CJI Surya Kant: देश के कुछ युवा तिलचट्टे हैं, जो मीडिया बनकर व्यवस्था पर हमला करते हैं

"देश के कुछ बेरोजगार युवा तिलचट्टे हैं जिन्हें रोजगार नहीं मिलता, तो सोशल मीडिया में RTI कार्यकर्ता बन जाते हैं।" ये कहना है सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत का, जिन्होंने 15 मई को एक याचिका पर सुनवाई के दौरान भारत के युवाओं को कॉकरोच कह दिया। मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की इस टिप्पणी को लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

CJI Surya Kant: देश के कुछ युवा तिलचट्टे हैं, जो मीडिया बनकर व्यवस्था पर हमला करते हैं
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यह टिप्पणी उस समय आई जब एक वकील ने सीनियर एडवोकेट का दर्जा पाने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी। इस पर नाराजगी जताते हुए CJI Surya Kant और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने वकील को फटकार लगाते हुए कहा- समाज में पहले से ही परजीवी हैं, जो सिस्टम पर हमला करते हैं। “हर कोई सीनियर बनने योग्य हो सकता है, लेकिन आप नहीं। अगर हाईकोर्ट ने आपको सीनियर बनाया, तो सुप्रीम कोर्ट उसे रद्द कर देगा।”

उन्होंने कहा कि-

“समाज में पहले से ही ऐसे परजीवी मौजूद हैं, जो व्यवस्था पर हमला करते हैं और आप उनके साथ हाथ मिलाना चाहते हैं? युवा तिलचट्टों की तरह हैं, उन्हें कोई रोजगार नहीं मिलता, पेशे में उनकी कोई जगह नहीं है। उनमें से कुछ मीडिया में जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया में, कुछ RTI कार्यकर्ता बन जाते हैं, कुछ अन्य कार्यकर्ता बन जाते हैं और वे हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं… और आप लोग अवमानना याचिकाएं दायर करते हैं।”

ये कहने के बाद उन्होंने याचिका खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा कि वह "तुच्छ याचिकाएं दायर करने में लिप्त हैं"।

सुनवाई के दौरान अदालत ने फर्जी LLB डिग्रियों के मुद्दे पर भी चिंता जताई। चीफ जस्टिस ने कहा कि कानून की पढ़ाई और वकालत के पेशे में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है और जरूरत पड़ने पर इस मामले की जांच Central Bureau of Investigation यानी CBI से कराई जा सकती है।