नए जिले की चुनौतियों को किया स्वीकार
मैहर के नया जिला होने के कारण आ रही दिक्कतों पर कलेक्टर ने कहा कि चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन हम उन्हें स्वीकार करते हैं। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों की कमी को धीरे-धीरे दूर किया जा रहा है और जल्द ही वरिष्ठ अधिकारियों के विजिट के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े सुधार किए जाएंगे।
Varsha Shrivastava 
