इंदौर में 40 करोड़ की स्मार्ट सिटी सड़क लीक, पानी की टेस्टिंग के समय फूटी पाइपलाइन

गोराकुंड चौराहे के पास स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनाई गई सड़क नई पानी की लाइन की टेस्टिंग के दौरान धंस गई। घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है।

इंदौर में 40 करोड़ की स्मार्ट सिटी सड़क लीक, पानी की टेस्टिंग के समय फूटी पाइपलाइन

Indore Water Pipeline Bursts : मध्य प्रदेश। इंदौर के गोराकुंड चौराहे के पास मंगलवार को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनाई गई सड़क का एक बड़ा हिस्सा अचानक धंस गया। बताया जा रहा है कि नई पानी की लाइन की टेस्टिंग के दौरान सड़क के नीचे से पानी निकलने लगा। पानी का दबाव बढ़ने के बाद सड़क का हिस्सा जमीन में धंस गया। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी गई। हादसे का CCTV फुटेज सामने आने के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है।

CCTV कैमरे में कैद हुई पूरी घटना 

सड़क धंसने की घटना पास लगे CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। फुटेज में सड़क के नीचे से पानी निकलता दिखाई देता है। इसके कुछ ही देर बाद सड़क का एक बड़ा हिस्सा नीचे की ओर बैठ जाता है।

इस घटना ने पानी की लाइन की टेस्टिंग और सड़क की मजबूती को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, सड़क धंसने की सही वजह तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल किसी तरह के भ्रष्टाचार या घटिया सामग्री के इस्तेमाल की पुष्टि नहीं हुई है।

40 करोड़ की लागत से हुआ था निर्माण

गोराकुंड क्षेत्र की सड़क को स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत विकसित किया गया था। इसके निर्माण और विकास कार्य पर करीब 40 करोड़ रुपये खर्च होने की बात सामने आई है। इतनी बड़ी लागत वाली सड़क के इस तरह धंसने के बाद निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद सड़क पानी की लाइन की टेस्टिंग का दबाव नहीं झेल सकी। अब संबंधित विभाग से निर्माण की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की जा रही है।

सड़क के नीचे पानी पहुंचने पर सवाल

घटना का सबसे अहम पहलू यह है कि नई पानी की लाइन की टेस्टिंग के दौरान सड़क के नीचे पानी कैसे पहुंचा। पानी के दबाव के कारण अगर सड़क के नीचे की मिट्टी कमजोर हुई या कटाव हुआ, तो निर्माण के दौरान बेस और भराव की गुणवत्ता की जांच जरूरी होगी।

विशेषज्ञ सड़क के नीचे की मिट्टी, पाइपलाइन, ड्रेनेज सिस्टम और सड़क निर्माण में इस्तेमाल सामग्री की जांच कर सकते हैं। तकनीकी रिपोर्ट के बाद ही यह पता चलेगा कि सड़क धंसने की मुख्य वजह क्या थी।

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हादसे में टला बड़ा नुकसान

सड़क का बड़ा हिस्सा अचानक धंसने से मौके पर अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। गनीमत रही कि घटना के समय धंसे हुए हिस्से पर कोई व्यक्ति या वाहन मौजूद नहीं था। अगर सड़क धंसने के समय वहां यातायात चल रहा होता तो बड़ा हादसा हो सकता था।

घटना के बाद संबंधित अधिकारियों को सूचना दी गई और मौके की स्थिति का जायजा लिया गया। अब सड़क की मरम्मत के साथ उसके नीचे की संरचना की जांच भी जरूरी मानी जा रही है।

निर्माण गुणवत्ता की होगी तकनीकी जांच

फिलहाल सड़क धंसने की वास्तविक वजह स्पष्ट नहीं है। तकनीकी जांच में सड़क की नींव, मिट्टी की स्थिति, पानी की पाइपलाइन और निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच की जा सकती है।

यह भी देखा जाएगा कि पाइपलाइन डालते समय सड़क के नीचे की मिट्टी को किस तरह भरा और दबाया गया था। यदि जांच में निर्माण या पाइपलाइन के काम में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने की मांग उठ सकती है।

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर फिर उठे सवाल

गोराकुंड की घटना ने स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत किए गए विकास कार्यों की गुणवत्ता को लेकर बहस तेज कर दी है। करीब 40 करोड़ रुपये की लागत वाली सड़क का बड़ा हिस्सा पानी की लाइन की टेस्टिंग के दौरान धंसना लोगों के लिए चिंता का विषय है।

अब निगाहें संबंधित विभाग की तकनीकी जांच पर हैं। सड़क को दोबारा ठीक करने के साथ यह भी स्पष्ट करना जरूरी होगा कि निर्माण में कोई तकनीकी कमी थी या पानी की पाइपलाइन से जुड़ी समस्या के कारण यह घटना हुई।