सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर होगी 37: मोदी कैबिनेट ने दी मंजूरी, पेंडिंग केसों को निपटाने के लिए बड़ा कदम

नई दिल्ली में नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 37 करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। Supreme Court of India में लंबित मामलों के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए यह बड़ा कदम उठाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़कर होगी 37: मोदी कैबिनेट ने दी मंजूरी, पेंडिंग केसों को निपटाने के लिए बड़ा कदम

नई दिल्ली: देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) में लंबित मामलों के बोझ को कम करने और न्याय प्रक्रिया में तेजी लाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक बड़ा ऐतिहासिक कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में सुप्रीम कोर्ट के जजों की संख्या 34 से बढ़ाकर 37 (चीफ जस्टिस सहित) करने के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी गई है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि सरकार संसद के आगामी सत्र में इससे संबंधित विधेयक पेश करेगी। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों का आंकड़ा रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।

1. संवैधानिक शक्ति:
कैसे बढ़ती है जजों की संख्या, भारत के संविधान के अनुच्छेद 124(1) के तहत सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या निर्धारित करने या उसे बढ़ाने का विशेष अधिकार देश की संसद के पास है।

कानूनी प्रक्रिया:
कैबिनेट की इस मंजूरी के बाद, सरकार 'उच्चतम न्यायालय (न्यायाधीशों की संख्या) अधिनियम, 1956' में संशोधन के लिए बिल लाएगी।

कॉलेजियम की भूमिका:
एक बार कानून लागू हो जाने के बाद, सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम नए जजों के नाम की सिफारिश केंद्र सरकार को भेजेगा, जिसके बाद राष्ट्रपति द्वारा इनकी नियुक्ति की जाएगी।

2. जजों की संख्या का इतिहास:
10 से 37 तक का सफर, सुप्रीम कोर्ट की शुरुआत के समय जजों की संख्या काफी कम थी, लेकिन समय के साथ बढ़ती आबादी और मुकदमों के कारण इसमें बदलाव किए गए:

शुरुआत:
मूल रूप से संविधान में मुख्य न्यायाधीश के अलावा केवल 7 जजों की व्यवस्था थी (बाद में 10 हुई)।

2008:
जजों की संख्या 26 से बढ़ाकर 31 की गई थी।

2019:
आखिरी बार जजों की संख्या 31 से बढ़ाकर 34 (33+1) की गई थी।

2026 (प्रस्तावित):
अब कुल संख्या बढ़कर 37 होने जा रही है।

क्यों पड़ी नए जजों की जरूरत? 92 हजार से ज्यादा केस पेंडिंग:
सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने के पीछे सबसे बड़ा कारण लंबित मामले (Pending Cases) हैं। सुप्रीम कोर्ट का डेटा, वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट में 92,385 से अधिक मामले लंबित हैं। कोविड-19 के बाद ई-फाइलिंग की सुविधा बढ़ी है, जिससे नए मामलों के दर्ज होने की दर में भी उछाल आया है।

देशव्यापी स्थिति:
केंद्र सरकार के हालिया आंकड़ों के अनुसार, देश भर की अदालतों में कुल 5.49 करोड़ से अधिक केस पेंडिंग हैं। इनमें से 25 हाई कोर्ट्स में लगभग 63.63 लाख मामले लंबित हैं।

रिक्तियां और आगामी सेवानिवृत्ति:
सुप्रीम कोर्ट पहले से ही जजों की कमी से जूझ रहा है। वर्तमान में यहाँ दो पद खाली हैं:

जस्टिस बी.आर. गवई नवंबर 2025 में रिटायर हो चुके हैं।

जस्टिस राजेश बिंदल अप्रैल 2026 में सेवानिवृत्त हुए हैं।

आने वाले महीनों में संकट और बढ़ सकता है क्योंकि, जून 2026: जस्टिस जे.के. माहेश्वरी और जस्टिस पंकज मित्तल रिटायर होने वाले हैं।

कोर्ट की सख्त टिप्पणी:
PIL अब पैसा इंटरेस्ट लिटिगेशन, इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान बेंच ने जनहित याचिकाओं (PIL) के दुरुपयोग पर भी गहरी चिंता जताई है। सबरीमाला मंदिर से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि PIL अब 'पब्लिक' के बजाय 'प्राइवेट इंटरेस्ट', 'पब्लिसिटी इंटरेस्ट', 'पॉलिटिकल इंटरेस्ट' और यहाँ तक कि 'पैसा इंटरेस्ट लिटिगेशन' बन गई हैं। जजों ने वकीलों को नसीहत दी कि वे व्यक्तिगत प्रसिद्धि के बजाय समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए काम करें।

सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाना न्यायपालिका के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल जजों की संख्या बढ़ाना ही काफी नहीं है, बल्कि अदालतों में तकनीक का अधिक उपयोग और निचली अदालतों में रिक्तियों को भरना भी उतना ही जरूरी है ताकि आम आदमी को समय पर 'तारीख' नहीं, बल्कि 'न्याय' मिल सके।