Arvind Kejriwal ने कहा : आबकारी केस में जज Justice Swarnkanta Sharma पर पक्षपात का शक, हटाने की मांग के साथ गिनाईं 10 वजहें

Arvind Kejriwal ने आबकारी नीति केस में Justice Swarnkanta Sharma से खुद को अलग करने की मांग की। उन्होंने कोर्ट में 10 वजहें गिनाते हुए पक्षपात की आशंका जताई और ED-CBI पर सवाल उठाए।

Arvind Kejriwal ने कहा : आबकारी केस में जज Justice Swarnkanta Sharma पर पक्षपात का शक, हटाने की मांग के साथ गिनाईं 10 वजहें

नई दिल्ली: दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सोमवार को दिल्ली हाईकोर्ट पहुंचे और आबकारी नीति (शराब घोटाला) मामले में खुद अपनी पैरवी की। उन्होंने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से मामले से हटने (रिक्यूजल) की मांग करते हुए डेढ़ घंटे तक जोरदार दलीलें रखीं। केजरीवाल ने कहा कि उन्हें पहले से ही दोषी मान लिया गया है और कोर्ट के आदेशों में ED-CBI के हर तर्क को बिना सवाल के स्वीकार करने का पैटर्न दिखता है।

27 फरवरी 2026 केस पर हो रही सुनवाई:
यह सुनवाई ट्रायल कोर्ट के 27 फरवरी 2026 के उस आदेश के खिलाफ CBI की याचिका पर हो रही है, जिसमें केजरीवाल समेत 23 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। ट्रायल कोर्ट ने CBI की जांच की कड़ी आलोचना भी की थी। 9 मार्च को जस्टिस शर्मा की बेंच ने CBI की याचिका पर सुनवाई की और ट्रायल कोर्ट के आदेश के कुछ हिस्सों पर प्रथम दृष्टया गलत बताते हुए रोक लगा दी थी। इस पर केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य आरोपियों ने रिक्यूजल अर्जी दाखिल की।

केजरीूवाल ने कोर्ट में कहा:
कोर्ट में केजरीवाल ने कहा, 9 मार्च को जब आदेश आया तो मेरा दिल बैठ गया। उस दिन सिर्फ CBI मौजूद थी। बिना हमारी बात सुने ट्रायल कोर्ट के लंबे फैसले को महज कुछ मिनटों में गलत ठहरा दिया गया। ट्रायल कोर्ट ने पूरे दिन सुनवाई कर 40,000 पन्नों के दस्तावेज पढ़े थे, लेकिन हाईकोर्ट ने एकतरफा तरीके से फैसला सुना दिया।

केजरीवाल की 10 प्रमुख दलीलें:
केजरीवाल ने जस्टिस शर्मा को हटाने के लिए 10 वजहें गिनाईं। इनमें शामिल हैं:

एकतरफा सुनवाई:
9 मार्च को CBI के अलावा कोई पक्ष नहीं सुना गया। ट्रायल कोर्ट के आदेश को बिना पर्याप्त सुनवाई के गलत बताया गया।

एप्रूवर बयानों पर उलटफेर:
पहले कोर्ट ने एप्रूवर के बयानों को मान्य बताया था, लेकिन अब ट्रायल कोर्ट की उन पर की गई टिप्पणियों को गलत करार दिया।

सत्येंद्र जैन मामले का हवाला:
केजरीवाल ने कहा कि सत्येंद्र जैन मामले में भी पक्षपात की आशंका पर जज ने खुद को अलग कर लिया था। यहां भी आरोपी के मन में उचित आशंका पर्याप्त आधार है।

IO के खिलाफ कार्रवाई पर रोक:
ट्रायल कोर्ट द्वारा जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश पर बिना IO को सुने CBI के कहने पर रोक लगा दी गई।

डिस्चार्ज आदेश पर सख्त नियम:
कानून में डिस्चार्ज आदेश को बहुत कम मामलों में रोका जाता है, फिर भी यहां बिना पूरी सुनवाई के आंशिक रोक लगाई गई।

तेज रफ्तार सुनवाई:
इस मामले और सिसोदिया के मामले की सुनवाई असामान्य तेजी से हो रही है, जबकि अन्य मामलों में ऐसा नहीं होता।

CBI-ED की हर दलील स्वीकार:
कोर्ट में CBI और ED की लगभग हर मांग मंजूर हो जाती है। सिर्फ एक-दो मामलों में अपवाद देखा गया।

पिछले आदेशों का पैटर्न:
इस बेंच के सामने आए 5 संबंधित मामलों (जमानत याचिकाएं) में टिप्पणियां निर्णय जैसी रही हैं।

RSS से जुड़े कार्यक्रम:
जस्टिस शर्मा ने अखिल भारतीय अधिवक्ता परिषद (ABAP) के कार्यक्रमों में चार बार भाग लिया, जो RSS की कानूनी इकाई मानी जाती है। केजरीवाल ने कहा, हम उस विचारधारा के पूरी तरह खिलाफ हैं। राजनीतिक मामले में इससे पक्षपात की आशंका बनती है।

सोशल मीडिया और करीबी संबंध:
अगर जज के करीबी किसी पक्ष से जुड़े हों तो जज खुद रिक्यूज कर लेते हैं। यहां भी उचित आशंका पर विचार होना चाहिए।

केजरीवाल ने जोर देकर कहा कि सवाल जज की ईमानदारी का नहीं, बल्कि आरोपी के मन में उत्पन्न उचित आशंका का है। उन्होंने अदालत का सम्मान व्यक्त करते हुए कहा कि निष्पक्ष न्याय मिले, यही मेरा उद्देश्य है।


CBI का विरोध:
CBI ने रिक्यूजल अर्जी का विरोध किया है। उसने कहा कि ABAP के कार्यक्रम कानूनी सेमिनार थे, जिनमें सुप्रीम कोर्ट के कई जज भी शामिल होते हैं। ऐसे में सिर्फ इस आधार पर रिक्यूजल नहीं हो सकता। CBI ने कहा कि जज के फैसले निष्पक्ष रहे हैं। ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद केजरीवाल 156 दिनों और सिसोदिया 530 दिनों तक जेल में रहे थे। सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिलने के बाद यह मामला हाईकोर्ट पहुंचा है। यह सुनवाई राजनीतिक और कानूनी गलियारों में काफी चर्चा का विषय बनी हुई है। कोर्ट अब इस रिक्यूजल अर्जी पर फैसला करेगा। अगर रिक्यूजल मंजूर नहीं होता तो मुख्य याचिका पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।