Donald Trump-Xi Jinping की बीजिंग में मुलाकात, व्यापार और AI समेत कई मुद्दों पर चर्चा

Boeing के साथ 120 अरब डॉलर की संभावित विमान डील, चीन-अमेरिका रिश्तों में नरमी के संकेत

Donald Trump-Xi Jinping की बीजिंग में मुलाकात, व्यापार और AI समेत कई मुद्दों पर चर्चा

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और चीनी राष्ट्रपति Xi Jinping के बीच बीजिंग में अहम शिखर वार्ता हुई। दोनों नेताओं की यह मुलाकात चीन की राजधानी बीजिंग स्थित ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में हुई, जहां ट्रम्प का भव्य स्वागत किया गया। इस बैठक को दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के रिश्तों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

बैठक के दौरान व्यापार, टैरिफ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर, रेयर अर्थ मिनरल्स और ताइवान जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा चीन और अमेरिका के बीच संभावित 120 अरब डॉलर की बड़ी विमान डील भी इस दौरे का प्रमुख आकर्षण बनी रही।

जिनपिंग बोले- साझेदार बनें, प्रतिद्वंद्वी नहीं

बैठक की शुरुआत में शी जिनपिंग ने कहा कि पूरी दुनिया इस मुलाकात पर नजर लगाए हुए है। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में वैश्विक स्थिति तेजी से बदल रही है और ऐसे समय में चीन और अमेरिका की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों को टकराव की जगह सहयोग का रास्ता चुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि चीन और अमेरिका को “प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार” बनना चाहिए।

चीनी राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि दोनों देशों के रिश्ते केवल बीजिंग और वॉशिंगटन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका असर पूरी दुनिया पर पड़ता है। उन्होंने वैश्विक स्थिरता और आर्थिक संतुलन के लिए दोनों देशों के सहयोग को जरूरी बताया।

डोनाल्ड ट्रम्प ने जिनपिंग की तारीफ की

डोनाल्ड ट्रम्प ने भी बैठक के दौरान जिनपिंग की खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि “आपका दोस्त होना सम्मान की बात है।” ट्रम्प ने भरोसा जताया कि अमेरिका और चीन के रिश्ते आने वाले समय में पहले से बेहतर होंगे।

ट्रम्प ने कहा कि वह दुनिया के सबसे बड़े कारोबारी नेताओं को अपने साथ चीन लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिकी कंपनियां चीन में व्यापार और निवेश बढ़ाने को लेकर उत्साहित हैं। ट्रम्प ने जिनपिंग को एक मजबूत और महान नेता बताते हुए कहा कि दोनों देशों के बीच बेहतर व्यापारिक संबंध पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक साबित होंगे।

अमेरिकी बिजनेस दिग्गज भी पहुंचे चीन

इस दौरे में कई बड़े अमेरिकी कारोबारी भी ट्रम्प के साथ चीन पहुंचे। इनमें Elon Musk, Tim Cook और Jensen Huang जैसे बड़े नाम शामिल हैं। इन उद्योगपतियों की मौजूदगी इस बात का संकेत मानी जा रही है कि अमेरिका और चीन दोनों व्यापारिक रिश्तों को नए स्तर पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। खासतौर पर टेक्नोलॉजी और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है।

सेमीकंडक्टर और AI तकनीक को लेकर दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में तनाव बढ़ा था। अमेरिका ने कई चीनी टेक कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए थे, जबकि चीन भी तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से काम कर रहा है। ऐसे में इस बैठक को तकनीकी प्रतिस्पर्धा और सहयोग दोनों के नजरिए से अहम माना जा रहा है।

120 अरब डॉलर की बोइंग डील पर दुनिया की नजर

इस दौरे की सबसे बड़ी चर्चा अमेरिकी विमान निर्माता कंपनी Boeing के साथ संभावित विमान खरीद समझौते को लेकर रही। रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन बोइंग से करीब 120 अरब डॉलर के विमानों की खरीद कर सकता है। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग 9 से 10 लाख करोड़ रुपए के बराबर बैठती है।

अगर यह समझौता होता है तो यह दुनिया की सबसे बड़ी एविएशन डील्स में शामिल हो सकता है। इससे अमेरिकी एविएशन इंडस्ट्री को बड़ा फायदा मिलेगा, वहीं चीन की तेजी से बढ़ती एयर ट्रैफिक जरूरतों को भी मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील केवल व्यापारिक नहीं बल्कि रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम होगी। इससे दोनों देशों के बीच तनाव कम करने और आर्थिक सहयोग बढ़ाने का संदेश जाएगा।

चीनी राष्ट्रपति ट्रम्प को देंगे स्टेट डिनर 

माना जा रहा है कि अमेरिका चाहता है कि चीन अमेरिकी कृषि उत्पादों, विमान और टेक्नोलॉजी उत्पादों की खरीद बढ़ाए। वहीं चीन की दिलचस्पी उन्नत सेमीकंडक्टर तकनीक और AI विकास में बनी हुई है। दोनों देशों के बीच रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर भी बातचीत हुई, क्योंकि इनका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, मोबाइल फोन और रक्षा उपकरणों में होता है।

इन सब के बीच चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने ट्रम्प के सम्मान में स्टेट डिनर का भी आयोजन करेंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक, चीन इस आयोजन के जरिए यह संदेश देना चाहता है कि वह अमेरिका के साथ अपने रिश्तों को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण मानता है।

हालांकि दोनों देशों के बीच ताइवान, व्यापार और टेक्नोलॉजी जैसे कई मुद्दों पर मतभेद अभी भी बने हुए हैं, लेकिन इस मुलाकात ने यह संकेत जरूर दिया है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी शक्तियां टकराव की जगह संवाद और सहयोग का रास्ता तलाशना चाहती हैं।