अटलांटिक में क्रूज शिप पर हंतावायरस का कहर, 3 मौतें; यात्रियों में 2 भारतीय शामिल

MV Hondius पर हंतावायरस अलर्ट: WHO सतर्क, कोरोना जैसा खतरा नहीं; 3 की मौत

अटलांटिक में क्रूज शिप पर हंतावायरस का कहर, 3 मौतें; यात्रियों में 2 भारतीय शामिल

अटलांटिक महासागर में सफर कर रहे डच फ्लैग वाले क्रूज शिप MV Hondius पर हंतावायरस संक्रमण के मामले सामने आने के बाद दुनिया भर की स्वास्थ्य एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। जहाज पर अब तक हंतावायरस संक्रमण के पांच मामलों की पुष्टि हुई है, जबकि तीन लोगों की मौत हो चुकी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक जहाज पर मौजूद यात्रियों में दो भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। हालांकि अभी तक उनके संक्रमित होने की पुष्टि नहीं हुई है।

यह क्रूज शिप दक्षिण अमेरिका से यूरोप की ओर जा रहा है और 10 मई तक स्पेन के कैनरी आइलैंड पहुंच सकता है। वहां पहुंचने के बाद जहाज पर मौजूद सभी यात्रियों और क्रू मेंबर्स की मेडिकल जांच की जाएगी।

WHO बोला- कोरोना जैसा खतरा नहीं

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस घटना को गंभीर जरूर माना है, लेकिन फिलहाल आम लोगों के लिए बड़ा खतरा नहीं बताया है। विशेषज्ञों का कहना है कि हंतावायरस कोरोना वायरस की तरह तेजी से इंसान से इंसान में नहीं फैलता।

नीदरलैंड के लीडेन यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर की डॉक्टर करिन एलेन वेल्डकैंप ने कहा कि हंतावायरस का ट्रांसमिशन काफी मुश्किल होता है। संक्रमित मरीजों को अलग आइसोलेशन रूम में रखा जाता है और उनकी देखभाल विशेष रूप से प्रशिक्षित स्टाफ करता है। मरीजों को तब तक आइसोलेशन में रखा जाता है, जब तक उनके लक्षण खत्म नहीं हो जाते और रिपोर्ट नेगेटिव नहीं आ जाती।

एंडीज स्ट्रेन का शक बढ़ा रहा चिंता

WHO के मुताबिक मौत के मामलों में हंतावायरस के एंडीज स्ट्रेन का शक जताया गया है। यह स्ट्रेन मुख्य रूप से अर्जेंटीना और चिली में पाया जाता है। बाकी हंतावायरस की तुलना में एंडीज स्ट्रेन अलग माना जाता है, क्योंकि यह कुछ मामलों में इंसान से इंसान में भी फैल सकता है।

जांच में सामने आया है कि जहाज पर सवार शुरुआती संक्रमित दंपती यात्रा शुरू होने से पहले चिली, अर्जेंटीना और उरुग्वे में बर्ड वॉचिंग ट्रिप पर गए थे। माना जा रहा है कि वहीं किसी संक्रमित चूहे या उसके मल-मूत्र के संपर्क में आने से संक्रमण हुआ हो सकता है। अब अर्जेंटीना की एजेंसियां उनकी पूरी यात्रा की जांच कर रही हैं।

क्या होता है हंतावायरस?

हंतावायरस एक ऐसा वायरस है जो आमतौर पर संक्रमित चूहों से फैलता है। यह वायरस चूहों के मल, मूत्र या लार के जरिए इंसानों तक पहुंच सकता है। कई बार संक्रमित जगहों की धूल या हवा में मौजूद वायरस के कण सांस के जरिए शरीर में चले जाते हैं। इस बीमारी में शुरुआत में बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, उल्टी और पेट दर्द जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। गंभीर मामलों में मरीज को सांस लेने में परेशानी हो सकती है और फेफड़ों में संक्रमण बढ़ सकता है।

40 दिन तक क्वारंटाइन में रखे गए यात्री

हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एलन के मुताबिक जहाज पर मौजूद संक्रमित लोगों और उनके संपर्क में आए यात्रियों को 40 दिनों तक क्वारंटाइन में रखा गया है। इसकी वजह हंतावायरस का लंबा इन्क्यूबेशन पीरियड है। WHO के अनुसार वायरस शरीर में आने के बाद लक्षण दिखने में छह हफ्ते तक लग सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अभी यह पूरी तरह साफ नहीं है कि वायरस शरीर में कितने समय तक सक्रिय रह सकता है। इसी वजह से आने वाले दिनों में नए मामले सामने आने की आशंका बनी हुई है।

7 हफ्ते से यात्रा पर है जहाज

MV Hondius ने 20 मार्च को अर्जेंटीना के उशुआइया से यात्रा शुरू की थी। इसके बाद जहाज दक्षिणी ध्रुव के आसपास के इलाकों में गया और फिर अटलांटिक महासागर पार करते हुए यूरोप की ओर बढ़ा। जहाज में करीब 170 यात्री और 71 क्रू सदस्य मौजूद हैं।

पहला मृतक 70 वर्षीय व्यक्ति था, जिसकी मौत जहाज पर ही हो गई। बाद में उसका शव दक्षिण अटलांटिक में स्थित सेंट हेलेना द्वीप पर उतारा गया। उसकी पत्नी को दक्षिण अफ्रीका पहुंचने के बाद अचानक तबीयत बिगड़ने पर अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी भी मौत हो गई। तीसरे मृतक का शव अभी जहाज पर मौजूद बताया जा रहा है।

कई देशों को भेजा गया अलर्ट

WHO ने सेंट हेलेना में उतरने वाले यात्रियों के कारण 12 देशों को अलर्ट जारी किया है। इनमें ब्रिटेन, अमेरिका, कनाडा, जर्मनी और सिंगापुर जैसे देश शामिल हैं। स्वास्थ्य एजेंसियां यात्रियों की ट्रैवल हिस्ट्री और उनके संपर्क में आए लोगों की पहचान करने में जुटी हैं।

फिलहाल विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्क रहना जरूरी है। WHO और स्थानीय प्रशासन स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।