NEET पेपर लीक विवाद 2026: CBI जांच तेज, अब तक हिरासत में लिए गए 5 आरोपी
NEET UG 2026: परीक्षा रद्द और पुनः परीक्षा कराने की मांग पर सुप्रीम कोर्ट में याचिका
देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा National Testing Agency द्वारा आयोजित NEET UG 2026 परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ी के आरोपों के बाद मामला अब जांच एजेंसियों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है।
वहीं, इस मामले में अलग-अलग राज्यों से अब तक 5 आरोपी हिरासत में लिए गए हैं। इससे पहले 13 मई को 14 संदिग्धों से 24 घंटे तक लंबी पूछताछ की गई थी। आरोपियों को बुधवार को कोर्ट ने ट्रांजिट रिमांड पर भेजा था। वहीं, अब CBI सभी आरोपियों को दिल्ली ले जाएगी।
3 राज्यों में हिरासत, कई आरोपी जांच के घेरे में
पेपर लीक मामले में अब तक महाराष्ट्र, राजस्थान और हरियाणा से कुल 5 लोगों को हिरासत में लिया गया है। सीकर से आरोपी मांगी लाल बिंवाल, जमवारामगढ़ के भाई दिनेश बिंवाल, बेटा विकास बिंवाल, हरियाणा के गुरुग्राम के रहने वाले यश यादव और नासिक से शुभम खैरनार को गिरफ्तार किया है। शुभम ने ही यश को पेपर दिया था।

जांच एजेंसी ने विक्रम यादव, योगेश प्रजापत, संदीप हरितवाल, नीतेश अजमेरा, सत्यनारायण, विक्रम, राकेश, रजत, अमित मीणा और रोहित मावलिया को पूछताछ के बाद छोड़ दिया है।
महाराष्ट्र के पुणे से ब्यूटीशियन मनीषा वाघमारे है और अहिल्यानगर से धनंजय निवृत्ति लोखंडे को भी हिरासत में लिया गया है। इनसे पूछताछ की जा रही है। आरोप है कि मनीषा के 21 खातों में 10 लाख रुपए जमा किए गए थे।
राजस्थान में 1000 छात्रों तक पहुंचा पेपर
राजस्थान पुलिस की स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के अनुसार, यह आशंका जताई जा रही है कि पेपर करीब 1000 उम्मीदवारों तक पहुंच चुका था। यह खुलासा जांच को और गंभीर बना देता है, क्योंकि इससे परीक्षा की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। जांच एजेंसियां अब नेटवर्क और पैसे के लेन-देन की भी जांच कर रही हैं।
CBI और कोर्ट की निगरानी में जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए Central Bureau of Investigation को भी जांच में शामिल किया गया है। एजेंसी सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है और पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास कर रही है। इसी बीच मामला Supreme Court of India तक पहुंच गया है, जहां फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (FAIMA) ने याचिका दायर कर परीक्षा को कोर्ट की निगरानी में दोबारा कराने और NTA के पुनर्गठन की मांग की है।

छात्रों में असमंजस, भविष्य पर सवाल
22 लाख से अधिक छात्रों ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया था। लेकिन पेपर लीक की खबरों और कानूनी लड़ाई के बीच छात्रों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है। कई छात्र संगठनों ने निष्पक्ष परीक्षा प्रक्रिया की मांग की है। अब पूरा मामला जांच रिपोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर है। यदि आरोप साबित होते हैं तो परीक्षा प्रक्रिया और परिणामों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
Varsha Shrivastava 
